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मोदी सरकार के ये चार कदम हैं चीन-पाकिस्तान के लिए बड़ा कूटनीतिक झटका
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 30 Aug 2016 04:56 PM IST
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- फोटो : Amar Ujala file
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पाकिस्तान और चीन की चुनौती से निपटने के लिए मोदी सरकार ने पिछले कुछ समय में कई अहम कूटनीतिक कदम उठाए हैं। अक्साई चीन, अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड और लद्दाख में घुसपैठ के साथ पीओके में आर्थिक गलियारे की योजना के साथ चीन, पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत को घेर रहा है। दूसरी ओर यह सर्वविदित है कि पाकिस्तान आतंकी गतिविधियों के जरिए भारत को लगातार परेशान करता है। चीन भारत की राह में कितना बड़ा रोड़ा है यह एनएसजी में भारत की एंट्री को रोककर चीन ने जता दिया है।
दूसरी ओर भारत ने ड्रैगन और पाकिस्तान की खतरनाक जुगलबंदी को तोड़ने के लिए वियतनाम, अमेरिका और अन्य देशों को अपने पक्ष में लामबंद कर चक्रव्यूह तैयार करना शुरू दिया है। अमेरिका के साथ भारत के रिश्ते नई बुलंदियों पर हैं और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हाल ही में रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर के अमेरिका दौरे से स्पष्ट हो गया है।
भारत और अमेरिका के बीच सैन्य समझौता दक्षिणी चीन सागर पर जारी रस्साकशी के बीच बेहद महत्वपूर्ण है। दक्षिणी चीन सागर पर चीन अपना दावा जताता है और पूरी दुनिया उसके खिलाफ है। जापान, वियतनाम और अन्य देश चीन के खिलाफ अपनी नाराजगी स्पष्ट कर चुके हैं। ऐसे में भारत को रोल अहम हो जाता है।
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अमेरिका के साथ वॉर पैक्ट करके भारत ने अपने सैन्य संबंधों को एक नई ऊंचाई दी है, तो जी-20 सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री वियतनाम जाएंगे। प्रधानमंत्री का वियतनाम जाना बताता है कि भारत के लिए वियतनाम कितना महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही भारत ने म्यांमार के साथ अपने रिश्तों को प्रगाढ़ बनाने के लिए खुले दिल से पहल की है। भारत की सक्रियता से चीन और पाकिस्तान में खलबली मची हुई है।
भारत-अमेरिका के बीच 'वॉर पैक्ट' से चिढ़ा चीन
भारत और अमेरिका में सोमवार को एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे दोनों देशों के बीच रक्षा से जुड़े माल ढुलाई गठजोड़ को मजबूती मिलेगी। इस समझौते से दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे की संपत्तियों और जमीन का इस्तेमाल रक्षा मजबूती के लिए कर सकेंगी।
द्विपक्षीय लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एलईएमओए) पर हस्ताक्षर का स्वागत करते हुए रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और अमेरिकी रक्षा मंत्री एश्टन कार्टर ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों को व्यावहारिक अभ्यास और परस्पर आदान-प्रदान का अवसर प्रदान करेगा। इससे पहले वाशिंगटन के पेंटागन पहुंचे रक्षा मंत्री पर्रिकर का भव्य स्वागत और एनहैंस्ड ऑनर सम्मान किया गया। पर्रिकर की साल भर के अंदर यह दूसरी अमेरिका यात्रा है।
