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Lok Sabha: लोकसभा में दो घंटे से ज्यादा बोले PM मोदी, विपक्ष को घेरा; अखिलेश समेत अन्य ने नहीं की टोका-टोकी
सार
इससे पहले सुबह भाजपा के संसदीय दल बैठक थी। बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सांसदों को संबोधित किया। उन्हें एक अच्छे संसद सदस्य के गुर भी बताए। भाजपा के लोकसभा में रणनीतिकारों को अनुमान था कि प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान विपक्ष के नेता हंगामे की रणनीति अपनाएंगे और हुआ भी कुछ ऐसा ही।
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PM Modi
- फोटो : PTI
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देना था। वह लोकसभा संसद भवन आ चुके थे। थोड़ी देर बाद राहुल गांधी भी संसद पहुंचते हैं। उनके समर्थक उन्हें उनकी तरफ दौड़ पड़ते हैं। उन्होंने राहुल गांधी से उनके सोमवार के भाषण की तारीफ की। राहुल ने मुस्कराकर इसे लिया और कहा आपको पसंद आया। थोड़ी देर बाद करीब 4.15 बजे सायं प्रधानमंत्री मोदी ने चर्चा का जवाब देना शुरू किया। प्रधानमंत्री के इस जवाब पर भाजपा के संगठन से जुड़े बड़े नेताओं की निगाह थी। इससे पहले सुबह भाजपा के संसदीय दल बैठक थी। बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सांसदों को संबोधित किया। उन्हें एक अच्छे संसद सदस्य के गुर भी बताए। भाजपा के लोकसभा में रणनीतिकारों को अनुमान था कि प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान विपक्ष के नेता हंगामे की रणनीति अपनाएंगे और हुआ भी कुछ ऐसा ही।
पीएम के जवाब के वक्त राहुल के हावभाव कैसे थे?
प्रधानमंत्री मोदी लोकसभा में चर्चा का जवाब देते समय राहुल का बिना नाम लिए सदन को कहानी सुना रहे थे। प्रधानमंत्री के कहानी शुरू करते समय अखिलेश और राहुल में रह-रहकर गुफ्तगू चल रही थी। प्रधानमंत्री की पहली कहानी करीब-करीब खत्म होने वाली थी। वह टारगेट करने वाले थे, लेकिन उनकी कहानी का मंतव्य राहुल को मानो समझ में नहीं आ रहा था। अपनी कहानी के माध्यम से प्रधानमंत्री ने राहुल गांधी को बिना उनका नाम लिए बालबुद्धि की श्रेणी में भी ले जाकर खड़ा किया। अंत में सभापति से अपील भी कि अब इस बालबुद्धि के सदन में ऐसे व्यवहार को माफ करने के बजाय इसके विरुद्ध कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है।
2 घंटे खूब हुआ हंगामा, लेकिन कोई टोका-टोकी नहीं
पिछले दस साल में प्रधानमंत्री मोदी ने संभवत: पहली बार विपक्ष की ऐसी रणनीति का सामना किया। राहुल गांधी, अखिलेश यादव, टीएमसी के नेता समेत विपक्ष के अन्य नेता सदन में मौजूद रहे। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस और विपक्ष के नेता राहुल गांधी का बिना नाम लिए उन पर खूब हमला बोला। बालबुद्धि, संसदीय मर्यादा का पालन न करने वाला समेत तमाम आरोप लगाए। प्रधानमंत्री ने अपनी तरफ से खूब मोर्चा खोला। प्रधानमंत्री ने अपने दो घंटे से अधिक के संबोधन में एक बार अखिलेश यादव का ध्यान आकर्षित करने के लिए उनका नाम भी लिया, लेकिन नेता प्रतिपक्ष और उनके साथ अगली पंक्ति में बैठे अखिलेश यादव