केरल: पॉक्सो कोर्ट ने सबूत के अभाव में तीन आरोपियो को किया बरी
केरल की पॉक्सो अदालत ने पलक्कड़ के दो नाबालिगों की कथित आत्महत्या मामले के तीन आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। जनवरी 2017 में 13 साल का नाबालिग अपने घर के अंदर लटकते हुए मिला था। इसके दो महीने बाद उसकी नौ साल की बहन ने आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पहले दोनों बहनों का यौन शोषण हुआ था। बड़ी बहन ने जनवरी में जबकि छोटी बहन ने मार्च 2017 में आत्महत्या की थी।
Kerala: Protection of Children from Sexual Offences (POCSO) Court acquitted 3 accused in alleged suicide case of 2 minors in Palakkad,citing lack of evidence. In Jan 2017,a 13-year-old was found hanging in her house&2 months later her 9-year-old sister allegedly committed suicide
— ANI (@ANI) October 28, 2019विज्ञापन
मौत के बाद दोनों बहनों का पोस्टमार्टम किया गया था जिसमें इस बात की पुष्टि हुई थी कि उनका यौन शोषण हुआ है। अभियोजन पक्ष ने मामले में आरोपी के रूप में एक नाबालिग सहित पांच लोगों को सूचीबद्ध किया था। चार्जशीट में आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम के अलावा दुष्कर्म और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप भी लगाए गए थे। शुक्रवार को पॉक्सो अदालत ने तीन आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
इससे पहले अदालत ने एक आरोपी को रिहा कर दिया था। नाबालिग आरोपी का मुकदमा किशोर अदालत में चल रहा है। आरोपियों की रिहाई के विरोध में परिवार ने विरोध प्रदर्शन किया। पीड़ित लड़कियों की मां ने कहा, 'मेरी बेटियों को न्याय नहीं मिला। जिन लोगों ने उनकी हत्या की वह खुले में घूम रहे हैं। मैंने अदालत को विस्तार से बताया कि मेरी बेटियों के साथ क्या हुआ था।'
पीड़िताओं की मां ने पुलिस जांच में चूक का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'न्याय के लिए लड़ने का फैसला करने के बाद हमारे पास परिवार के सदस्यों का भी समर्थन नहीं है।' जहां परिवार ने पुलिस और अभियोजन को दोषी ठहराया है। वहीं केरल के अनुसूचित जाति/जनजाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री एके बालन ने कहा कि सरकार अदालत के फैसले के खिलाफ अपील करने की संभावनाओं पर गौर करेगी। यदि पुलिस की तरफ से जांच में कोई चूक हुई है तो सरकार उसपर भी ध्यान देगी।