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दूसरी ओर भारत ने ड्रैगन और पाकिस्तान की खतरनाक जुगलबंदी को तोड़ने के लिए वियतनाम, अमेरिका और अन्य देशों को अपने पक्ष में लामबंद कर चक्रव्यूह तैयार करना शुरू दिया है। अमेरिका के साथ भारत के रिश्ते नई बुलंदियों पर हैं और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हाल ही में रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर के अमेरिका दौरे से स्पष्ट हो गया है।
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भारत और अमेरिका के बीच सैन्य समझौता दक्षिणी चीन सागर पर जारी रस्साकशी के बीच बेहद महत्वपूर्ण है। दक्षिणी चीन सागर पर चीन अपना दावा जताता है और पूरी दुनिया उसके खिलाफ है। जापान, वियतनाम और अन्य देश चीन के खिलाफ अपनी नाराजगी स्पष्ट कर चुके हैं। ऐसे में भारत को रोल अहम हो जाता है।
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अमेरिका के साथ वॉर पैक्ट करके भारत ने अपने सैन्य संबंधों को एक नई ऊंचाई दी है, तो जी-20 सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री वियतनाम जाएंगे। प्रधानमंत्री का वियतनाम जाना बताता है कि भारत के लिए वियतनाम कितना महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही भारत ने म्यांमार के साथ अपने रिश्तों को प्रगाढ़ बनाने के लिए खुले दिल से पहल की है। भारत की सक्रियता से चीन और पाकिस्तान में खलबली मची हुई है।
भारत-अमेरिका के बीच 'वॉर पैक्ट' से चिढ़ा चीन
भारत और अमेरिका में सोमवार को एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे दोनों देशों के बीच रक्षा से जुड़े माल ढुलाई गठजोड़ को मजबूती मिलेगी। इस समझौते से दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे की संपत्तियों और जमीन का इस्तेमाल रक्षा मजबूती के लिए कर सकेंगी।
द्विपक्षीय लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एलईएमओए) पर हस्ताक्षर का स्वागत करते हुए रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और अमेरिकी रक्षा मंत्री एश्टन कार्टर ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों को व्यावहारिक अभ्यास और परस्पर आदान-प्रदान का अवसर प्रदान करेगा। इससे पहले वाशिंगटन के पेंटागन पहुंचे रक्षा मंत्री पर्रिकर का भव्य स्वागत और एनहैंस्ड ऑनर सम्मान किया गया। पर्रिकर की साल भर के अंदर यह दूसरी अमेरिका यात्रा है।
जानिए आखिर क्यों खास है यह समझौता...
- लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरंडम ऑफ एग्रीमेंट (LEMOA) समझौते से सैन्य बलों की कार्य क्षमता बढ़ेगी, खास तौर पर मानवीय आपदा के समय या आपदा बचाव में इससे फायदा होगा।
- यह समझौता अमेरिकी और भारतीय सेना के बीच लॉजिस्टिक सहायता, सप्लाई और सर्विस में मदद करेगी।
- इस समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे के युद्धक बेड़ों से ईंधन, पानी और भोजन जैसे संसाधनों की शेयरिंग कर सकेंगे।
- यह साफ कर दें कि इस डील के तहत भारत की धरती पर अमेरिकी सैनिकों की तैनाती जैसी कोई बात नहीं है।
एलईएमओए अमेरिका और भारतीय सेनाओं के बीच प्रतिपूर्ति आधार पर लॉजिस्टिक सहयोग, सप्लाई और सेवा की सुविधा प्रदान करेगा और इनके संचालन की रूपरेखा तय करेगा। समझौते पर हस्ताक्षर के बाद जारी एक साझा बयान में कहा गया, ‘दोनों देश इस बात से सहमत थे कि इस महत्वपूर्ण समझौते से दोनों सेनाओं को रक्षा प्रौद्योगिकी के अभिनव और उन्नत अवसर मिलेंगे। अमेरिका ने भारत के साथ रक्षा व्यापार एवं प्रौद्योगिकी की साझेदारी बढ़ाने पर भी सहमति जताई क्योंकि भारत उसका सबसे करीबी भागीदार बन चुका है।’
पेंटागन में पर्रिकर का शानदार स्वागत
