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सीमावर्ती गांवों से क्या सीखकर लौटे युवा?: पीएम मोदी के सामने 'राष्ट्र प्रथम' का लिया संकल्प; साझा किए अनुभव

Sun, 26 Jul 2026 05:01 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Sun, 26 Jul 2026 05:01 PM IST
सार

विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम 2026 के प्रतिभागियों से संवाद के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीमावर्ती गांवों के विकास पर चर्चा की। वहीं, 'माई भारत' के स्वयंसेवकों ने चांगो समेत सीमा से जुड़े क्षेत्रों में सड़क, पानी, बिजली, नेटवर्क और स्वास्थ्य सुविधाओं में आए बदलाव के अनुभव साझा किए।

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PM Narendra Modi Interact With Viksit Vibrant Village Programme 2026 Participants via Video Conference
पीएम मोदी - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम 2026 के प्रतिभागियों से बातचीत की। देश के विभिन्न राज्यों के 245 से अधिक जिलों के 5,000 से ज्यादा स्वयंसेवक वर्चुअल माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े। इस दौरान विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम और 'माई भारत' से जुड़े अनुभव साझा किए गए।

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'माई भारत' के स्वयंसेवक ने क्या अनुभव साझा किया?

एक 'माई भारत' स्वयंसेवक ने कहा कि इस कार्यक्रम ने उन्हें देश के सीमावर्ती गांवों का दौरा करने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे गांवों को देखने का मौका मिला, जहां जाने की उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। एक अन्य 'माई भारत' स्वयंसेवक ने कहा कि जब उन्होंने आयुष्मान आरोग्य मंदिर में स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली, तब उन्हें महसूस हुआ कि विकसित भारत की रोशनी देश के दूरदराज के इलाकों तक पहुंच रही है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें स्कूलों में भी विकसित भारत की सोच दिखाई दी।

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पीएम मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब सीमा पर बसे गांव समृद्ध होते हैं तो राष्ट्र की सुरक्षा भी मजबूत होती है और विकास को भी नई गति मिलती है। उन्होंने युवाओं से कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास में उनकी भागीदारी ही विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत बनेगी। उन्होंने दोहराया कि देश के बॉर्डर पर बसे गांव आखिरी नहीं, बल्कि भारत के पहले गांव हैं। पीएम मोदी ने कहा कि वह हर दिवाली पर देश के जवानों से मिलने सीमा पर जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह संयोग है कि वर्ष 2016 में दिवाली के दौरान उन्हें सीमा से सटे चांगो क्षेत्र जाने का अवसर मिला था।

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चांगो पहुंचकर प्रतिभागी निकिता ने क्या देखा?

विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम 2026 की प्रतिभागी निकिता ने बताया कि चांगो जाने से पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर देखे गए वीडियो के आधार पर यह मान लिया था कि वहां न मोबाइल नेटवर्क होगा और न ही बिजली की सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि जब वह वहां पहुंचीं और ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों के बीच बनी मजबूत सड़कों को देखा तो हैरान रह गईं। स्थानीय लोगों से बातचीत में उन्हें पता चला कि पहले वहां ऐसी सुविधाएं नहीं थीं और लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

ग्रामीणों ने विकास को लेकर क्या बताया?

निकिता के अनुसार, ग्रामीणों ने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़कें बनने से वहां बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि पहले घरों तक पाइप से पेयजल नहीं पहुंचता था, लेकिन अब जल जीवन मिशन के तहत हर घर में पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध है। निकिता ने बताया कि स्थानीय लोगों ने कहा कि अब क्षेत्र में चौबीसों घंटे बिजली और मोबाइल नेटवर्क की सुविधा उपलब्ध है। साथ ही आयुष्मान भारत योजना के कारण स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर उनका भरोसा बढ़ा है और उनका जीवन पहले की तुलना में अधिक आसान हुआ है।

