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PM Modi: 'मैं आज भी मां की कमी महसूस करता हूं', पूर्व राष्ट्रपति कोविंद की आत्मकथा के विमोचन पर भावुक हुए पीएम
Wed, 12 Aug 2026 10:21 AM IST
नितिन गौतम
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Wed, 12 Aug 2026 10:21 AM IST
सार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन किया। इस दौरान पीएम मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति की जमकर तारीफ की। साथ ही बातों-बातों में वे युवाओं को भी अहम सीख दे गए। आइए जानते हैं कि पीएम मोदी ने क्या कहा...
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पीएम मोदी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने सभा को संबोधित किया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति की जमकर तारीफ की और उनके जीवन संघर्ष को प्रेरणा बताया। इस दौरान पीएम मोदी ने अपनी मां का भी जिक्र किया और उनका जिक्र कर भावुक भी हुए।
पीएम मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति की जमकर तारीफ की
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की इस आत्मकथा का शीर्षक 'ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माय लाइफ, माय स्ट्रगल्स' है। आत्मकथा में रामनाथ कोविंद के जीवन की कहानी है। इसमें उनके शुरुआती वर्षों से लेकर सार्वजनिक जीवन और भारत के 14वें राष्ट्रपति के रूप में सेवा तक के अनुभवों, संघर्षों और उपलब्धियों का ब्योरा है। इस किताब के विमोचन के अवसर पर अपने संबोधन में पीएम मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति की तारीफ करते हुए कहा, 'राष्ट्रपति के रूप में उनका मार्गदर्शन और उनका स्नेह, उनकी आत्मीयता मेरी बहुत बड़ी पूंजी रही।'
मां को याद कर भावुक हुए पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा, 'मैंने उनके जीवन को जितना समझा है, उनकी कार्यक्षमताओं को जितना जाना है, मैं विश्वास से कह सकता हूं कि रामनाथ कोविंद की आत्मकथा भारतीय लोकतंत्र और भारतीय समाज की धरोहर बनेगी।' इसके बाद पीएम मोदी ने कहा, 'रामनाथ कोविंद ने छोटी सी उम्र में मां को खो दिया। मैं तो भाग्यशाली रहा हूं कि मेरी मां 100 वर्ष से अधिक जीवित रहीं और मुझे आशीर्वाद देती रहीं, इसके बावजूद मैं मां की कमी महसूस करता हूं। ऐसे हालात में कोई भी टूट सकता है, लेकिन रामनाथ कोविंद को उन मुश्किल हालात ने और मजबूत बनाया।'
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'भविष्य में रामनाथ कोविंद जैसे अनेकों युवा चाहिए'
पीएम मोदी ने कहा कि हमें भविष्य में रामनाथ कोविंद जैसे अनेकों युवा चाहिए, जो परेशानियों से परास्त न हों, जो मुश्किलों से मायूस न हों बल्कि अपनी मेहनत से हर मंजिल को आसान बनाने का हौसला रखें। इसी बदलाव से सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प पूरा होगा। यहीं से आत्मनिर्भर और विकसित भारत का रास्ता बनेगा।
'एक देश-एक चुनाव देश के लोकतंत्र का नया अध्याय शुरू कर सकता है'
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, 'हमारे पूर्वजों ने सदियों तक संघर्ष किया। महात्मा गांधी, बाबा साहेब अंबेडकर, ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले... ऐसी कितनी महान विभूतियों ने भारत के नवनिर्माण का सपना देखा था। एक ऐसा भारत जहां गरीब से गरीब, वंचित से वंचित को शिखर तक पहुंचने का अवसर मिल सके। रामनाथ कोविंद जैसे व्यक्तित्वों ने अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर न सिर्फ अपना जीवन बदला बल्कि सदियों के उस सपने और विजन को साकार करने में अहम भूमिका निभाई।'
'राष्ट्रपति जैसे पद से सेवामुक्त होने के बाद भी उन्होंने विश्राम नहीं लिया है और वो अभी भी एक देश, एक चुनाव जैसे महत्वपूर्ण विषय पर काम कर रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि ये एक ऐसा विषय है, जिसका समाधान देश के लोकतंत्र का नया अध्याय शुरू कर सकता है।'
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पीएम मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति की जमकर तारीफ की
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की इस आत्मकथा का शीर्षक 'ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माय लाइफ, माय स्ट्रगल्स' है। आत्मकथा में रामनाथ कोविंद के जीवन की कहानी है। इसमें उनके शुरुआती वर्षों से लेकर सार्वजनिक जीवन और भारत के 14वें राष्ट्रपति के रूप में सेवा तक के अनुभवों, संघर्षों और उपलब्धियों का ब्योरा है। इस किताब के विमोचन के अवसर पर अपने संबोधन में पीएम मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति की तारीफ करते हुए कहा, 'राष्ट्रपति के रूप में उनका मार्गदर्शन और उनका स्नेह, उनकी आत्मीयता मेरी बहुत बड़ी पूंजी रही।'
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मां को याद कर भावुक हुए पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा, 'मैंने उनके जीवन को जितना समझा है, उनकी कार्यक्षमताओं को जितना जाना है, मैं विश्वास से कह सकता हूं कि रामनाथ कोविंद की आत्मकथा भारतीय लोकतंत्र और भारतीय समाज की धरोहर बनेगी।' इसके बाद पीएम मोदी ने कहा, 'रामनाथ कोविंद ने छोटी सी उम्र में मां को खो दिया। मैं तो भाग्यशाली रहा हूं कि मेरी मां 100 वर्ष से अधिक जीवित रहीं और मुझे आशीर्वाद देती रहीं, इसके बावजूद मैं मां की कमी महसूस करता हूं। ऐसे हालात में कोई भी टूट सकता है, लेकिन रामनाथ कोविंद को उन मुश्किल हालात ने और मजबूत बनाया।'
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'भविष्य में रामनाथ कोविंद जैसे अनेकों युवा चाहिए'
पीएम मोदी ने कहा कि हमें भविष्य में रामनाथ कोविंद जैसे अनेकों युवा चाहिए, जो परेशानियों से परास्त न हों, जो मुश्किलों से मायूस न हों बल्कि अपनी मेहनत से हर मंजिल को आसान बनाने का हौसला रखें। इसी बदलाव से सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प पूरा होगा। यहीं से आत्मनिर्भर और विकसित भारत का रास्ता बनेगा।
'एक देश-एक चुनाव देश के लोकतंत्र का नया अध्याय शुरू कर सकता है'
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, 'हमारे पूर्वजों ने सदियों तक संघर्ष किया। महात्मा गांधी, बाबा साहेब अंबेडकर, ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले... ऐसी कितनी महान विभूतियों ने भारत के नवनिर्माण का सपना देखा था। एक ऐसा भारत जहां गरीब से गरीब, वंचित से वंचित को शिखर तक पहुंचने का अवसर मिल सके। रामनाथ कोविंद जैसे व्यक्तित्वों ने अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर न सिर्फ अपना जीवन बदला बल्कि सदियों के उस सपने और विजन को साकार करने में अहम भूमिका निभाई।'
'राष्ट्रपति जैसे पद से सेवामुक्त होने के बाद भी उन्होंने विश्राम नहीं लिया है और वो अभी भी एक देश, एक चुनाव जैसे महत्वपूर्ण विषय पर काम कर रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि ये एक ऐसा विषय है, जिसका समाधान देश के लोकतंत्र का नया अध्याय शुरू कर सकता है।'