PM Modi in Leh: लेह में प्रधानमंत्री के सम्मान में सेना ने आयोजित की ये खास ‘रस्म’, जिसमें जवान उतारते हैं अफसरों की नकल!
- शुक्रवार सुबह अचानक लेह पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी, साथ में थे सेना प्रमुख और सीडीएस
- लद्दाख के निमू पोस्ट पहुंच कर बढ़ाया जवानों का मनोबल
- जवानों के बीच 2014 से दीपावली का त्योहार मनाते रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी
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प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार सुबह अचानक लेह में ग्राउंड जीरो पर पहुंच कर देशवासियों को ही बल्कि पूरी दुनिया को अचंभे में डाल दिया। भारत-चीन के बीच चल रही तनातनी के मद्देनजर उनके इस दौरे के दो स्पष्ट संदेश निकाले जा रहे हैं, पहला चीन के प्रति कड़ा रुख और सीमा पर तैनात जवानों का मनोबल बढ़ाना। वहीं प्रधानमंत्री के लेह दौरे के दौरान सेना ने एक विशेष रस्म का आयोजन किया है। प्रधानमंत्री के सम्मान में इस आयोजन की विशेष अहमियत होती है।
जवानों के बीच त्योहार मनाते रहे हैं मोदी
ऐसा पहली बार नहीं है कि जब प्रधानमंत्री पहली बार सैनिकों के बीच पहुंचे हों। दीवाली के मौकों पर प्रधानमंत्री सीमा पर जाकर जवानों के साथ त्योहार मनाते रहे हैं। पिछले साल प्रधानमंत्री दीपावली का जश्न मनाने राजौरी गए थे। 2014 में उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद यह चौथा मौका था जब प्रधानमंत्री ने जवानों के बीच त्योहार मनाया। 2014 में सियाचीन, 2015 में डोगराई वॉर मेमोरियल, 2016 हिमाचल और 2017 में गुरेज में जवानों के बीच थे। उनके इन दौरों के बीच एक खास ‘बड़ा खाना’ का आयोजन किया जाता है।
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14 कॉर्प्स के हेडक्वार्टर में आयोजन
सूत्रों के मुताबिक 14 कॉर्प्स के हेडक्वार्टर में बड़ा खाने का आयोजन किया गया, जिसमें लेह में तैनात 3 डिवीजन के अधिकारी, जवान उपस्थित रहे। सूत्रों का कहना है कि बड़ा खाना में जवानों-अधिकारियों के लिए विशेष तौर पर चिकन, दाल, मिस्सी रोटी आदि मैन्य़ू में शामिल थी। वहीं प्रधानमंत्री मोदी के लिए जम्मू से आरएसपुरा का विशेष बासमती चावल मंगाया गया। गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख में सुरक्षा का जिम्मा 3 त्रिशूल इन्फेंट्री डिवीजन के पास है, जो नॉर्दन कमांड के तहत आता है। प्रधानमंत्री के इस कार्यक्रम से इतर आमतौर पर जब कभी यूनिट में बड़े खाने का आयोजन होता है पहले वीरता का जश्न मनाया जाता है, गीत गाए गाए जाते हैं। कमांडिंग ऑफिसर हर कंपनी/सब यूनिट में जाते हैं। उनके साथ यूनिट के सेकंड इन कमांड, एडजुटेंट और क्वार्टर मास्टर और यूनिट के सूबेदार मेजर (एसएम) होते हैं जो जेसीओ में सबसे सीनियर होते हैं।
जवानों में होता है क्रेज
