पाकिस्तान को घेरने में काम आई मोदी की ब्रिक्स-बिम्सटेक कूटनीति
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्रिक्स घोषणापत्र में भले ही भारत सीमा पार आतंकवाद का जिक्र नहीं करा पाया हो, मगर उसने आतंकवाद के मामले में चीन के इतर ब्रिक्स और बिम्सटेक के सदस्य देशों को गोलंबद कर बड़ी कूटनीतिक सफलता हासिल की है।
खासतौर पर आर्थिक संकट के दौर से बाहर आने के लिए बहुत हद तक चीन के रहमोकरम पर टिके रूस का भारत के सुर में सुर मिलाना बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि है। विदेश मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिक्स सम्मेलन ने आतंकवाद के सवाल पर चीन के लिए शर्मिंदगी वाली स्थिति पैदा कर दी है।
विशेषज्ञों की मानें तो इस सम्मेलन में पाकिस्तान के लिए चीन जरा भी सहानुभूति नहीं बटोर पाया और न ही भारत के खिलाफ ब्रिक्स व बिम्सटेक के एक भी सदस्य को खड़ा कर पाया।
इसके विपरीत भारत घोषणापत्र में आतंकवाद के ठिकानों को ध्वस्त करने और आतंकी संगठनों से निपटने के प्रति ब्रिक्स और बिम्सटेक सदस्यों की सहमति हासिल कर पाकिस्तान को भी कड़ा संदेश देने में सफल रहा।
ब्रिक्स समिट ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की मुहिम को दी ताकत
विदेशी मामलों के विशेषज्ञ जी पार्थसारथी के मुताबिक भारत ने पहली बार इतने बड़े मंच पर पाकिस्तान के खिलाफ मोर्चा खोला था। इस मोर्चे पर चीन को सबक सिखाने के लिए भारत ने कूटनीतिक होशियारी दिखाते हुए ब्रिक्स के विस्तारित सत्र में सार्क के बजाय बिम्सटेक देशों को आमंत्रित किया।
अगर सार्क को आमंत्रित किया जाता तो इसमें शामिल पाकिस्तान और चीन आतंकवाद पर भारत की कूटनीति को बैकफुट पर धकेल सकते थे। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की सबसे बड़ी सफलता रूस का सीमा पार आतंकवाद पर भारत के सुर में सुर मिलाना है।
उनका कहना था कि आर्थिक संकट से घिरे रूस के लिए विदेशी मुद्रा अर्जित करने का चीन सबसे बड़ा स्रोत है। इसके बावजूद रूस का भारत के प्रति झुकाव चीन की शर्मिंदगी का कारण बना।
चीन नहीं जुटा पाया पाकिस्तान के लिए रत्ती भर सहानुभूति
भविष्य में चीन के भारत विरोधी रुख में नरमी आने के संकेत नहीं हैं, मगर निश्चित रूप से महज पाकिस्तान के समर्थन के लिए आतंकवाद पर चीन का नरम रुख उसकी परेशानी बढ़ाएगा।
पूर्व विदेश सचिव सलमान हैदर कहते हैं कि चीन ने क्षेत्रीय मुद्दों को बातचीत के जरिये हल करने की बात कर पाकिस्तान के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की, मगर नतीजे बताते हैं कि उसका यह अभियान सफल नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद के मुद्दे पर चीन को छोड़ अन्य देशों का समर्थन हासिल करने में कामयाब रहा। निश्चित रूप से ब्रिक्स समिट के बाद भारत की पाकिस्तान को अलग-थलग करने की मुहिम न सिर्फ और मजबूत होगी, बल्कि भारत और अधिक शिद्दत के साथ इस अभियान को आगे बढ़ाएगा।