समेत अन्य ने एक बार भी टोकना उचित नहीं समझा। हालांकि, इस दौरान विपक्षी खेमे के सांसद लगातार शोर-शराबा, हंगामा, नारे बाजी करते रहे। इस दौरान उन्हें लोकसभा अध्यक्ष ने तीन-चार बार टोका, चेतावनी दी, लेकिन सदस्य मणिपुर में हिंसा, नीट के पेपर लीक समेत अन्य मुद्दों पर नारा लगाते रहे। हालांकि, प्रधानमंत्री के संबोधन में पहले जैसे व्यंग, तंज और रोचकता कम देखने को मिली। अंत में प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के हाथरस में सत्संग के दौरान हुई भगदड़ और मारे गए लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए अपने संबोधन को समाप्त किया।
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राहुल गांधी के 90 मिनट के भाषण ने किया विपक्ष का जोश हाई
आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा ने राहुल गांधी के संबोधन को शानदार बताया। संजय सिंह ने भी सराहना की। फैजाबाद के सांसद अवधेश प्रसाद ने भी राहुल गांधी के सोमवार को लोकसभा में दिए गए भाषण को अच्छा बताया। उन्होंने कहा कि राहुल ने कई मुद्दे उठाए। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष इस मामले में बहुत संतुलित रहे। उन्होंने लोकसभा में अपने संबोधन में तमाम मुद्दे उठाए। व्यंजना, लक्षणा में सरकार को घेरा। उन्होंने भाजपा नेताओं हिन्दुत्व को लेकर राहुल गांधी पर हमले को सत्ता पक्ष की रणनीति बताया। टीएमसी के कल्याण बनर्जी ने कहा कि राहुल गांधी ने सरकार से सवाल पूछे हैं। अपनी बात अच्छे तरीके से रखी है। इससे मजबूत विपक्ष का संदेश गया है।
प्रधानमंत्री ने किन-किन मुद्दों पर बात रखी?
राहुल गांधी ने नीट के पेपर लीक का मुद्दा उठाया था। 90 मिनट के भाषण में मणिपुर, पेपर लीक, प्रोफेशनल परीक्षा को व्यवसायिक परीक्षा बनाने समेत तमाम मुद्दों को उठाया था। अखिलेश यादव ने उ.प्र. से जुड़े तमाम मुद्दों पर सरकार को घेरा था। प्रधानमंत्री ने नीट के मामले में सख्त कार्रवाई, किसी भी दोषी को न छोड़े जाने, कड़ा कानून बनाने संबंधी संक्षिप्त जवाब दिए। अग्निवीर योजना की तारीफ की, सैन्य सुधार को प्रथामिकता में बताया। प्रधानमंत्री ने जवाब में पिछले 10 साल से देश में सरकार द्वारा अमूल-चूल परिवर्तन लाने, सुधार कार्यक्रम को जारी रखने के पक्ष को रखा।
लोकसभा अध्यक्ष पर अभी जारी हैं राहुल गांधी के सवाल
राहुल गांधी ने सोमवार को लोकसभा में अपना पक्ष रखा था। मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ने उसमें से कुछ अंश रिकॉर्ड से हटा दिए। नेता प्रतिपक्ष ने इस पर बयान भी दिया और लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अंश को रिकॉर्ड में जारी रखने की भी मांग की। राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने सदन में सच्चाई कही है। लोकसभा अध्यक्ष के इसमें से अंश हटा लेने से सच्चाई खत्म नहीं हो जाएगी। सोमवार को अपने संबोधन में भी राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर एक के बाद एक दो तीन गंभीर आरोप लगाए।
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पीएम के जवाब के वक्त राहुल के हावभाव कैसे थे?
