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जम्मू-कश्मीर पर बैठक: अनुच्छेद 370 हटाने के बाद पहली बार पीएम के सामने होंगे 14 कश्मीरी नेता, इनमें चार पूर्व सीएम

Thu, 24 Jun 2021 11:37 AM IST
दीप्ति मिश्रा जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Thu, 24 Jun 2021 11:37 AM IST
सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी गुरुवार को दिल्ली में जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों के साथ बातचीत करेंगे। इस बैठक में जम्मू-कश्मीर के 4 पूर्व सीएम व 4 पूर्व डिप्टी सीएम सहित 14 नेता भाग लेंगे। प्रधानमंत्री आवास पर तीन बजे बुलाई गई बैठक का फिलहाल एजेंडा गुप्त रखा गया है।

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PM Narendra Modi to chair all party meeting with Jammu and Kashmir leaders today,  kashmiri leaders arrived in Delhi
All party meeting on Jammu Kashmir - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के बाद यह पहला मौका है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली में जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों के साथ बातचीत करेंगे। गुरुवार को हो रही इस बैठक में जम्मू-कश्मीर के 4 पूर्व सीएम व 4 पूर्व डिप्टी सीएम सहित 14 नेता भाग लेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा बैठक में मौजूद रहेंगे।

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कश्मीरी नेताओं ने नहीं किया एजेंडे का खुलासा
गुपकार समझौते में शामिल नेताओं ने बैठक से पहले अपने एजेंडे के बारे में ज्यादा ज्याा जानकारी नहीं दी है। हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा, ''वे खुलकर अपनी बात रखेंगे। हम आपको यकीन दिलाना चाहते हैं कि हम आसमान के तारे नहीं मांगेंगे। हम वही मांगेंगे, जो हमारा था और हमारा ही रहना चाहिए।'' गुपकार नेताओं द्वारा कही गई यह बात उनके एजेंडे की तरफ इशारा करती है। 
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इस बैठक की अहमियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री कार्यालय खुद इसकी रूपरेखा तैयार करने में जुटा रहा। किस नेता को बैठक में बुलाना है और किसे नहीं, ये सब पीएमओ ने तय किया है। बैठक के लिए पहली फोन कॉल पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती के पास आई थी। उसके बाद इस बैठक की खबर मीडिया में आई। 
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पीएम संग बैठक में ये नेता होंगे शामिल
पीएम मोदी संग बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला, गुलाम नबी आजाद, महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला मौजूद रहेंगे। पूर्व उपमुख्यमंत्री ताराचंद, मुजफ्फर हुसैन बेग, डॉ. निर्मल सिंह और कवींद्र गुप्ता भी प्रधानमंत्री के सामने बैठेंगे। 'जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी' के चेयरमैन सैयद अल्ताफ बुखारी, प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख जीए मीर, पीपुल्स कांफ्रेंस के सज्जाद गनी लोन, पैंथर्स पार्टी के प्रो. भीम सिंह और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी (माकपा) के नेता मोहम्मद युसुफ तारीगामी ने बैठक में शामिल होने के लिए अपनी सहमति दी है। शुरुआत में गुपकार नेताओं को पीएम की बैठक में बुलाने का विरोध करने वाले भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र रैना भी मौजूद रहेंगे।

कश्मीरी नेता इन मुद्दों पर कर सकते हैं चर्चा

बैठक के एजेंडे पर गुपकार ने खुलकर भले ही कुछ न कहा हो, लेकिन उनकी मांग रहेगी कि अनुच्छेद 370 को दोबारा से बहाल किया जाए। दूसरा, परीसीमन प्रक्रिया में सभी राजनीतिक पार्टियों के सुझावों पर अमल हो। तीसरा, जम्मू-कश्मीर को पहले की तरह पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए। विकास के मौजूदा पैटर्न में कुछ बदलाव किए जाएं, जम्मू-कश्मीर के युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों के अलावा निजी क्षेत्र में अवसर बढ़ाए जाएं। जम्मू-कश्मीर के विभाजन जैसे किसी प्रस्ताव का विरोध किया जाएगा। 

मनमोहन सिंह ने कराई इन नेताओं की तैयारी
पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह ने जम्मू-कश्मीर से जुड़े पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर उनकी तैयारी कराई है कि वे बैठक में क्या बोलेंगे। राजनीतिक जानकारों का कहना है, 'यहां पर एक बात साफ है कि कांग्रेस पार्टी 'गुपकार' नेताओं से दूरी बनाकर कोई बातचीत नहीं करेगी। यानी बैठक में कांग्रेस ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं रखेगी, जिस पर गुपकार को आपत्ति हो।'

पीपुल्स एलायंस फार गुपकार डिक्लेरेशन (पीएजीडी) के एजेंडे में अलगाववादियों के साथ बातचीत शुरू करना, राजनीतिक तौर पर बंदी बनाए गए लोगों की रिहाई और कश्मीर के साथ वित्त, नौकरियों एवं विकास के दूसरे मामलों में कोई भेदभाव न बरतना भी शामिल है। परीसीमन को लेकर 2011 की जनगणना को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कुछ पार्टियां चाहती हैं कि परीसीमन 2021 की जनगणना पर हो, पीएम के सामने इस मुद्दे पर भी बातचीत हो सकती है। 

कहा- इन लोगों की नहीं हो पा रही मदद 
इस बैठक में जम्मू कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी द्वारा जम्मू-कश्मीर के लिए 'कॉन्फेडरेशन ऑफ जम्मू-कश्मीर' यानी अलग-अलग प्रांतीय विधानसभाओं के गठन का प्रस्ताव रखा जाएगा। इसके तहत एक उच्च न्यायालय रहे, एक राज्यपाल हो और वित्त व्यवस्था अलग-अलग रहे। पार्टी का कहना है कि जम्मू कश्मीर के संपूर्ण विकास के लिए यह जरूरी कदम है। अभी तक नौकरियां और विकास का पैसा, कश्मीर में ही जाता रहा है। पश्चिम पाकिस्तान से आए लोगों की मदद नहीं हो पा रही है। 1965 और 1971 की लड़ाई में जिन लोगों की जमीन खाली कराई गई थी, उन्हें भी कुछ नहीं मिला है।  

अप्रवासी लोग, जो आतंकियों के चलते कश्मीर से जम्मू में आकर बस गए हैं, उनकी वापसी और कश्मीरी पंडितों का मुद्दा भी पीएम की बैठक में उठेगा। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा विकास का डाटा बैठक में रख सकते हैं। अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी आ गई है। आतंकी घटनाओं पर भी नियंत्रण हो रहा है। ईडी और एनआईए ने आतंकियों के कई मददगारों का पता लगाया है। आतंकियों के सामने नई भर्ती का संकट खड़ा हो गया है। पिछले दिनों जब उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने आए थे तो यह अफवाह फैल गई कि सरकार जम्मू कश्मीर का विभाजन करने जा रही है। 

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