PM Modi In Egypt: क्या काहिरा की मस्जिद से भारत में सधेगी सियासत? जानें पीएम मोदी के दौरे से मिला कैसा संदेश
PM Modi In Egypt: सियासी गलियारों में पीएम मोदी के काहिरा की अल हाकिम मस्जिद दौरे को लेकर सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। विदेशी मामलों के जानकार जहां इसको प्रधानमंत्री मोदी से अमेरिका में पूछे गए प्रश्न के बदले इस मस्जिद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक संदेश और उत्तर देने की बात मान रहे हैं। वहीं, देश में बोहरा समुदाय के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी की ओर से मुस्लिमों को एक संदेश देने की कोशिश भी मानी जा रही है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मिस्र के काहिरा में अल हाकिम मस्जिद का दौरा किया। इस दौरे के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काहिरा में दुनिया के अलग-अलग मुल्कों में फैले बोहरा मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों से मुलाकात भी की। जबकि मस्जिद में लोगों से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मस्जिद की तस्वीर समेत कुरान की आयतों से लिखे हुए कुछ उपहार भी दिए गए।
सियासी गलियारों में पीएम मोदी के काहिरा की अल हाकिम मस्जिद दौरे को लेकर सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। विदेशी मामलों के जानकार जहां इसको प्रधानमंत्री मोदी से अमेरिका में पूछे गए प्रश्न के बदले इस मस्जिद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक संदेश और उत्तर देने की बात मान रहे हैं। वहीं, देश में बोहरा समुदाय के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी की ओर से मुस्लिमों को एक संदेश देने की कोशिश भी मानी जा रही है। दरअसल, लोकसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी बोहरा और पसमांदा मुस्लिम समाज के साथ मुसलमानों को सरकारी योजनाओं में मिलने वाले लाभ के साथ अपने साथ जोड़ने की कोशिश में लगी हुई है।
मोदी और मस्जिद का यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदेश...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काहिरा में मस्जिद दौरे के बाद अब चर्चा हो रही है कि क्या इस मस्जिद में जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री से पूछे गए सवाल का यह जवाब है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जवाब तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सवाल के तुरंत बाद ही दे दिया था। लेकिन निश्चित तौर पर दुनिया की सैकड़ों साल पुरानी मस्जिद में जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक संदेश जरूर पहुंचा है।
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक सदानंद माथुर कहते हैं कि यह पहला मौका नहीं है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी मस्जिद में गए हो। इसलिए इसको किसी सियासत से सीधे तौर पर तो बिल्कुल नहीं जोड़ना चाहिए। लेकिन माथुर इस बात को जरूर मानते हैं कि भारत की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिस तरीके से बनाई जा रही है उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मस्जिद में किए गए इस दौरे से उन लोगों को जरूर जवाब मिला होगा जो एक प्रोपेगेंडा के चलते भारत की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूमिल करने की कोशिश करते हैं।
शेख जायद मस्जिद से लेकर चूलिया मस्जिद तक गए मोदी
प्रधानमंत्री के मस्जिद दौरे को लेकर अखिल भारतीय पसमांदा समाज से जुड़े तौकीर अहमद कहते हैं कि पीएम मोदी ने जब जब अरब देशों में या मुस्लिम देशों का दौरा किया तो वहां पर प्रोटोकॉल और अपने निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक मस्जिदों में भी गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2015 में जब संयुक्त अरब अमीरात के दौरे पर गए तो वह शेख जायद मस्जिद भी गए थे। 2018 में प्रधानमंत्री मस्कट की सुल्तान काबूस मस्जिद भी होकर आए थे। इस दौरान पीएम मोदी जॉर्डन और फलस्तीन समेत यूएई के दौरे पर थे। उसी साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब इंडोनेशिया मलेशिया और सिंगापुर की यात्रा पर गए तो वह सिंगापुर की चूलिया मस्जिद भी गए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक इंडोनेशिया के जकार्ता में बनी इस्तिकलाल मस्जिद भी गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदेश तो जाता ही है
दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक और मुस्लिम देशों समेत कई विश्वविद्यालय में विजिटिंग फैकेल्टी प्रोफेसर अब्दुल जहीर कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री के ऐसे दौरे और मस्जिदों में जाना निश्चित तौर पर एक इमेज बिल्डिंग का काम तो करते ही है। वह कहते हैं कि भारत को लेकर खास तौर से अल्पसंख्यकों के मामले में जो छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनाई जा रही है उससे ऐसे दौरे एक संदेश देने का काम करते हैं। वो कहते हैं कि ऐसी विजिट से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को खराब करने का प्रोपेगंडा फैलाने वालों के लिए मस्जिद में जाने वाली प्रधानमंत्री की या की अहमियत को भी समझना बेहद जरूरी है।
राजनीतिक विश्लेषक सत्य नारायण पंत कहते हैं कि पीएम मोदी की काहिरा मस्जिद विजिट समेत दुनिया के अलग-अलग मुस्लिम देशों में की जाने वाली मस्जिद विजिट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनका मानना है कि इंटरनेशनल स्तर पर जिस तरीके की भारत को लेकर साजिशें से की जा रही हैं, उस वक्त इस बात को समझना बेहद जरूरी है कि प्रधानमंत्री मुस्लिम देशों के दौरों में मस्जिदों में भी जाते हैं। वह कहते हैं कि 2018 में सिंगापुर में जब वह चूलिया मस्जिद गए तो उस दौरान वहां के एक प्रसिद्ध मंदिर भी गए थे।
मस्जिद में जाना ही नहीं, बल्कि अपने देश की योजनाएं भी महत्वपूर्ण संदेश देती हैं
विदेशी मामलों के जानकार प्रोफेसर अभिषेक सिंह कहते हैं कि सिर्फ मस्जिदों में जाने से ही भारत में अल्पसंख्यक समुदाय के लिए किए जाने वाले कामों का संदेश नहीं जाता है बल्कि देश में उसके लिए क्या हो रहा है वह भी बहुत मायने रखता है। अभिषेक कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में किए गए एक सवाल के जवाब में कहा कि उनके देश की योजनाएं जाति धर्म देखकर नहीं तय होती है। यही वजह है कि भारत में केंद्र सरकार की योजनाएं जितनी जरूरतमंद हिंदुओं को भी मिल नहीं और जरूरतमंद मुसलमानों को मिल रहीं है।
अभिषेक कहते हैं कि यह बात भी बिल्कुल सच है कि आप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जब उन देशों के ऐतिहासिक इमारतों को देखते हैं तो उस देश की विरासत का पता चलता है। लेकिन काहिरा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जरूर संदेश दिया है। वह कहते हैं दुनिया के अलग-अलग मुल्कों में बोहरा समुदाय के मुस्लिम रहते हैं। इस समुदाय से ताल्लुक रखने वाले मुस्लिम दुनिया के सबसे अमीर मुस्लिमों की श्रेणी में आते हैं। इसलिए यह अलग-अलग तरह से दुनिया भर में भारत को लेकर एक धारणा जरूर बनाते है। जो कि भारत के पक्ष में ही होती है।
काहिरा की मस्जिद से भारत में ऐसे सधेगी सियासत
काहिरा में मस्जिद विजिट के साथ ही बोहरा समुदाय के प्रतिनिधियों से मुलाकात को लेकर देश में होने वाले चुनावों में मुसलमानों को साधने की भी चर्चा तेजी से हो रही है। राजनीतिक विश्लेषक जीशान हैदर अब्बासी कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने बोहरा समुदाय की सबसे पुरानी मस्जिद ने विजिट करके एक बार फिर से इसी समुदाय के माध्यम से देश में सियासी शॉट भी लगाया है। लेकिन उनका कहना है कि देश में बोहरा समुदाय बहुत बड़ी संख्या में नहीं है। और जहां है भी वहां वह इस समुदाय के भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में खड़े होने की बात होती रही है।
जीशान कहते हैं कि गुजरात और महाराष्ट्र में बोहरा समुदाय की संख्या ज्यादा है। आंकड़े बताते हैं कि बुरा समुदाय बाहुल्य क्षेत्रों में भारतीय जनता पार्टी को पहले से वोट मिलता रहा है। इसलिए क़ाहिरा की मस्जिद में जाकर बोहरा समुदाय पर भारतीय जनता पार्टी अपने ने अपनी पकड़ और मजबूत जरूर की है लेकिन इससे पूरा मुस्लिम समुदाय भाजपा के साथ जुड़ेगा इसकी संभावना नहीं है। लेकिन प्रधानमंत्री ने मस्जिद की विजिट के साथ के निश्चित तौर पर आने वाले लोकसभा चुनावों में बोहरा समुदाय और पसमांदा समुदाय के साथ साथ मुसलमानों को को एक बड़ा संदेश तो दिया ही है।