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PM Modi: काका हाथरसी के दोहे, बाघ-शिकारी की कहानी और दुष्यंत कुमार की कविता; पीएम ने कैसे विपक्ष को घेरा?

Wed, 08 Feb 2023 09:39 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Wed, 08 Feb 2023 09:39 PM IST
सार

लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा पर जवाब देने के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधने के लिए काका हाथरसी के एक दोहे, दुष्यंत कुमार की एक कविता की लाइनें और  बाघ और शिकारी की एक कहानी भी सुनाई। पढ़े पीएम मोदी ने क्या कहा...

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PM Modi targeted opposition in Parliament with Kaka Hathrasi doha tiger-hunter story and Dushyant Kumar shayr
पीएम मोदी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के बजट सत्र के दौरान बुधवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा पर जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। विपक्ष पर हमला करने के लिए पीएम मोदी ने काका हाथरसी के दोहे , बाघ और शिकारी की एक कहानी के साथ ही दुष्यंत कुमार की एक कविता की लाइनों का जिक्र करके विपक्ष की भावना की पोल खोली। पीएम ने अपने संबोधन के दौरान कहा हमारा देश एक विश्वास से भरा हुआ है, सपने और संकल्प लेकर चलने वाला देश है, लेकिन यहां कुछ लोग ऐसी निराशा में डूबे हैं..।

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पीएम ने कहा काका हाथरसी ने बड़ी मजेदार बात कही थी- 'आगा-पीछा देखकर, क्यों होते गुमगीन, जैसी जिसकी भावना, वैसा दिखे सीन। ये निराशा भी ऐसे नहीं आई।' 
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पीएम मोदी ने कहानी सुनाकर साधा विपक्ष पर निशाना
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जंगल में गए दो नौजवानों की एक कहानी सुनाकर भाजपा की पूर्ववर्ती सरकारों और विपक्षी दलों पर निशाना साधा। पीएम मोदी ने कहानी सुनाते हुए कहा 'एक बार जंगल में दो नौजवान शिकार करने गए थे और वो गाड़ी में अपनी बंदूक रखकर नीचे उतरकर टहलने लगे, लेकिन गए तो बाघ का शिकार करने थे। उन्होंने सोचा था कि आगे बाघ दिखेगा, लेकिन बाघ वहीं आ गया। अब करें क्या, उन्होंने बाघ को लाइसेंस दिखाया कि देखो हमारे पास बंदूक का लाइसेंस है। उन्होंने इसी तरह बेरोगजारी दूर करने के नाम पर कानून दिखा दिया। अपने तरीके से पल्ला झाड़ दिया।' 
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दुष्यंत कुमार की कविता की लाइनें सुनाकर दिखाई विपक्ष को जमीन
अपने संबोधन के दौरान पीएम ने कहा कि मैंने कई बार सुना है। यहां कुछ लोगों को हॉर्वर्ड का बड़ा क्रेज है। कोरोनाकाल में ऐसा ही कहा गया था और कांग्रेस ने कहा था कि भारत की बर्बादी पर हॉर्वर्ड में केस स्टडी होगी। और फिर कल सदन में हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी में स्टडी की बात हुई, लेकिन बीते वर्षों में वहां एक बहुत बढ़िया और महत्वपूर्ण स्टडी हुई। उसका विषय था- द राइज एंड डिक्लाइन ऑफ इंडियाज कांग्रेस पार्टी। मुझे विश्वास है कि भविष्य में कांग्रेस की बर्बादी पर हॉर्वर्ड नहीं, बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों में अध्ययन होना ही होना है और कांग्रेस को डुबाने वाले लोगों पर भी अध्ययन होने वाला है। ऐसे लोगों के लिए दुष्यंत कुमार ने बहुत बढ़िया बात कही है। उन्होंने कहा है- 'तुम्हारे पांव के नीचे कोई जमीन नहीं, कमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यकीन नहीं?'



कांग्रेस सरकार में ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर कमजोर थी भारत की आवाज   
आजादी के इतिहास में वह सबसे ज्यादा घोटालों का दशक रहा। यूपीए के वही दस साल में कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत के हर कोने में आतंकी हमलों का सिलसिला चलता रहा। चारों तरफ यही सूचना रहती थी कि अनजानी चीज को हाथ नहीं लगाना, दूर रहना। दस साल में जम्मू-कश्मीर से पूर्वोत्तर तक हिंसा ही हिंसा थी। भारत की आवाज ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर इतनी कमजोर थी कि दुनिया सुनने को तैयार नहीं थी। ये 2जी में फंसे रहे। जब असैन्य परमाणु करार हुआ, तब ये वोट के बदले नोट में फंसे रहे। 2010 में राष्ट्रमंडल खेल हुए। भारत को दुनिया के सामने प्रस्तुत का अवसर था। फिर घोटाले में पूरा देश दुनिया में बदनाम हो गया।

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