युवाओं के अनुभवों को लेकर पीएम मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री ने कहा कि सीमावर्ती गांवों में युवाओं को जो अनुभव मिला है, वह किसी क्लासरूम में नहीं मिल सकता। उन्होंने कहा कि इन गांवों में युवाओं के लिए कोई होटल या गेस्ट हाउस नहीं था, बल्कि पूरे गांव ने मेहमान की तरह उनका स्वागत किया। गांव में रहकर स्थानीय लोगों से मिलना-जुलना अपने आप में संस्कृति की एक पाठशाला बन गया। पीएम मोदी ने युवाओं से कहा कि वे अपने अनुभव देश के अन्य युवाओं के साथ साझा करें, ताकि अधिक से अधिक युवा सीमावर्ती गांवों का दौरा करें। उन्होंने कहा कि जितने ज्यादा लोग इन गांवों तक पहुंचेंगे, उतना ही वे भारत को करीब से समझ पाएंगे और देश से उनका जुड़ाव मजबूत होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सोच में बदलाव का ही परिणाम है कि आज सीमांत क्षेत्रों में बड़े परिवर्तन दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई गांवों में आजादी के बाद पहली बार गैस कनेक्शन और नल से जल जैसी सुविधाएं पहुंची हैं। जो सुविधाएं शहरों में सामान्य मानी जाती हैं, वही सीमावर्ती गांवों के लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आई हैं।

बुनियादी सुविधाओं से क्या बदलाव आया?

उन्होंने कहा कि अब दूरदराज के गांवों तक बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंच चुकी है। इन सुविधाओं का एक सकारात्मक असर यह भी हुआ कि अब इन क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है। जो गांव कभी सुनसान रहते थे, वहां अब रौनक दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम लोगों को जोड़ने और भारत के युवाओं को सीमावर्ती गांवों से जोड़ने का एक माध्यम है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित गांव ही विकसित भारत की आधारशिला हैं और यह यात्रा लगातार आगे बढ़ रही है। इसमें युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब देश का युवा जमीन से जुड़ता है, तो विकसित भारत के विजन को और मजबूती मिलती है और देश के लिए समर्पण की भावना भी बढ़ती है।



संवाद के दौरान कौन-सी यादें ताजा हुईं?

प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रतिभागियों के अनुभव सुनकर उनकी अपनी पुरानी यादें ताजा हो गईं। उन्होंने कहा कि किसी ने पहाड़ों की खूबसूरती देखी, तो किसी ने वहां की संस्कृति को करीब से समझा। उन्होंने कारगिल विजय दिवस का जिक्र करते हुए कहा कि प्रतिभागियों ने कारगिल के आसपास के क्षेत्रों को भी देखा और वहां की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों को समझा, जहां भारतीय जवानों ने विजय हासिल की थी।

दिव्यांशु जोशी ने क्या अनुभव साझा किया?

दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव का प्रतिनिधित्व कर रहे 'माई भारत' के स्वयंसेवक दिव्यांशु जोशी ने विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि 'माई भारत' की ओर से मिले इस अवसर ने उन्हें देश के सीमावर्ती गांवों तक पहुंचने का मौका दिया, जहां जाने की उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए जेन-जी पूरी तरह समर्पित है। उन्होंने कहा कि उनके लिए जेन-जी का अर्थ राष्ट्र निर्माण, चरित्र निर्माण, सेवा और नवाचार है।  उन्होंने कहा कि 'नेशन फर्स्ट' ही उनकी पीढ़ी का मूल मंत्र है।

दिव्यांशु जोशी ने बताया कि 'माई भारत' के तहत विकसित भारत, विकसित लीडर्स डायलॉग, विकसित भारत यूथ पार्लियामेंट, बजट क्विज, मेंटरशिप कार्यक्रम, वॉलंटियरिज्म समेत कई पहलें संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इन पहलों के माध्यम से देशभर के 2.3 करोड़ से अधिक युवाओं को आगे बढ़ने का मंच मिला है। उनके अनुसार, यही 'नेशन फर्स्ट' की सच्ची भावना है।

विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम क्या है?

माई भारत के माध्यम से संचालित विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन पर आधारित है, जिसमें भारत के सीमावर्ती गांवों को देश का पहला गांव मानकर उनके विकास पर विशेष जोर दिया गया है। विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम 2026 का आयोजन 4 जून से 30 जून तक दो चरणों में किया गया। इसके तहत लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के 74 वाइब्रेंट गांवों को शामिल किया गया। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, देशभर में आयोजित ऑनलाइन क्विज प्रतियोगिता में तीन लाख से अधिक युवाओं ने भाग लिया। इनमें से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले 400 से अधिक युवाओं का चयन किया गया।

इस पहल का उद्देश्य क्या है?

कार्यक्रम के जरिए युवाओं को सीमावर्ती क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों, सांस्कृतिक विरासत और विकास संबंधी आकांक्षाओं को करीब से समझने का अवसर मिला। साथ ही समुदाय की भागीदारी, राष्ट्रीय एकता और सीमावर्ती गांवों के रणनीतिक महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।

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