West Asia Tensions: PM मोदी की अध्यक्षता में CCS की बैठक; पश्चिम एशिया की स्थिति और फंसे भारतीयों पर हुई चर्चा
पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालात के बीच भारत ने भी सुरक्षा और कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा संबंधी समिति की बैठक की हैं। इसमें ईरान-इस्राइल संघर्ष, क्षेत्र में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और भारत की रणनीतिक तैयारी की समीक्षा की गई है।
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में रविवार को कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की हाई-लेवल बैठक हुई है। प्रधानमंत्री आवास पर हुई अहम बैठक में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण, एनएसए अजीत डोभाल और विदेश सचिव विक्रम मिसरी मौजूद रहे। राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु और पुडुचेरी के दो दिवसीय दौरे के बाद पीएम मोदी के रात करीब 9.30 बजे राष्ट्रीय राजधानी पहुंचने के तुरंत बाद सीसीएस की बैठक आयोजित की गई।
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ईरान पर अमेरिका-इस्राइल हमले से बढ़ी चिंता
भारत की सुरक्षा और रणनीतिक मामलों पर फैसले लेने वाली सबसे बड़ी समिति, कैबिनेट कमिटी की यह मीटिंग ऐसे समय में हो रही है जब ईरान पर अमेरिका-इस्राइली हवाई हमले के बाद पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ती भू-राजनैतिक स्थिति के बीच क्षेत्रीय संघर्ष और बढ़ गया है और वैश्विक सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं।
बैठक में रक्षा, गृह, विदेश और वित्त मंत्री शामिल
बता दें कि सीसीएस भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसलों के लिए सबसे बड़ी संस्था है, जिसमें प्रधानमंत्री और रक्षा, गृह, विदेश और वित्त मंत्री शामिल हैं। सीसीएस की इस बैठक को पश्चिम एशिया में हाल की घटनाओं के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें ईरानी ठिकानों पर यूएस-इस्राइल के हमले और उसके बाद की जवाबी कार्रवाई शामिल है। रिपोर्ट्स से पता चलता है कि इससे जुड़ी झड़पों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है, जिससे बड़े संघर्ष का डर बढ़ गया है।
इस बैठक में भारत के रणनीतिक हितों पर पड़ने वाले असर की समीक्षा की गई है, जिसमें इस क्षेत्र में, खासकर यूएई और दूसरे खाड़ी देशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, एनर्जी सिक्योरिटी, समुद्री रास्ते और कूटनीतिक स्थिति शामिल हैं। पश्चिम एशिया संकट में भारत ने संतुलित रुख बनाए रखा है, अपने नागरिकों और आर्थिक संबंधों की रक्षा करते हुए तनाव कम करने की वकालत की है। सूत्रों का कहना है कि चर्चा में जरूरत पड़ने पर लोगों को निकालने के लिए इमरजेंसी प्लान, तेल की कीमतों पर असर और इंटरनेशनल साझेदारों के साथ तालमेल शामिल हो सकता है।
खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया में रहते हैं 90 लाख भारतीय
फिलहाल, पश्चिम एशिया का हवाई क्षेत्र लगभग बंद है। पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव बढ़ने के कारण उड़ान सेवाएं बाधित होने से सैकड़ों भारतीय दुबई, दोहा और क्षेत्र के अन्य प्रमुख हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं, जिनमें से कई लोग सहायता के लिए भारतीय सरकार से अपील करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, बैठक में ईरानी अधिकारियों द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने से उत्पन्न स्थिति का भी जायजा लिया गया, जो भारतीय तेल वाहक जहाजों के लिए एक प्रमुख शिपिंग मार्ग है। ईरान में लगभग 10,000 भारतीय नागरिक रहते, पढ़ते और काम करते हैं, जबकि इस्राइल में 40,000 से अधिक भारतीय नागरिक रहते हैं। खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया में रहने वाले भारतीयों की संख्या लगभग 90 लाख है।
एक मार्च को खामेनेई के मारे जाने की हुई पुष्टि
पहले भी भारत ने संघर्षों के बीच पश्चिम एशिया सहित दुनिया के कई हिस्सों से अपने हजारों नागरिकों को सफलतापूर्वक निकाला है। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा कि पूरे क्षेत्र में भारतीय दूतावास अपने नागरिकों के साथ लगातार संपर्क में हैं, साथ ही हेल्पलाइन भी सक्रिय कर दी गई हैं। रविवार तड़के इस्राइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए एक बड़े हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत हो गई। ईरानी सरकारी टेलीविजन और सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने रविवार तड़के 86 वर्षीय खामेनेई के निधन की घोषणा की।
ईरान टकराव पर भारत की भूमिका
भारत ने पहले ही आधिकारिक बयान जारी कर सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि तनाव बढ़ाने से बचना और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। भारत ने स्पष्ट किया कि संवाद और कूटनीति ही संकट का समाधान है तथा सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान जरूरी है।
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची से फोन पर बात की।
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भारत की गहरी चिंता से उन्हें अवगत कराया गया।
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इस्राइल के विदेश मंत्री गिडोन सार से भी बातचीत हुई।
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दोनों पक्षों से तनाव कम करने और बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील दोहराई गई।
इस्राइल दौरे के बाद बदला वैश्विक माहौल
प्रधानमंत्री मोदी हाल ही में इस्राइल के दौरे पर गए थे, जहां उन्होंने इस्राइली संसद में संबोधन दिया था। इस दौरान भारत-इस्राइल संबंधों को मजबूत बताया गया। वहीं अब क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बनने के बाद भारत संतुलित कूटनीतिक रुख अपनाते हुए सुरक्षा और ऊर्जा हितों पर नजर बनाए हुए है।
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भारत के लिए क्यों अहम है यह संकट?
पश्चिम एशिया भारत के ऊर्जा आयात, व्यापार और प्रवासी भारतीयों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। लंबे संघर्ष की स्थिति में तेल आपूर्ति, वैश्विक बाजार और भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। इसी कारण सीसीएस बैठक को रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।
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