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Kanniyakumari: प्रधानमंत्री मोदी ने भगवती अम्मन मंदिर में किया दर्शन-पूजन; एक जून की शाम तक ध्यान साधना करेंगे
Thu, 30 May 2024 06:26 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Thu, 30 May 2024 06:26 PM IST
सार
लोकसभा चुनाव 2024 के लिए 200 चुनावी रैलियों, 80 इंटरव्यू और ऐसी तमाम व्यस्तताओं को पीछे छोड़ते हुए प्रधानमंत्री मोदी अब ध्यान साधना के रास्ते पर हैं। पीएम मोदी कन्याकुमारी पहुंचे हैं। यहां वे विवेकानंद मेमोरियल के ध्यानमंडपम में एक जून की शाम तक ध्यान लगाएंगे।
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कन्याकुमारी के भगवती अम्मन मंदिर में प्रधानमंत्री मोदी (वीडियो ग्रैब)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी चुनावी व्यस्तताओं के बाद तमिलनाडु के कन्याकुमारी में ध्यान-साधना करने पहुंचे हैं। पीएम मोदी ने कन्याकुमारी पहुंचने के बाद भगवती अम्मन मंदिर में प्रार्थना और पूजा-अर्चना की। प्रधानमंत्री धोती पहने दक्षिण भारत की पारंपरिक पोशाक में दिख। ऑफ-व्हाइट रंग के शॉल से ढके नजर आए प्रधानमंत्री मोदी विवेकानंद मेमोरियल के ध्यान मंडपम में आज शाम से 1 जून की शाम तक ध्यान करेंगे। पीएम मोदी उसी स्थान पर दिन-रात ध्यान करेंगे, जहां कई दशकों पहले स्वामी विवेकानंद ने ध्यान किया था। ऐसी मान्यता है कि इस स्थान पर देवी पार्वती ने एक पैर पर खड़े होकर साधना की थी।
बता दें कि प्रधानमंत्री चुनाव प्रचार के अंत में आध्यात्मिक यात्राओं के लिए जाने जाते हैं। पांच साल पहले लोकसभा चुनाव 2019 का प्रचार समाप्त होने के बाद पीएम मोदी ने केदारनाथ का दौरा किया था। 2014 में उन्होंने महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़े स्थल प्रतापगढ़ का दौरा किया था। गौरतलब है कि 543 लोकसभा सीटों के लिए चुनाव 19 अप्रैल से शुरू हुए हैं। सात चरणों में हो रहे चुनाव के लिए अंतिम दौर का मतदान एक जून को होना है। मतों की गिनती 4 जून को होगी।
तीन दिवसीय ध्यान साधना के बाद विकसित भारत का सूत्र मिला था
गौरतलब है कि पीएम मोदी ने ध्यान के लिए कन्याकुमारी को चुना इस फैसले के पीछे सांस्कृतिक अहमियत भी है। कन्याकुमारी वही स्थान है जहां दशकों पहले स्वामी विवेकानंद को भारत माता के दर्शन हुए थे। इस चट्टान का स्वामी विवेकानंद के जीवन पर बड़ा प्रभाव था। लोगों का मानना है कि गौतम बुद्ध के जीवन में जैसा महत्व सारनाथ का है, वैसे ही यह चट्टान भी स्वामी विवेकानंद के जीवन में विशिष्ट है। देश भर में घूमने के बाद कन्याकुमारी पहुंचे स्वामी विवेकानंद को यहीं तीन दिवसीय ध्यान साधना के बाद विकसित भारत का सूत्र मिला था। इसी स्थान पर देवी पार्वती ने भगवान शिव की प्रतीक्षा में एक पैर पर खड़े होकर साधना की थी।
राष्ट्रीय एकता का संकेत दे रहे हैं
इस भौगोलिक इलाके का एक महत्व यह भी है कि कन्याकुमारी का यह स्थान भारत का सबसे दक्षिणी छोर है। इसके अलावा इसी स्थान पर भारत की पूर्वी और पश्चिमी तट की रेखाएं मिलती हैं। यह हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर का मिलन बिंदु भी है। जानकारों की राय में कन्याकुमारी जाकर पीएम मोदी राष्ट्रीय एकता का संकेत दे रहे हैं।
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बीते 10 साल में दो आध्यात्मिक यात्राएं सुर्खियों में रहीं#WATCH | Prime Minister Narendra Modi offers prayer at Bhagavathy Amman Temple in Kanyakumari, Tamil Nadu
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He will meditate from 30th May evening to 1st June evening.
PM Modi will meditate day and night at the same place where Swami Vivekanand did meditation, at the Dhyan… pic.twitter.com/xKqZpnuQbVविज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) May 30, 2024
बता दें कि प्रधानमंत्री चुनाव प्रचार के अंत में आध्यात्मिक यात्राओं के लिए जाने जाते हैं। पांच साल पहले लोकसभा चुनाव 2019 का प्रचार समाप्त होने के बाद पीएम मोदी ने केदारनाथ का दौरा किया था। 2014 में उन्होंने महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़े स्थल प्रतापगढ़ का दौरा किया था। गौरतलब है कि 543 लोकसभा सीटों के लिए चुनाव 19 अप्रैल से शुरू हुए हैं। सात चरणों में हो रहे चुनाव के लिए अंतिम दौर का मतदान एक जून को होना है। मतों की गिनती 4 जून को होगी।
तीन दिवसीय ध्यान साधना के बाद विकसित भारत का सूत्र मिला था
गौरतलब है कि पीएम मोदी ने ध्यान के लिए कन्याकुमारी को चुना इस फैसले के पीछे सांस्कृतिक अहमियत भी है। कन्याकुमारी वही स्थान है जहां दशकों पहले स्वामी विवेकानंद को भारत माता के दर्शन हुए थे। इस चट्टान का स्वामी विवेकानंद के जीवन पर बड़ा प्रभाव था। लोगों का मानना है कि गौतम बुद्ध के जीवन में जैसा महत्व सारनाथ का है, वैसे ही यह चट्टान भी स्वामी विवेकानंद के जीवन में विशिष्ट है। देश भर में घूमने के बाद कन्याकुमारी पहुंचे स्वामी विवेकानंद को यहीं तीन दिवसीय ध्यान साधना के बाद विकसित भारत का सूत्र मिला था। इसी स्थान पर देवी पार्वती ने भगवान शिव की प्रतीक्षा में एक पैर पर खड़े होकर साधना की थी।
राष्ट्रीय एकता का संकेत दे रहे हैं
इस भौगोलिक इलाके का एक महत्व यह भी है कि कन्याकुमारी का यह स्थान भारत का सबसे दक्षिणी छोर है। इसके अलावा इसी स्थान पर भारत की पूर्वी और पश्चिमी तट की रेखाएं मिलती हैं। यह हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर का मिलन बिंदु भी है। जानकारों की राय में कन्याकुमारी जाकर पीएम मोदी राष्ट्रीय एकता का संकेत दे रहे हैं।