प्रधानमंत्री मोदी लोकसभा में चर्चा का जवाब देते समय राहुल का बिना नाम लिए सदन को कहानी सुना रहे थे। प्रधानमंत्री के कहानी शुरू करते समय अखिलेश और राहुल में रह-रहकर गुफ्तगू चल रही थी। प्रधानमंत्री की पहली कहानी करीब-करीब खत्म होने वाली थी। वह टारगेट करने वाले थे, लेकिन उनकी कहानी का मंतव्य राहुल को मानो समझ में नहीं आ रहा था। अपनी कहानी के माध्यम से प्रधानमंत्री ने राहुल गांधी को बिना उनका नाम लिए बालबुद्धि की श्रेणी में भी ले जाकर खड़ा किया। अंत में सभापति से अपील भी कि अब इस बालबुद्धि के सदन में ऐसे व्यवहार को माफ करने के बजाय इसके विरुद्ध कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है।
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2 घंटे खूब हुआ हंगामा, लेकिन कोई टोका-टोकी नहीं
पिछले दस साल में प्रधानमंत्री मोदी ने संभवत: पहली बार विपक्ष की ऐसी रणनीति का सामना किया। राहुल गांधी, अखिलेश यादव, टीएमसी के नेता समेत विपक्ष के अन्य नेता सदन में मौजूद रहे। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस और विपक्ष के नेता राहुल गांधी का बिना नाम लिए उन पर खूब हमला बोला। बालबुद्धि, संसदीय मर्यादा का पालन न करने वाला समेत तमाम आरोप लगाए। प्रधानमंत्री ने अपनी तरफ से खूब मोर्चा खोला। प्रधानमंत्री ने अपने दो घंटे से अधिक के संबोधन में एक बार अखिलेश यादव का ध्यान आकर्षित करने के लिए उनका नाम भी लिया, लेकिन नेता प्रतिपक्ष और उनके साथ अगली पंक्ति में बैठे अखिलेश यादव समेत अन्य ने एक बार भी टोकना उचित नहीं समझा। हालांकि, इस दौरान विपक्षी खेमे के सांसद लगातार शोर-शराबा, हंगामा, नारे बाजी करते रहे। इस दौरान उन्हें लोकसभा अध्यक्ष ने तीन-चार बार टोका, चेतावनी दी, लेकिन सदस्य मणिपुर में हिंसा, नीट के पेपर लीक समेत अन्य मुद्दों पर नारा लगाते रहे। हालांकि, प्रधानमंत्री के संबोधन में पहले जैसे व्यंग, तंज और रोचकता कम देखने को मिली। अंत में प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के हाथरस में सत्संग के दौरान हुई भगदड़ और मारे गए लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए अपने संबोधन को समाप्त किया।
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राहुल गांधी के 90 मिनट के भाषण ने किया विपक्ष का जोश हाई
आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा ने राहुल गांधी के संबोधन को शानदार बताया। संजय सिंह ने भी सराहना की। फैजाबाद के सांसद अवधेश प्रसाद ने भी राहुल गांधी के सोमवार को लोकसभा में दिए गए भाषण को अच्छा बताया। उन्होंने कहा कि राहुल ने कई मुद्दे उठाए। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष इस मामले में बहुत संतुलित रहे। उन्होंने लोकसभा में अपने संबोधन में तमाम मुद्दे उठाए। व्यंजना, लक्षणा में सरकार को घेरा। उन्होंने भाजपा नेताओं हिन्दुत्व को लेकर राहुल गांधी पर हमले को सत्ता पक्ष की रणनीति बताया। टीएमसी के कल्याण बनर्जी ने कहा कि राहुल गांधी ने सरकार से सवाल पूछे हैं। अपनी बात अच्छे तरीके से रखी है। इससे मजबूत विपक्ष का संदेश गया है।
प्रधानमंत्री ने किन-किन मुद्दों पर बात रखी?
राहुल गांधी ने नीट के पेपर लीक का मुद्दा उठाया था। 90 मिनट के भाषण में मणिपुर, पेपर लीक, प्रोफेशनल परीक्षा को व्यवसायिक परीक्षा बनाने समेत तमाम मुद्दों को उठाया था। अखिलेश यादव ने उ.प्र. से जुड़े तमाम मुद्दों पर सरकार को घेरा था। प्रधानमंत्री ने नीट के मामले में सख्त कार्रवाई, किसी भी दोषी को न छोड़े जाने, कड़ा कानून बनाने संबंधी संक्षिप्त जवाब दिए। अग्निवीर योजना की तारीफ की, सैन्य सुधार को प्रथामिकता में बताया। प्रधानमंत्री ने जवाब में पिछले 10 साल से देश में सरकार द्वारा अमूल-चूल परिवर्तन लाने, सुधार कार्यक्रम को जारी रखने के पक्ष को रखा।
लोकसभा अध्यक्ष पर अभी जारी हैं राहुल गांधी के सवाल
राहुल गांधी ने सोमवार को लोकसभा में अपना पक्ष रखा था। मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ने उसमें से कुछ अंश रिकॉर्ड से हटा दिए। नेता प्रतिपक्ष ने इस पर बयान भी दिया और लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अंश को रिकॉर्ड में जारी रखने की भी मांग की। राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने सदन में सच्चाई कही है। लोकसभा अध्यक्ष के इसमें से अंश हटा लेने से सच्चाई खत्म नहीं हो जाएगी। सोमवार को अपने संबोधन में भी राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर एक के बाद एक दो तीन गंभीर आरोप लगाए।