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Hindi News ›   India News ›   PMO called up Election Commission to push for joint Lok Sabha, assembly polls

PMO ने EC पर लोकसभा-विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का बनाया था दबाव

Mon, 25 Jul 2016 09:58 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 25 Jul 2016 09:58 AM IST
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PMO called up Election Commission to push for joint Lok Sabha, assembly polls
- फोटो : file photo
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय से चुनाव आयोग को कहा गया था कि लोकसभा और राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं। यह खुलासा इंडियन एक्सप्रेस की आरटीआई दाखिल करने के बाद हुआ है। अंग्रेजी अखबार पर प्रकाशित खबर के मुताबिक पिछले वर्ष ही पीएमओ से चुनाव आयोग को इस संबंध में कॉल गई थी। लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने की बात ने इस साल उस वक्त सुर्खियां पकड़ी थीं, जब मार्च में पीएम नरेंद्र मोदी ने बीजेपी की एक गोष्ठी में यह बात कही थी। लेकिन तब यह बात सामने नहीं आई थी कि 2014 में मोदी के प्रधानमंत्री बनने के साल भर बाद ही पीएमओ ने चुनाव आयोग से सीधे इस मामले में बात की थी।
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एक पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने नाम न छापने की शर्त पर इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि पीएमओ और चुनाव आयोग के बीच में बातचीत होना बहुत ही दुर्लभ और असाधारण मामला है, लेकिन अनुचित नहीं। चुनाव संबंधी मामलों पर चुनाव आयोग सरकार के कानून और गृहमंत्रालय से सीमित बात करता है।
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उन्होंने कहा कि 28 जनवरी 2015 के दिन उन्हें राज्यों के मुख्य चुनाव आयुक्त एचएस ब्रह्मा और पीएम के प्रधान सचिव निरिपेंद्र मिश्रा का हस्ताक्षर किया पत्र मिला था, जिसमें कहा गया था कि सरकार लोकसभा और राज्यों के चुनाव हर हाल में एक साथ कराने का विचार रखती है।
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'पीएओ से कहा गया कि तीन हफ्ते में चुनाव आयोग रिपोर्ट तैयार करे'

PMO called up Election Commission to push for joint Lok Sabha, assembly polls

पूर्व कमिश्नर ने कहा कि 36 राज्यों के चुनाव फिर से कराना आसान बात नहीं है, इसमें बड़ा व्यवधान खड़ा होता है। उन्होंने बताया कि फिर सरकार की तरफ से कहा गया कि चुनाव आयोग तीन हफ्ते के भीतर एक पत्र तैयार करें ताकि आंतरिक तौर सभी पार्टियों और विशेषज्ञों से बात की जा सके। इस पत्र को संसद की स्टैंडिंग कमेटी के साथ साझा किया गया था। 

ब्रह्मा, जोकि 19 अप्रैल 2015 में मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से सेवानिवृत्त हुए थे, उन्होंने इस बात पर मुहर लगाई कि पीएमो से उनकी बात हुई थी। उन्होंने कहा ''मुझे याद है कि 2015 में मुझे प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से टेलीफोन कॉल आई थी, जिसमें कहा गया था कि दोनों चुनावों कराए जा सकते हैं या नहीं, इस पर कुछ काम किया जाए। चुनाव आयोग ने इसका अध्ययन किया और रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। मुझे यकीन है उसी रिपोर्ट के आधार पर सरकार फैसला लेगी।

निरिपेंद्र मिश्रा से इस मामले पर बात नहीं हो पाई।

लोकसभा और विधानसभा चुनान एक साथ कराना बीजेपी का पुराना मुद्दा रहा है। 2011 में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने इस पर खूब जोर दिया था। 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी के चुनावी घोषणापत्र में दोनों चुनाव एक साथ कराने का जिक्र किया गया था।

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