प्रधानमंत्री का संदेशः लॉकडाउन से मिली सफलता को जीत में बदलना चाहती है सरकार
- 3 मई तक रहे लॉकडाउन, 20 अप्रैल को जगेगी राहत की उम्मीद, सीमित छूट तभी से
- मांगा सबका साथ, सप्तपदी का पालन करने को कहा
- लॉकडाउन-2 की गाइडलाइन 15 अप्रैल को आएगी, सरकार कर सकती है राहत पैकेज की घोषणा
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प्रधानमंत्री राष्ट्र को संबोधित करते हुए जनता के लिए संदेश लेकर आए। सबका साथ मांगा, सबसे सात वचन (सप्तपदी) लिए और लॉकडाउन के फायदे गिनाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब भारत में कोविड-19 का एक भी संक्रमित नहीं था, तब से भारत सतर्क है। जब 100 संक्रमित नहीं थे, तब भारत ने कड़े कदम उठाए।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के दौरान कहा, वहीं जब भारत में कोरोना के सिर्फ 550 केस थे, तभी भारत ने 21 दिन के संपूर्ण लॉकडाउन का एक बड़ा कदम उठा लिया था। नतीजा सामने है।
दुनिया के विकसित देशों में कोविड-19 का असर भारत से 25-30 गुना तक ज्यादा है। प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि भारत सरकार लॉकडाउन से मिले फायदे को खोना नहीं चाहती और तीन मई तक के लिए बढ़ा रही है।
आपका साथ चाहिए...अनुशासन, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कीजिए
प्रधानमंत्री ने देश की जनता से उसका साथ मांगा। अनुशासन और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की शर्त रखी। कहा कि इसका पालन करते हुए हमें नया हॉटस्पॉट नहीं बनने देना है। जहां हॉटस्पॉट बने हैं, वहां संक्रमण को काबू में रखना है।
इस दौरान अगले एक सप्ताह तक उन्होंने कड़े कदम उठाने का संकेत दिया। 20 अप्रैल तक सभी हॉटस्पॉट और कोविड-19 की मॉनिटरिंग किए जाने की जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने चेताया भी कि जहां मामले बढ़े, नए हॉटस्पॉट बने, वहां मिल रही सभी सहूलियतें वापस ले ली जाएंगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कुल मिला कर मकसद एक है। कोविड-19 को हराना है। भारत को कोविड-19 के नुकसान से जितना अधिक हो सके बचाना है। वह आज के भी संदेश में जान है तो जहान है कि थीम पर आए। जान बचाने के बाद जहान को बचाने के सिद्धांत को न केवल प्रथमिकता दी बल्कि बताया कि केन्द्र सरकार इसे लेकर संवेदनशील है।
15 अप्रैल को आएगी नई गाइडलाइन...आज नहीं की कोई और घोषणा
प्रधानमंत्री ने कहा कि 15 अप्रैल को लॉकडाउन-2 को लेकर नई गाइडलाइन आई। प्रधानमंत्री के चेहरे पर आज न केवल विजयी भाव दिखा, बल्कि एक आत्मविश्वास भी देखने को मिला। उन्होंने अमेरिका, इटली जैसे यूरोपीय देशों का नाम नहीं लिया, लेकिन कहा कि भारत में कोविड-19 अभी नियंत्रण में है।
बहुत हानि से हम बच गए हैं। क्योंकि सरकार ने सही समय पर सही और कड़े फैसले भी लिए। प्रधानमंत्री ने परोक्ष रूप से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति को भी रखा। डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की अर्थ व्यवस्था बैठने के खतरे को गिनाते हुए लॉकडाऊन को नहीं अपनाया।
वहीं भारत जैसे सीमित संसाधनों वाले देश ने कोई हिचक नहीं दिखाई। आज अमेरिका कोविड-19 से निबटने में बुरी तरह से उलझ गया है।
प्रधानमंत्री ने देशवासियों को संदेश देने के दौरान लॉकडाउन-2 के अलावा कोई और घोषणा नहीं की। अभी किसी राहत पैकेज का एलान नहीं किया। लेकिन उनके संदेश लॉकडाउन से पैदा होने वाली चिंता साफ दिखी है।
उन्होंने किसानों की रबी की फसल पकने, दिहाड़ी मजदूरों के सामने खड़ी हुई भूख की चिंता समेत अन्य पहुलओं को रेखांकित किया है। समझा जा रहा है कि बुधवार को जारी होने वाली नई गाइडलाइन में यह दर्द साफ दिखाई पड़ सकता है।
15 तक प्रधानमंत्री देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए कुछ घोषणाएं कर सकते हैं। राहत पैकेज, कामकाज में सहूलियत समेत कुछ निर्णय हो सकते हैं।
मांगे सात वचन...जहां रहें, वहीं रहें, सुखी रहें
प्रधानमंत्री ने लोगों से सात वचन लिए। उन्होंने लोगों से कहा कि वह अपने घरों, आसपास के बुजुर्गों का ख्याल रखें। सोशल डिस्टेंसिंग का लॉकडाउन के दौरान कड़ाई से अनुशासन के साथ पालन करें, साथ ही लोगों से भी कराएं।
आयुष मंत्रालय की तरफ से इम्यूनिटी बढ़ाने के सुझाव जैसे गरम पानी पीना आदि का पालन करें। आरोग्य सेतु एप को डाउनलोड करें, और बाकी लोगों को भी कराएं। गरीब परिवार के भोजन या उसकी सहायता के लिए तत्पर रहें।
किसी को नौकरी से न निकालें और आखिरी सुझाव डॉक्टर., नर्स, मेडिकल स्टाफ, सफाईकर्मी और पुलिसकर्मियों के आदर-सम्मान करने का दिया। प्रधानमंत्री ने इसे 'सप्तपदी' की तरह बताया।