इस दौरान प्रधानमंत्री जवानों के बीच होते हैं, उनसे बातचीत करते हैं और उनकी परेशानियों के बारे में सुनते हैं और वरिष्ठ अधिकारियों को जरूरत के मुताबिक निर्देश भी देते हैं। कुल मिला कर जवानों को वहां अपनेपन का अहसास होता है। लेह में भी उनके सम्मान में बड़े खाने का आयोजन किया गया। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक जवानों में बड़े खाने का काफी क्रेज होता है। किसी सीनियर अधिकारी या गणमान्य के आने पर बड़ा खाना या प्रीतिभोज का आयोजन तो किया ही जाता है, साथ ही त्योहारों पर भी इसका आयोजन होता है। उनका कहना है कि बड़ा खाना रेजिमेंट स्थापना दिवसों, ईद, दीवाली, गुरुपर्ब पर भी आयोजित किया जाता है। वह बताते हैं कि सामान्यतया बड़ा खाना सूर्यास्त के बाद रिट्रीट बिगुल बजने के बाद ही आयोजित किया जाता है लेकिन बर्फीली जगहों या पहाड़ी इलाकों में खास अवसरों पर इसका आयोजन दिन के समय किया जाता है।
तीन पीढ़ियां मिलती हैं
सूत्रों के मुताबिक बड़ा खाना का एक और बड़ा मकसद होता है। जवान अपने अधिकारियों के साथ समय-समय पर अनौपचारिक व अनुशासन की सख्ती से हट कर मिलते हैं, तो उनकी हौसलाअफजाई होती है और आपस की अनावश्यक दूरियां मिटती हैं। परंपराएं मजबूत होती हैं। सैनिक अपने बच्चों को सेना में आने के लिए प्रेरित करते हैं। जिससे सेना में जाने की पारिवारिक परंपराएं भी मजबूत होती हैं। कई बार तो आयोजन में सेना में रहीं तीन पीढ़ियां दादा, पिता और पोते तक आते हैं।
बनते हैं बंदर!
सेना के एक सूत्र बताते हैं कि बड़ा खाना के अलावा यूनिट में टाइगर जिमखाना का भी आयोजन किया जाता है। जिसमें पक्का खाना बनाया जाता है। इसमें यूनिट की अल्फा, ब्रेवो, चार्ली, डेल्टा कंपनियों को टास्क दिया जाता है। इसमें किसी को बंदर बनने के लिए कहा जाता है तो किसी को कुछ और बनने के लिए कहा जाता है। इस दौरान जलेबी गेम, बोरी गेम आदि आयोजित किए जाते हैं। सूत्रों का कहना है कि ड्यूटी पर मुस्तैद जवान अपने घर से बेहद दूर होता है, तो यूनिट-बटालियन ही उसका घर होती है। इस तरह के आयोजन उसे घर जैसा महसूस होता है।
तकियाकलाम की नकल भी उतारते हैं
अधिकारी के मुताबिक बड़ा खाना का आयोजन इतने हंसमुख माहौल में होता है कि कई बार सीनियर ऑफिसर या जेसीओ की बातचीत के ढंग उसके तकियाकलाम की नकल भी उतारी जाती है। नाटकीय लहजे में जवान छुट्टी न मिलने, राशन सही न मिलने, कपड़ों की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हैं, लेकिन ये बड़े खुशनुमा माहौल में होता है। उनकी इस अनौपचारिक तरीके से उठाई गई मांग या किसी कल्याणकारी अनुरोध को नोट किया जाता है। सीओ उसे बहुत अच्छी तरह से सुनते हैं और जहां ठीक जान पड़ता है, तत्काल संबंधित आदेश भी कर दिए जाते हैं। स्थापना दिवस के दौरान आयोजित बड़ा खाना में कई बार सैनिकों-अधिकारियों के परिवार भी हिस्सा लेते हैं।
रिश्ते बेहतर होते हैं
सेना के अधिकारियों के मुताबिक बड़ा खाना से सेना की परंपराएं मजबूत करने के अलावा यूनिट के काम में भी आसानी होती है। इससे वरिष्ठों और जवानों के बीच रिश्ते बेहतर होते हैं और कार्य प्रबंधन आसान हो जाता है। वहीं जवानों की शिकायतों का समाधान हो जाता है। वहीं कोई साथी अगर तनाव में है तो वरिष्ठों तक उसकी जानकारी पहुंच जाती है। अगर उनकी कोई समस्या है या मनोबल घट रहा है, तो उसका निवारण किया जाता है।
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