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'पहले रामवृक्ष को लोगों ने बुरी तरह पीटा, फिर वो भागते हुए गिर गया आग में'

Sat, 11 Jun 2016 04:26 AM IST
चंद्रमोहन शर्मा/अमर उजाला, आगरा
चंद्रमोहन शर्मा/अमर उजाला, आगरा Updated Sat, 11 Jun 2016 04:26 AM IST
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police is saying that they had not beaten ramvriksh
आग में जलने से पहले जनता ने पीटा था रामवृक्ष को। - फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, मथुरा

आपरेशन जवाहर बाग में रामवृक्ष समेत 27 कब्जाधारियों की मौत की जांच शुरू कर दी है। पुलिस की कहानी कहती है कि इन सभी की जान दो कारणों से गई। पहले इन्हें जनता ने पीटा। दूसरी, ये भागते समय आग में गिर गए। इसे साबित करने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का सहारा लिया जा रहा है। इसमें एक भी कब्जाधारी के शव में न तो गोली पाई गई थी और न ही इसका निशान। यही रिपोर्ट न्यायिक जांच आयोग के सामने रखे जाने की तैयारी चल रही है। इसमें यह भी बताया गया है कि  रामवृक्ष ने पुलिस अफसरों पर गोली चलाई थी।

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पुलिस ने अभी तक दर्ज 75 मुकदमों की जांच-पड़ताल तेज कर दी है। प्राथमिकता पर दो केस लिए गए हैं। पहला मथुरा के एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ फरह संतोष यादव की शहादत का। दूसरा कब्जाधारियों के दबंग नेता रामवृक्ष यादव की मौत का।
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दोनों में आपस में संबंध भी है। पुलिस सूत्रों की मानें तो केस डायरी में लिखापढ़ी इस तरह से की जा रही है कि दोनों पुलिस अफसरों पर कब्जाधारियों के साथ रामवृक्ष ने भी गोली चलाई थी। इसके बाद वह अपने दफ्तर में आग लगाकर भाग रहा था। तभी आस पास के लोग पहुंच गए थे। उनकी पिटाई से ही वह घायल होकर आग में घिर गया। खुद की लगाई आग में ही उसकी जान निकल गई। पूरी रिपोर्ट में कहीं भी ऐसा कोई जिक्र नहीं है कि उसे पुलिस ने एक डंडा भी मारा।

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'गोली लगने से सिर्फ एक की हुई मौत'

police is saying that they had not beaten ramvriksh

दो जून की शाम आपरेशन जवाहर बाग में दो पुलिस अफसरों के अलावा 27 कब्जाधारियों की जान गई थी। गोलियां दोनों ओर से चली थीं। लेकिन 29 शवों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोली लगने से सिर्फ एक की मौत आई। यह एसओ फरह संतोष यादव थे। मुकुल की शहादत सिर में पत्थर की चोट से हुई थी। कब्जाधारियों ने उनके सिर पर पीछे से पत्थर मारे थे। 27 कब्जाधारियों में आधे से ज्यादा चोट लगने से मरे। शेष की जान आग में जलने से हुई।

रामवृक्ष यादव के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण चोट लगना था। उसका शव झुलसा हुआ था। पुलिस सूत्रों ने बताया कि इसकी जांच में मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और कब्जाधारियों के बयान दर्ज किए गए हैं। पुलिस के उच्च पदस्थ सूत्रों ने पुष्टि की है कि कि अभी तक की जांच में यही बात सामने आई है कि जब रामवृक्ष अपने दफ्तर में आग लगाकर भाग रहा था, तब पब्लिक आ चुकी थी। लोगों ने उसे लाठी-डंडों से पीटा।

वह जख्मी होकर उसी आग में जा गिरा जो उसने खुद ने लगाई थी। यहीं उसकी जान गई। जिस जगह पुलिस अफसर शहीद हुए, रामवृक्ष की लाश उससे काफी दूर गेट के पास मिली थी। अब देखना यह है कि न्यायिक आयोग पुलिस की जांच रिपोर्ट पर विश्वास करता है या फिर सच्चाई जानने केलिए खुद जांच पड़ताल करता है।

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