अमेरिका में एनहैंस्ड ऑनर महत्वपूर्ण मेहमानों और आगंतुकों को दिया जाता है। सामान्य ऑनर कॉर्डन के तहत आगंतुकों से पेंटागन की सीढ़ियों पर हाथ मिलाया जाता है। इसके बाद ही उन्हें भवन के अंदर ले जाया जाता है। एनहैंस्ड ऑनर कॉर्डन के तहत मेहमान के लिए राष्ट्रगान किया जाता है।
औपचारिक स्वागत समारोह के बाद पर्रिकर ने पेंटागन 9/11 मेमोरियल पर पुष्पांजलि अर्पित की और इसके बाद दोनों नेता बातचीत के लिए आगे बढ़े। अमेरिका ने इसी वर्ष जून में भारत को बड़ा रक्षा भागीदार नियुक्त किया था और इसके बाद दोनों नेताओं के बीच यह छठी मुलाकात थी। कार्टर ने अप्रैल में भारत दौरे के वक्त भी पर्रिकर से मुलाकात की थी।
- यह समझौता अमेरिकी और भारतीय सेना के बीच लॉजिस्टिक सहायता, सप्लाई और सर्विस में मदद करेगी।
- इस समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे के युद्धक बेड़ों से ईंधन, पानी और भोजन जैसे संसाधनों की शेयरिंग कर सकेंगे।
- यह साफ कर दें कि इस डील के तहत भारत की धरती पर अमेरिकी सैनिकों की तैनाती जैसी कोई बात नहीं है।
एलईएमओए अमेरिका और भारतीय सेनाओं के बीच प्रतिपूर्ति आधार पर लॉजिस्टिक सहयोग, सप्लाई और सेवा की सुविधा प्रदान करेगा और इनके संचालन की रूपरेखा तय करेगा। समझौते पर हस्ताक्षर के बाद जारी एक साझा बयान में कहा गया, ‘दोनों देश इस बात से सहमत थे कि इस महत्वपूर्ण समझौते से दोनों सेनाओं को रक्षा प्रौद्योगिकी के अभिनव और उन्नत अवसर मिलेंगे। अमेरिका ने भारत के साथ रक्षा व्यापार एवं प्रौद्योगिकी की साझेदारी बढ़ाने पर भी सहमति जताई क्योंकि भारत उसका सबसे करीबी भागीदार बन चुका है।’
पेंटागन में पर्रिकर का शानदार स्वागत
अमेरिका में एनहैंस्ड ऑनर महत्वपूर्ण मेहमानों और आगंतुकों को दिया जाता है। सामान्य ऑनर कॉर्डन के तहत आगंतुकों से पेंटागन की सीढ़ियों पर हाथ मिलाया जाता है। इसके बाद ही उन्हें भवन के अंदर ले जाया जाता है। एनहैंस्ड ऑनर कॉर्डन के तहत मेहमान के लिए राष्ट्रगान किया जाता है।
औपचारिक स्वागत समारोह के बाद पर्रिकर ने पेंटागन 9/11 मेमोरियल पर पुष्पांजलि अर्पित की और इसके बाद दोनों नेता बातचीत के लिए आगे बढ़े। अमेरिका ने इसी वर्ष जून में भारत को बड़ा रक्षा भागीदार नियुक्त किया था और इसके बाद दोनों नेताओं के बीच यह छठी मुलाकात थी। कार्टर ने अप्रैल में भारत दौरे के वक्त भी पर्रिकर से मुलाकात की थी।
जी-20 से पहले वियतनाम जाएंगे पीएम मोदी
भारत की नजर अब दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी पकड़ मजबूत बनाने पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सितंबर में चीन में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन से ठीक पहले वियतनाम जाएंगे। पीएम 3 सितंबर को वियतनाम में होंगे और 4-5 सितंबर को जी-20 शिखर सम्मेलन होना है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक मोदी वियतनाम को सैन्य सहायता के लिए ऑफर दे सकते हैं। इसमें आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण संबंधी सहायता और हाइड्रोकार्बन ब्लॉक में ज्यादा से ज्यादा निवेश शामिल है। इसके अलावा स्पेस सेक्टर में भारत वियतनाम को मदद कर सकता है। भारत ने 2014 में वियतनाम को 100 मिलियन डॉलर की लागत से बनी 4 पैट्रोल बोट देने के लिए कॉन्ट्रेक्ट किया था, मोदी इस डील के कागजातों पर दस्तखत करेंगे।
वियतनाम के रक्षा मामलों में भारत की सहायता यह दर्शाती है कि भारत दक्षिण-पूर्व एशिया में सैन्य ताकत को मजबूत कर वहां की स्थिरता सुनिश्चित करना चाहता है और अपनी पैठ बनाना चाहता है।
