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120 साल पहले ही मलेरिया के मच्छर पर लिखी गई थी कविता
भाषा, नई दिल्ली
Updated Tue, 21 Aug 2018 05:54 PM IST
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ब्रिटेन के डॉक्टर सर रोनाल्ड रॉस ने 1897 में यह खोज करने के बाद कि मलेरिया के परजीवी मच्छर में पलते हैं, एक कविता लिखी थी और इस रोग के प्रति लड़ाई को लेकर उम्मीद जताई थी। तब उन्हें अंदाजा नहीं रहा होगा कि 120 वर्ष बाद भी यह बीमारी जानलेवा बनी रहेगी।
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रॉस को मलेरिया प्रेषण पर किए गए उनके काम के लिए 1902 में चिकित्सा के नोबल पुरस्कार से नवाजा गया था। वह वैज्ञानिक के अलावा एक कवि भी थे। उनका जन्म वर्ष 1857 में भारत के अल्मोड़ा में हुआ था।
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उन्होंने मच्छर की आंतों में मलेरिया के परजीवी की मौजूदगी की पुष्टि की थी। दुनिया भर में 20 अगस्त को विश्व मच्छर दिवस मनाया जाता है। रॉस ने 21 अगस्त 1897 को मच्छरों में मलेरिया के परजीवी की खोज करने के बाद सकारात्मक भाव वाली एक कविता लिखी थी।
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अंग्रेजी में लिखी इस कविता की कुछ पंक्तियों का स्थूल अनुवाद है, ‘‘आंसुओं और हांफती सांसें, मैंने तेरे धूर्तता भरे ही बीजों को पा लिया है, लाखों की हत्या करने वाली ओ मौत। सहस्रो व्यक्ति बचेंगे। ओ मृत्यु, कहां हैं तेरा दंश? तेरी विजय, ओ कब्र।’’