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मोदी मंत्रिमंडल विस्तार की हलचल तेज, पीएम से मिले आंध्र के सीएम जगन और नीतीश से भी हुई बात

Fri, 14 Feb 2020 03:19 AM IST
योगेश साहू हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली।
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Fri, 14 Feb 2020 03:19 AM IST
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PM Modi cabinet expansion intensified, talk with Andhra Pradesh CM Jagan and Nitish to meet PM
नरेंद्र मोदी - फोटो : Twitter

दिल्ली विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद मोदी मंत्रिमंडल के पहले विस्तार की हलचल शुरू हो गई है। बुधवार को आंध्र प्रदेश के सीएम जगनमोहन रेड्डी की पीएम नरेंद्र मोदी से डेढ़ घंटे की मुलाकात को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। इसी क्रम में, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भी मन टटोला गया है। माना जा रहा है कि बजट सत्र के दूसरे चरण से पहले प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल का पहला विस्तार कर सकते हैं।

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विस्तार पर मंथन बजट सत्र से पहले से चल रहा है। दिल्ली चुनाव के नतीजों के बाद गैरकांग्रेस विपक्षी दलों की एकजुटता बढ़ने की संभावना के मद्देनजर हलचल तेज हुई है। सरकार सहयोगियों से तालमेल बैठाने के अलावा राजग के इतर दलों को साधना चाहती है। भाजपा वाईएसआर कांग्रेस को कैबिनेट में शामिल करना चाहती है।
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अगर पार्टी राजी नहीं हुई तो उसे लोकसभा डिप्टी स्पीकर का पद दिया जा सकता है। अगर जगन मंत्री पद पर मान गए तो डिप्टी स्पीकर पद नवीन पटनायक की बीजद को मिल सकता है। इससे भाजपा बीजद के गैरकांग्रेस विपक्षी मोर्चे में शामिल होने से रोकने के साथ राज्यसभा में ताकत बढ़ा सकती है। जगनमोहन ने भाजपा के सामने राज्य विधानपरिषद भंग करने की सिफारिश मानने की बात रखी है।
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सहयोगियों को साधना जरूरी
सरकार गठन के समय मतभेद के कारण जदयू को कैबिनेट में जगह नहीं मिली। अपना दल भी मंत्रिमंडल में नहीं है। इस बीच, सहयोगियों ने राजग की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। रामविलास पासवान अपनी जगह बेटे चिराग को मंत्री बनाना चाहते हैं। बिहार में इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए जदयू को सरकार में शामिल करने के साथ ही लोजपा को साधे रखने की जरूरत है। सहयोगियों से बेहतर संबंध का संदेश देने और यूपी में अभी से तैयारी में जुटने की रणनीति के तहत अपना दल को भी साधना जरूरी है। शिवसेना के राजग से बाहर जाने पर जदयू को ज्यादा भागीदारी देने में समस्या नहीं है। चर्चा यह भी है कि चिराग मंत्री बने तो राजग संयोजक पद पासवान को दिया जा सकता है।

नए सियासी हालात की चुनौती

भाजपा को पता है कि लगातार कमजोर हो रही कांग्रेस की जगह अगर क्षेत्रीय दलों का फ्रंट बना तो बड़ी चुनौती होगी। छह साल से राष्ट्रवाद की चर्चा के बाद दिल्ली के नतीजे से कल्याणकारी राज्य पर बहस शुरू हो गई है। गुजरात मॉडल के बाद दिल्ली मॉडल चर्चा में है। क्षेत्रीय दल साथ आए तो गुजरात बनाम दिल्ली मॉडल पर बहस छिड़ सकती है।

मोदी-जगन की मुलाकात
बुधवार को आंध्रप्रदेश के सीएम की पीएम मोदी से लंबी मुलाकात हुई। सूत्रों का कहना है कि भाजपा वाईएसआर कांग्रेस को राजग में शामिल कर मंत्रिमंडल में भागीदारी देना चाहती है। अगर पार्टी इसके लिए राजी नहीं हुई तो उसे पिछले कार्यकाल में अन्नाद्रमुक की तरह लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद दिया जा सकता है।

जगन यदि राजग में आने पर राजी हुए तो यह पद बीजेडी को दिया जा सकता है। बीजेडी को इस पद के बहाने भाजपा उसे गैरकांग्रेस विपक्ष के मोर्चे में शामिल होने से रोकने के साथ राज्यसभा में अपनी ताकत बढ़ा सकती है। चूंकि जगनमोहन चाहते हैं कि केंद्र राज्य विधानपरिषद को भंग करने की सरकार की सिफारिश मान ले। ऐसे में इस पर बात बनने की संभावना है।

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