चीन और वियतनाम के बीच इन दिनों ठनी हुई है। वजह दक्षिण चीन सागर है। समंदर के इस इलाके में चीन अपनी दावेदारी पेश कर रहा है, जबकि वियतनाम का दावा है कि चीन उसके इलाके में भी अपना अधिकार थोप रहा है। चीन और वियतनाम के बीच संबंध लगातार तल्ख हो रहे हैं, जबकि पिछले एक दशक में देखें, तो वियतनाम और भारत के बीच द्विपक्षीय संबंध और मजबूत हुए हैं।
वियतनाम को लगातार मदद करने के भारत के इरादों से बीजिंग भी बाकायदा वाकिफ है। आगे भी भारत और वियतनाम के बीच चीन की नाक के ठीक नीचे कूटनीति और रणनीतिक संबंध जारी रहेंगे।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक मोदी वियतनाम को सैन्य सहायता के लिए ऑफर दे सकते हैं। इसमें आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण संबंधी सहायता और हाइड्रोकार्बन ब्लॉक में ज्यादा से ज्यादा निवेश शामिल है। इसके अलावा स्पेस सेक्टर में भारत वियतनाम को मदद कर सकता है। भारत ने 2014 में वियतनाम को 100 मिलियन डॉलर की लागत से बनी 4 पैट्रोल बोट देने के लिए कॉन्ट्रेक्ट किया था, मोदी इस डील के कागजातों पर दस्तखत करेंगे।
वियतनाम के रक्षा मामलों में भारत की सहायता यह दर्शाती है कि भारत दक्षिण-पूर्व एशिया में सैन्य ताकत को मजबूत कर वहां की स्थिरता सुनिश्चित करना चाहता है और अपनी पैठ बनाना चाहता है।
चीन और वियतनाम के बीच इन दिनों ठनी हुई है। वजह दक्षिण चीन सागर है। समंदर के इस इलाके में चीन अपनी दावेदारी पेश कर रहा है, जबकि वियतनाम का दावा है कि चीन उसके इलाके में भी अपना अधिकार थोप रहा है। चीन और वियतनाम के बीच संबंध लगातार तल्ख हो रहे हैं, जबकि पिछले एक दशक में देखें, तो वियतनाम और भारत के बीच द्विपक्षीय संबंध और मजबूत हुए हैं।
वियतनाम को लगातार मदद करने के भारत के इरादों से बीजिंग भी बाकायदा वाकिफ है। आगे भी भारत और वियतनाम के बीच चीन की नाक के ठीक नीचे कूटनीति और रणनीतिक संबंध जारी रहेंगे।
पाकिस्तान को फांसने के लिए बलूचिस्तान कॉर्ड
कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कुख्यात पाकिस्तान को घेरने के लिए मोदी सरकार ने बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन और बलोच राष्ट्र की आजादी की मांग करने वाले पक्षों को समर्थन के लिए कदम आगे बढ़ाए हैं। बीते स्वतंत्रता दिवस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से बलोच नेताओं का शुक्रिया अदा किया था। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई। बलोच नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया और उनसे बलूचिस्तान में हस्तक्षेप करने की मांग की।
बलूचिस्तान के साथ-साथ मोदी सरकार अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भी अपने संबंधों को मजबूत करते हुए पाकिस्तान को घेर रही है। अफगानिस्तान और बांग्लादेश ने आतंक को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदापर ठहराया है। भारत अफगानिस्तान ढांचागत सुविधाओं के निर्माण और संसाधनों को विकसित में महती भूमिका निभा रहा है।
बलूचिस्तान के साथ-साथ मोदी सरकार अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भी अपने संबंधों को मजबूत करते हुए पाकिस्तान को घेर रही है। अफगानिस्तान और बांग्लादेश ने आतंक को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदापर ठहराया है। भारत अफगानिस्तान ढांचागत सुविधाओं के निर्माण और संसाधनों को विकसित में महती भूमिका निभा रहा है।
म्यांमार का 'हर कदम' पर साथ देंगे मोदी
नई सरकार बनने के बाद पहली बार भारत दौरे पर आए म्यांमार के राष्ट्रपति हुतिन ज्यॉ ने सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। पीएम मोदी ने म्यांमार को महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए हर कदम पर साथ देने का वादा किया।
