शिकंजे में फंसा पुलिस को गच्चा देने वाला उम्रकैदी
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किरदार एक पर कहानी दो, वो भी खाकी के सामने ऐसा ड्रामा। नहीं साहब कानून अंधा जरूर है पर मुजरिम को खोज निकालने में तो महारत हासिल है। एक ऐसी ही कहानी सामने आई है मुंबई से। दो साल तक पुलिस को चकमा देकर फरार नासिक जेल का एक कैदी मनोज कुमार पासवान उर्फ गब्बर को पुलिस ने धर ही दबोचा। नासिक जेल के इस कैदी को उम्रकैद की सजा मिली थी लेकिन 2016 से वह पैरोल पर था और बिना किसी जानकारी के गायब हो गया था। इसके बाद से ही मुंबई पुलिस उसे ढूंढने में लगी थी।
पुलिस ने बताया कि मनोज को 2012 में एक 14 साल की नाबालिग का अपहरण और बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। मुंबई की डिंडोशी सेशन कोर्ट में ट्रायल चला और फिर 2014 में उसे दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई। तबसे वह नासिक जेल में था। यहां दो साल बाद 4 फरवरी 2016 को उसे बिहार के शिवहर जिले में मौजूद उसकी मां की बीमारी के चलते 15 दिन की परोल मिली और वह बाहर आ गया। पुलिसकर्मी ने बताया कि मनोज को वहां के तारायणी पुलिस स्टेशन में परोल के दौरान हर रोज रिपोर्ट करने को कहा गया था लेकिन 15 दिन बीतने के बाद भी वह जब नासिक जेल नहीं लौटा। इसके बाद 6 मार्च 2016 को उसे भगोड़ा करार दिया गया।
सेलफोन नंबर खरीदते ही फंस गया चंगुल में
पुलिस ने बताया कि मनोज के खिलाफ आरे पुलिस स्टेशन में धारा 224 के तहत एक एफआईआर दर्ज कराई गई। सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया लेकिन फिर भी उसे ट्रेस नहीं किया जा सका था। एक साल बाद आरे पुलिस को जानकारी मिली कि उसने अपने गांव में एक लोकल सेलफोन नंबर खरीदा था और हाल ही में पुलिस को कंफर्म हुआ कि वह उसी गांव में है और फिर एक पुलिस की टीम बिहार भेजी गई।
शादी में पहचानना हुआ थोड़ा मुश्किल
24 जून को पुलिस को पता चला कि वह अपने घर से कुछ किमी दूर स्थित एक शादी में मौजूद है। जहां पुलिसकर्मियों को रात करीब 11 बजे मनोज शादी में नाचता हुआ मिला। हालांकि पुलिस को उसे तुरंत पहचानने में काफी मुश्किल हुई क्योंकि वह पहले से काफी मोटा हो गया था और उसकी दाढ़ी-मूंछें भी आ गई थीं। एक स्थानीय की मदद से पुलिस ने कंफर्म कर मनोज को गिरफ्तार कर लिया।