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PNB फ्रॉड: घोटाला पता चलने के चार दिन बाद सीबीआई के पास पहुंचा बैंक

Fri, 16 Feb 2018 06:30 PM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Updated Fri, 16 Feb 2018 06:30 PM IST
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PNB scam: Four days after the scam detected, the bank reached to CBI
pnb
पंजाब नेशनल बैंक ने कहा है कि नीरव मोदी के 114 अरब रुपये के घोटाले के बारे में पता चलने के चार दिन बाद उसने आरबीआई और सीबीआई को इसकी जानकारी दी, जबकि स्टॉक एक्सचेंज एवं सेबी जैसी नियामक संस्थाओं को इसकी सूचना 10 दिन बाद दी। स्टॉक एक्सचेंजों ने जब इस धोखाधड़ी के बारे में स्पष्टीकरण की मांग की तो बैंक ने देर रात फाइल रिपोर्ट में बताया कि कैसे नीरव और उसकी कंपनियों ने फर्जी बैंक गारंटी का इस्तेमाल कर भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं से 114 अरब रुपये को लोन हासिल कर लिए।
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पीएनबी को इस घोटाले के बारे में 25 जनवरी को पता चला। इसके चार दिन बाद 29 जनवरी को उसने आरबीआई को इसकी जानकारी दी। उसी दिन सीबीआई को एफआईर दर्ज करने की शिकायत दी गई। जबकि स्टॉक एक्सचेंजों को इसके बारे में 5 फरवरी को बताया गया। बैंक की ओर से इसके बाद 7 फरवरी को आरबीआई को एक और फ्रॉड रिपोर्ट सौंपी गई।
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उसी दिन सीबीआई में एक और शिकायत दर्ज करवाई गई। इसके आधार पर सीबीआई ने 13 फरवरी को एक एफआईआर दर्ज की जिसमें नीरव मोदी, गीतांजलि ग्रुप और चंद्री पेपर एंड एलायड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को आरोपी बनाया गया। प्रवर्तन निदेशालय को भी शिकायत दर्ज करवाई गई और स्टॉक एक्सचेंजों को इसके बारे में एक दिन बाद बताया गया।
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आंतरिक व्यवस्था को किया जा रहा था दरकिनार

PNB scam: Four days after the scam detected, the bank reached to CBI
nirav modi
बैंक के अनुसार मुंबई की ब्रैडी हाउस ब्रांच में तैनात डिप्टी मैनेजर गोकुलनाथ शेट्टी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग जारी करने के बाद बैंक के सीबीएस के इंटरनल मैसेजिंग सिस्टम को संदेश न देकर सीधे ग्लोबल पेमेंट सिस्टम के लिए उपलब्ध स्विफ्ट के भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं को आरोपी कंपनियों को एलओयू के बराबर लोन जारी करने की सूचना भेज देता था। सीबीएस और स्विफ्ट प्रणालियों के जुड़े नहीं होने के कारण कई सालों तक यह घोटाला चलता रहा।

रकम वसूली के लिए बैठकें भी हुईं

बैंक ने बताया है कि 16 जनवरी को जब आरोपी कंपनियों के अधिकारी आयात दस्तावेजों के साथ एलओयू जारी करवाने पहुंचे तो बैंक अधिकारी ने लोन मंजूरी सीमा नहीं होने के कारण उनसे 100 फीसदी कैश मार्जिन की मांग की। इस पर कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि पूर्व में वे बिना कैश मार्जिन के ही एलओयू जारी करवाते रहे हैं। शक होने पर जांच की गई तो पूरे घोटाले का पता चला। इसके बाद आरोपी कंपनियों के साथ रकम की वसूली को लेकर बैंक के दिल्ली और मुंबई कार्यालयों में बैठकें भी की गईं। इसका कोई नतीजा नहीं निकला तो नियामक एवं जांच एजेंसियों को जानकारी देने का फैसला किया गया।
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