म्यांमार और भारत के संबंधों के महत्व को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को कहा, 'भारत, म्यांमार के साथ एक साझेदार के रूप में हर कदम पर खड़ा रहेगा। दोनों देश जानते हैं कि उनके सुरक्षा हित आपस में जुड़़े हुए हैं।' मोदी ने म्यांमार के राष्ट्रपति को विकास का लक्ष्य हासिल करने में उनकी मदद करने का आश्वासन दिया।
म्यांमार में फौजी शासन के कई सालों बाद आंग सान सू की पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी की सरकार बनी है। और पार्टी की तरफ से म्यांमार के राष्ट्रपति हुतिन ज्यॉ को बनाया गया है। दोनों देशों ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फिर दोहराया है कि वह अपनी जमीन पर विद्रोही गतिविधियों की इजाजत नहीं देंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने सू की की शांति प्रक्रिया पहल का भी समर्थन किया। मोदी ने कहा, 'भारत 21वीं सदी पेन्गलोंग कॉन्फ्रेंस का समर्थन करता है।' सू की की शांति प्रक्रिया की इस पहल के जरिए तीन सशस्त्र विद्रोही गुट चीन की मदद से वार्ता की टेबल पर आए थे।
बढ़ते प्रभाव को लेकर म्यांमार काफी चिंतित
विद्रोही गुटों को वार्ता के लिए राजी करने में मदद करने वाले चीन की विद्रोहियों और आर्थिक मामलों में बढ़ते प्रभाव को लेकर म्यांमार काफी चिंतित है। भारत म्यांमार की सुरक्षा और विकास में एक महत्वपूर्ण साझेदार बनना चाहता है।
दोनों देशों ने साथ काम करने के लिए सहमति जताई है। म्यांमार दुनिया के उन देशों में है, जो दालों का बड़े पैमाने पर निर्यात करता है। भारत और म्यांमार ने कनेक्टिविटी, चिकित्सा और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए चार समझौते किए हैं।
म्यांमार और भारत के संबंधों के महत्व को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को कहा, 'भारत, म्यांमार के साथ एक साझेदार के रूप में हर कदम पर खड़ा रहेगा। दोनों देश जानते हैं कि उनके सुरक्षा हित आपस में जुड़़े हुए हैं।' मोदी ने म्यांमार के राष्ट्रपति को विकास का लक्ष्य हासिल करने में उनकी मदद करने का आश्वासन दिया।
म्यांमार में फौजी शासन के कई सालों बाद आंग सान सू की पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी की सरकार बनी है। और पार्टी की तरफ से म्यांमार के राष्ट्रपति हुतिन ज्यॉ को बनाया गया है। दोनों देशों ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फिर दोहराया है कि वह अपनी जमीन पर विद्रोही गतिविधियों की इजाजत नहीं देंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने सू की की शांति प्रक्रिया पहल का भी समर्थन किया। मोदी ने कहा, 'भारत 21वीं सदी पेन्गलोंग कॉन्फ्रेंस का समर्थन करता है।' सू की की शांति प्रक्रिया की इस पहल के जरिए तीन सशस्त्र विद्रोही गुट चीन की मदद से वार्ता की टेबल पर आए थे।
बढ़ते प्रभाव को लेकर म्यांमार काफी चिंतित
विद्रोही गुटों को वार्ता के लिए राजी करने में मदद करने वाले चीन की विद्रोहियों और आर्थिक मामलों में बढ़ते प्रभाव को लेकर म्यांमार काफी चिंतित है। भारत म्यांमार की सुरक्षा और विकास में एक महत्वपूर्ण साझेदार बनना चाहता है।
दोनों देशों ने साथ काम करने के लिए सहमति जताई है। म्यांमार दुनिया के उन देशों में है, जो दालों का बड़े पैमाने पर निर्यात करता है। भारत और म्यांमार ने कनेक्टिविटी, चिकित्सा और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए चार समझौते किए हैं।