कोलकाता: ममता ने की पीएम मोदी से मुलाकात, दो बार सीएए के खिलाफ धरने में पहुंचीं
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को दो दिवसीय यात्रा पर कोलकाता पहुंचे। इस दौरान पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने उनसे मुलाकात भी की। उन्होंने पीएम से सीएए और एनआरसी पर अपना विरोध भी दर्ज कराया। इसके तुरंत बाद वह छात्र ईकाई की ओर से आयोजित धरना प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचीं। ऐसा एक नहीं दो बार हुआ। इसके अलावा पीएम दी ने शहर के चार पुनर्विकसित धरोहर भवनों ओल्ड करेंसी बिल्डिंग, बेल्वेदेरे हाउस, मेटकॉफ हाउस और विक्टोरिया मेमोरियल हाल को राष्ट्र को समर्पित किया।
इतिहास के बारे में महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी: मोदी
इस दौरान कोलकाता के ओल्ड करेंसी बिल्डिंग में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश के इतिहास के बारे में जिन इतिहासकारों ने लिखा, उन्होंने विषय की गहराई में उतरे बिना उसके कई महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी की।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण पहलुओं में एक देश की धरोहर को संजोकर रखना होता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम दुनिया को अपने देश की धरोहर दिखाना चाहते हैं, भारत को धरोहर पर्यटन का केंद्र बनाना चाहते हैं। देश के पांच प्रतिष्ठित संग्रहालयों को अंतरराष्ट्रीय मानक के आधार पर विकसित किया जाएगा, कोलकाता में भारतीय संग्रहालय से शुरुआत होगी।
उन्होंने कहा कि यह बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है कि ब्रिटिश शासन के दौरान और आजादी के बाद भी जो इतिहास लिखा गया उनमें कई महत्वपूर्ण अध्यायों की अनदेखी की गई। प्रधानमंत्री ने ओल्ड करेंसी बिल्डिंग में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि गुरूदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने 1903 में लिखा था कि भारत का इतिहास वह नहीं है जिसे विद्यार्थी परीक्षाओं के लिए पढ़ते हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग बाहर से आए, उन्होंने सिंहासन की खातिर अपने रिश्तेदारों, भाइयों को मार डाला। यह हमारा इतिहास नहीं है। यह स्वयं गुरूदेव ने कहा था। उन्होंने कहा था कि इस इतिहास में इसका उल्लेख नहीं है कि देश के लोग क्या कर रहे हैं। क्या उनका कोई अस्तित्व नहीं है।
West Bengal: Prime Minister Narendra Modi unveiled a statue at Old Currency Building in Kolkata. Governor Jagdeep Dhankhar also present. pic.twitter.com/y9DZGk4pEt
— ANI (@ANI) January 11, 2020
बेलूर मठ पहुंचे मोदी
पीएम मोदी बेलूर मठ पहुंचे और संतों के साथ चर्चा की।
Prime Minister Office (PMO): PM Narendra Modi is at Belur Math, where he is interacting with respected saints and seers. pic.twitter.com/MOJG2UzPhw
— ANI (@ANI) January 11, 2020
बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी को लेकर पश्चिम बंगाल में चल रहे टीएमसी के भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को दो दिवसीय यात्रा पर कोलकाता पहुंचे। पीएम के इस दौरे का स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने विरोध किया। अपने दौरे के दौरान पीएम कोलकाता बंदरगाह ट्रस्ट की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर समारोह में शामिल होंगे।
पीएम ने साउंड एंड लाइट शो का उद्घाटन किया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा के तट पर मिलेनियम पार्क से ऐतिहासिक हावड़ा पुल पर साउंड एंड लाइट शो का उद्घाटन किया। मिलेनियम पार्क पर ढाई मिनट का यह शो लगाया गया है। यह कोलकाता बंदरगाह न्यास (केओपीटी) की 150 वीं जयंती समारोह की परियोजना का हिस्सा है। यह शो वर्तमान रंगबिरंगी प्रकाश व्यवस्था की जगह लेगा। इसमें संगीत के साथ रंगबिरंगी लाइट का कार्यक्रम होगा। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, केंद्रीय नौवहन मंत्री मनसुख मंडाविया भी इस पार्क में कार्यक्रम में मौजूद थे। इसका आयोजन केओपीटी ने किया। यह पुल से दो किलोमीटर की दूरी पर है। साउंड एंड लाइट शो का उद्घाटन करने के बाद मोदी नदी मार्ग से बेलूर मठ के लिए रवाना हो गये जो रामकृष्ण मठ एवं मिशन का वैश्विक मुख्यालय है।
