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Nehru Memorial: नेहरू मेमोरियल का नाम बदलने पर विवाद, PMML के अधिकारी ने बताया क्यों लिया गया यह फैसला

Wed, 16 Aug 2023 12:05 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Wed, 16 Aug 2023 12:05 PM IST
सार

प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय के कार्यकारी परिषद के उपाध्यक्ष ए सूर्य प्रकाश ने कहा कि पीएम मोदी को महसूस हुआ कि देश में पीएम का एक संग्रहालय होना चाहिए। फिर सवाल उठा कि यह कहां बनाया जा सकता है। 

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PM Modi felt that we must have a museum of PMs: Vice Chairman Surya Prakash,
A Surya Prakash - फोटो : एएनआई

विस्तार

सोमवार यानी 14 अगस्त को नेहरू मेमोरियल संग्रहालय और पुस्तकालय (NMML) का नाम बदलकर प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय (PMML) करने पर पक्ष-विपक्ष में लगातार हो रहे तीखे वारों के बीच पीएमएमएल के कार्यकारी परिषद के उपाध्यक्ष का बयान आया है। उन्होंने बताया कि किस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को महसूस हुआ कि हमारे पास पीएम का एक संग्रहालय होना चाहिए। 

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पीएम मोदी को यह हुआ महसूस

प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय के कार्यकारी परिषद के उपाध्यक्ष ए सूर्य प्रकाश ने कहा कि पीएम मोदी को महसूस हुआ कि देश में पीएम का एक संग्रहालय होना चाहिए। फिर सवाल उठा कि यह कहां बनाया जा सकता है। इस पर फैसला लिया गया कि नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी सही जगह है। 

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प्रधानमंत्रियों के काम को प्रदर्शित करना

प्रकाश ने कहा कि एनएमएमएल को चुनने का कारण यह है कि हमारे पास 28 एकड़ की संपत्ति है। वह आदर्श स्थान है क्योंकि वहां पहले से ही नेहरू संग्रहालय स्थित है। उन्होंने कहा कि हम सबका एक ही विचार था कि भारत के सभी प्रधानमंत्रियों के काम को प्रदर्शित करना। PMML के कार्यकारी उपाध्यक्ष ने कहा कि मुझे लगता है कि यह बहुत अच्छा विचार था और उन्होंने यह जिम्मेदारी नेहरू मेमोरियल संग्रहालय और पुस्तकालय को दे दी। उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी मिलने पर हम सम्मानित महसूस कर रहे हैं।

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पिछले साल हुआ था प्रधानमंत्री संग्रहालय का उद्घाटन

उन्होंने कहा कि पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री संग्रहालय का उद्घाटन किया, जहां हमने सभी प्रधानमंत्रियों के काम को प्रदर्शित किया है। एक बार जब नेहरू मेमोरियल संग्रहालय और पुस्तकालय का दायरा बदल गया, तो इसमें विविधता आ गई। एक तरह से इसका लोकतंत्रीकरण हो गया। उपाध्यक्ष ए सूर्य प्रकाश ने कहा कि स्वाभाविक रूप से संस्था के नाम में उस नए नाम और जिम्मेदारी को भी दर्शाया जाना चाहिए, जो संस्था के पास है। 

बदलाव की यह है प्रक्रिया

उन्होंने कहा कि नाम बदलने की पहली पहल 15 जून को की गई थी, जब सोसायटी की आम सभा बुलाई गई थी। कानून के तहत अगर हम किसी सोसायटी का नाम बदलना चाहते हैं तो आम सभा को एक साल के अंतराल के बाद दो बार बैठक करनी होती है। इसलिए, 18 जुलाई को इसकी दोबारा बैठक हुई और नाम बदलने की बात दोहराई गई। फिर, यह रजिस्ट्रार ऑफ सोसायटीज के पास गया।

उन्होंने कहा कि यदि आप अब नेहरू मेमोरियल संग्रहालय और पुस्तकालय (एनएमएमएल) में आते हैं, तो आप तीन मूर्ति भवन देखेंगे। साथ ही यह भी देख सकेंगे कि हमने कैसे प्रधानमंत्रियों के 17 वर्षों के कार्यकाल में उनके द्वारा विभिन्न पहलुओं में किए गए अभूतपूर्व कार्यों को प्रदर्शित किया है।  इसमें नेहरू, आधुनिक भारत के उनके मंदिरों, हीराकुंड बांध, नागार्जुन सागर बांध, प्रौद्योगिकी संस्थान स्थापित करने के उनके विचार, योजना को भी देख सकते हैं। 

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