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मोदी का फैसला: काले धन के खिलाफ या 'काली मुद्रा' के?

Fri, 11 Nov 2016 10:37 AM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Fri, 11 Nov 2016 10:37 AM IST
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Pm Modi's bold move is against black money or black currency?
8 नवंबर को सरकार ने 500 और 1000 के नोट चलन से बाहर कर दिया।
पुरानी कहावत है: बड़े मूल्य के नोट छिपाने के लिए होते हैं और छोटे मूल्य के खर्च करने के लिए। नोटों, आय या धन को छिपाने की यही प्रक्रिया काले धन या 'ब्लैक मनी को जन्म देती है।' 'ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल' का कहना है कि 9 नवंबर का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एलान 'काली मुद्रा' के खिलाफ था न कि 'काले धन' के खिलाफ। 'ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल' भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करने वाली अंतराष्ट्रीय संस्था है और रामनाथ झा उसकी भारतीय शाखा के अध्यक्ष हैं। तो 'काला धन' है क्या?
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रामनाथ झा कहते हैं, "ब्लैक मनी वो धन है जिसपर सरकार को टैक्स ना दिया गया हो। या, फिर ये गैर कानूनी तरीके से एकत्रित किया गया हो। ये नोटों की शक्ल में हो सकता है, प्रॉपर्टी की शक्ल में, या फिर, आभूषण की सूरत में हो सकता है या फिर बेनामी सौदों की आड़ में।"
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'ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल' का मानना है कि इसलिए मोदी सरकार ने जो फैसला किया है उसका प्रहार केवल मार्केट में मौजूद नकदी नोटों पर है। रामनाथ झा का कहना है, मोदी सरकार के इस कदम से मार्केट में उपस्थित नोटों को धक्का लगेगा, काले धन को शायद नहीं। उनके अनुसार सरकार ने एक तरफ काले मुद्रे या नोटों को निशाना बनाया है तो दूसरी तरफ 2000 रुपये का नोट जारी करके इसे काफी हद तक नकार भी दिया है।
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2000 का नोट लाने का फैसला आश्चर्यजनक है। दस से पंद्रह सालों में बाजार में 'काली मुद्रा' एक बार फिर से आ जाएगी।" रामनाथ झा के अनुसार मोदी सरकार का ये फैसला ऐतिहासिक जरूर है, जिसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत थी, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था से अघोषित पैसा खत्म करने के लिए कई और कदम उठाने पड़ेंगे।

बैंकिंग क्षेत्र में सुधार

सिंगापुर में दो साल पहले बड़े नोटों को सिस्टम से हटाया गया था। ये कदम काफी कामयाब रहा। रामनाथ झा कहते हैं कि उसकी खास वजह रही सिंगापुर सरकार के आर्थिक सुधार के कई और कदम जिनमें टैक्स और बैंकिंग क्षेत्रों में सुधार खास थे। उनके अनुसार भारत के ग्रामीण इलाकों में बैंकों की शाखाएं खुलनी चाहिए, एटीएम टर्मिनल खोलने की जरूरत है। लेकिन इससे भी अहम ग्रामीण लोगों को बैंकिंग सिस्टम के अंदर लाया जाए। लोगों के बैंक खाते खुले हैं लेकिन उन्हें बैंकिंग की जानकारी कम है, वो क्रेडिट और डेबिट कार्ड के इस्तेमाल की समझ कम रखते हैं।

Pm Modi's bold move is against black money or black currency?
एटीएम के बाहर लगी कतार।
कर सुधार 

फिलहाल भारत में इनकम टैक्स देने वालों की संख्या कुल आबादी का केवल दो प्रतिशत है। यानी तीन-चार करोड़ लोग ही इनकम टैक्स देते हैं। जरूरत इस बात की है कि अधिक से अधिक लोगों को टैक्स के दायरे में लाया जाए। इसके इलावा ये तय होना चाहिए कि एक आदमी कितनी निश्चित राशि रख सकता है।

कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की ओर कदम

रामनाथ झा का मानना है कि काली मुद्रा पर अंकुश लगाने के लिए ऑनलाइन या प्लास्टिक कार्ड से होने वाले कैश के बगैर ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देना चाहिए। इ-कॉमर्स का प्रोत्साहन होना चाहिए। कैशलेस धंधे को पूरी तरह से प्रोत्साहित करना होगा जिसके लिए सरकार को इंसेंटिव देना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सरकारी वेबसाइट्स पर होनेवाले ट्रांजैक्शन पर सरचार्ज लेना बंद हो जाए तो इससे लोगों को फायदा होगा।

भ्रष्टाचार विरोधी सख्त कानून

रामनाथ झा ने कहा कि भारत के निजी सेक्टर में, खासतौर से सेवा के क्षेत्र में भ्रष्टाचार आम है। इस पर अंकुश लगाने के लिए सख्त भ्रष्टाचार विरोधी कानून लाने की जरूरत है। उनके अनुसार ब्रिटेन का भ्रष्टाचार विरोधी कानून दुनिया के सबसे कड़े कानूनों में से एक है। भारत को इसी तरह के कानून की जरूरत है।

संपत्ति और भूमि सुधार

रामनाथ झा कहते हैं कि काले धन में बेनामी संपत्ति शामिल है जिसपर रोक लगाना जरूरी है। उनका कहना है कि काली मुद्रा के साथ काले धन को निशाना बनाना जरूरी है। संपत्ति खरीदनते समय कैश की डिमांड होती है और लोग इसे देने को मजबूर हैं जिसपर रोक लगाना जरूरी है और जिसके लिए राजस्व प्रशासन में सूचना प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल पर जोर देना होगा।
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