कार्यक्रम में पहुंचीं ममता फिर धरनास्थल लौट गईं
इस दौरान सीएम ममता बनर्जी भी मौजूद रहीं। हालांकि इसके बाद वह दोबारा सीएए-एनआरसी के खिलाफ आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने वापस लौट गईं।
#WATCH West Bengal: Prime Minister Narendra Modi unveiled Dynamic Architectural Illumination with synchronised light & sound system of Rabindra Setu (Howrah Bridge) today, as a part of 150th anniversary celebrations of #Kolkata Port Trust pic.twitter.com/qzOFQBShJb
— ANI (@ANI) January 11, 2020
पीएम मोदी और सीएम ममता की मुलाकात
इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने कोलकाता में सीएम ममता बनर्जी से मुलाकात की। राजभवन में हुई दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद ममता ने इसे शिष्टाचार भेंट बताया। ममता बनर्जी ने कहा कि मेरी प्रधानमंत्री से सीएए, एनपीआर और एनआरसी के मुद्दे पर बात हुई है। मैंने उन्हें बताया कि हम इसके खिलाफ हैं। हम चाहते हैं कि सीएए और एनआरसी को वापस लिया जाए।
नरेंद्र मोदी से मिलने के तुरंत बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के छात्र संगठन की ओर से सीएए के खिलाफ आयोजित धरने में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि सीएए सिर्फ कागज पर ही रहेगा, यह कभी लागू नहीं होगा, हम इसकी अनुमति नहीं देंगे।
#WATCH: PM Narendra Modi meets West Bengal CM Mamata Banerjee in Kolkata. The Prime Minister is in Kolkata to take part in 150th anniversary celebrations of the Kolkata Port Trust. pic.twitter.com/6r6ghcLlSu
— ANI (@ANI) January 11, 2020
-सीएए के खिलाफ प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे।
West Bengal: Prime Minister Narendra Modi arrives in Kolkata. He is on a two-day visit to Kolkata, to take part in 150th anniversary celebrations of the Kolkata Port Trust. pic.twitter.com/vqkjT4e3Uh
— ANI (@ANI) January 11, 2020
चार धरोहर इमारतों को राष्ट्र को समर्पित करेंगे पीएम मोदी
ममता बोलीं, मैंने नोटिफिकेशन फाड़ डाला
धरना प्रदर्शन में ममता ने कहा, कल मैंने सीएए नोटिफिकेशन देखा, मैंने इसे फाड़ डाला। मैंने पीएम से ये भी कहा कि अगर वह सीएए और एनआरसी लागू करना चाहते हैं तो ये मेरी लाश पर ही होगा।
West Bengal CM Mamata Banerjee addresses protesting students, in Kolkata: Yesterday, I saw #CAA notification, I tore it. I have even told Prime Minister that if he wants to do NRC & CAA, he will have to do it over my dead body. pic.twitter.com/Lqq4qlIXaS
— ANI (@ANI) January 11, 2020
विरोध के बीच नागरिकता संशोधन कानून लागू
विरोध प्रदर्शनों और समर्थन के बीच देशभर में शुक्रवार से नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) लागू हो गया। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को संशोधित नागरिकता कानून की अधिसूचना जारी कर दी। इसके साथ ही यह कानून पूरे देश में प्रभावी हो गया। गजट नोटिफिकेशन के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस कानून को लागू करने की तारीख 10 जनवरी, 2020 की तारीख तय की।
नागरिकता संशोधन विधेयक 10 दिसंबर को लोकसभा और उसके एक दिन बाद राज्यसभा में पारित हुआ था। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद 12 दिसंबर को यह कानून बन गया। इसके तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में प्रताड़ना का शिकार हो रहे हिंदू, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी और यहूदी अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है। गौरतलब है कि इस कानून को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। वहीं, इसके समर्थन में भी बड़ी संख्या में लोग आगे आए हैं।