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PMGKAY Rice Discontinued: चावल में पोषक तत्व मिलाने की प्रक्रिया अस्थायी रूप से बंद, सरकार ने क्यों किया ऐसा?
Fri, 27 Feb 2026 10:23 PM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: अमन तिवारी
Updated Fri, 27 Feb 2026 10:23 PM IST
सार
सरकार ने पोषक तत्वों की कमी और शेल्फ लाइफ की चिंताओं के कारण पीएमजीकेएवाई के तहत फोर्टिफाइड चावल की सप्लाई रोक दी है। आईआईटी खड़गपुर की रिपोर्ट के बाद यह फैसला लिया गया। हालांकि, राशन वितरण और मिड-डे मील जैसी योजनाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी।
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चावल में पोषक तत्व मिलाने की प्रक्रिया अस्थायी रूप से बंद (सांकेतिक)
- फोटो : Adobe stock
विस्तार
केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत दिए जाने वाले चावल के फोर्टिफिकेशन (पोषक तत्व मिलाने की प्रक्रिया) को फिलहाल बंद कर दिया है। एक आधिकारिक बयान में सरकार ने कहा है कि लंबे समय तक भंडारण (स्टोरेज) के दौरान चावल में मौजूद पोषक तत्वों के खराब होने की आशंका है, इसलिए यह कदम उठाया गया है।
आईआईटी खड़गपुर की स्टडी के बाद लिया फैसला
यह निर्णय आईआईटी खड़गपुर द्वारा की गई एक विशेष स्टडी के नतीजों के आधार पर लिया गया है। इस स्टडी का उद्देश्य देश के अलग-अलग जलवायु क्षेत्रों में फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (एफआरके) और फोर्टिफाइड राइस (एफआर) की शेल्फ लाइफ यानी उनके सुरक्षित रहने की अवधि का आकलन करना था। स्टडी में पाया गया कि नमी, तापमान, पैकेजिंग सामग्री और भंडारण की स्थितियां चावल की गुणवत्ता पर गहरा असर डालती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय तक रखे रहने और सामान्य रखरखाव के दौरान इन चावलों में सूक्ष्म पोषक तत्वों (माइक्रोन्यूट्रिएंट्स) की कमी हो जाती है, जिससे इनका असर उम्मीद से कम हो जाता है।
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भंडारण की चुनौती
आंकड़ों के अनुसार, सरकारी खरीद और सालाना खपत को देखते हुए चावल अक्सर दो से तीन साल तक गोदामों में रहता है। पीएमजीकेएवाई और अन्य योजनाओं के लिए सालाना 372 लाख मीट्रिक टन चावल की जरूरत होती है, जबकि सेंट्रल पूल में उपलब्धता 674 लाख मीट्रिक टन होने का अनुमान है। इतनी बड़ी मात्रा को लंबे समय तक सुरक्षित रखना एक चुनौती है। खाद्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जब तक एक अधिक मजबूत और प्रभावी पोषक तत्व वितरण प्रणाली तैयार नहीं हो जाती, तब तक फोर्टिफिकेशन बंद रहेगा।
योजनाओं पर नहीं पड़ेगा असर
मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि इस फैसले से राशन की मात्रा में कोई कमी नहीं आएगी। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस), आंगनवाड़ी (आईसीडीएस) और मिड-डे मील जैसी योजनाओं का कामकाज सामान्य रूप से चलता रहेगा। बदलाव के दौर में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह छूट दी गई है कि वे अपनी सुविधा के अनुसार फोर्टिफाइड या सामान्य चावल की सप्लाई कर सकते हैं। यह छूट खरीफ मार्केटिंग सीजन 2024-25 की बकाया रसीदों और 2025-26 के सीजन के लिए लागू होगी।
फोर्टिफिकेशन प्रोग्राम का इतिहास
चावल फोर्टिफिकेशन कार्यक्रम की शुरुआत 2019 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर हुई थी। मार्च 2022 तक इसे आंगनवाड़ी और पीएम पोषण योजना में लागू किया गया। मार्च 2024 तक इसे पूरे देश में फैला दिया गया था। अप्रैल 2022 में कैबिनेट कमेटी ने इसे सभी सरकारी योजनाओं में पूरी तरह लागू करने की मंजूरी दी थी। अब सरकार एक बेहतर तकनीक विकसित होने के बाद ही इसे दोबारा शुरू करेगी।
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आईआईटी खड़गपुर की स्टडी के बाद लिया फैसला
यह निर्णय आईआईटी खड़गपुर द्वारा की गई एक विशेष स्टडी के नतीजों के आधार पर लिया गया है। इस स्टडी का उद्देश्य देश के अलग-अलग जलवायु क्षेत्रों में फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (एफआरके) और फोर्टिफाइड राइस (एफआर) की शेल्फ लाइफ यानी उनके सुरक्षित रहने की अवधि का आकलन करना था। स्टडी में पाया गया कि नमी, तापमान, पैकेजिंग सामग्री और भंडारण की स्थितियां चावल की गुणवत्ता पर गहरा असर डालती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय तक रखे रहने और सामान्य रखरखाव के दौरान इन चावलों में सूक्ष्म पोषक तत्वों (माइक्रोन्यूट्रिएंट्स) की कमी हो जाती है, जिससे इनका असर उम्मीद से कम हो जाता है।
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भंडारण की चुनौती
आंकड़ों के अनुसार, सरकारी खरीद और सालाना खपत को देखते हुए चावल अक्सर दो से तीन साल तक गोदामों में रहता है। पीएमजीकेएवाई और अन्य योजनाओं के लिए सालाना 372 लाख मीट्रिक टन चावल की जरूरत होती है, जबकि सेंट्रल पूल में उपलब्धता 674 लाख मीट्रिक टन होने का अनुमान है। इतनी बड़ी मात्रा को लंबे समय तक सुरक्षित रखना एक चुनौती है। खाद्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जब तक एक अधिक मजबूत और प्रभावी पोषक तत्व वितरण प्रणाली तैयार नहीं हो जाती, तब तक फोर्टिफिकेशन बंद रहेगा।
योजनाओं पर नहीं पड़ेगा असर
मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि इस फैसले से राशन की मात्रा में कोई कमी नहीं आएगी। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस), आंगनवाड़ी (आईसीडीएस) और मिड-डे मील जैसी योजनाओं का कामकाज सामान्य रूप से चलता रहेगा। बदलाव के दौर में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह छूट दी गई है कि वे अपनी सुविधा के अनुसार फोर्टिफाइड या सामान्य चावल की सप्लाई कर सकते हैं। यह छूट खरीफ मार्केटिंग सीजन 2024-25 की बकाया रसीदों और 2025-26 के सीजन के लिए लागू होगी।
फोर्टिफिकेशन प्रोग्राम का इतिहास
चावल फोर्टिफिकेशन कार्यक्रम की शुरुआत 2019 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर हुई थी। मार्च 2022 तक इसे आंगनवाड़ी और पीएम पोषण योजना में लागू किया गया। मार्च 2024 तक इसे पूरे देश में फैला दिया गया था। अप्रैल 2022 में कैबिनेट कमेटी ने इसे सभी सरकारी योजनाओं में पूरी तरह लागू करने की मंजूरी दी थी। अब सरकार एक बेहतर तकनीक विकसित होने के बाद ही इसे दोबारा शुरू करेगी।
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