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Nitish touches PM Modi feet: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पैर छूने पर क्यों घिरे नीतीश, क्या बोले तेजस्वी?

Mon, 08 Apr 2024 05:27 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Mon, 08 Apr 2024 05:27 PM IST
सार

राष्ट्रीय जनता दल प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने अमर उजाला से कहा कि हम सबकी परंपरा में अपने से बड़ों के पैर छूना अच्छा संस्कार माना जाता है, लेकिन जब दोनों नेता लगभग एक समान उम्र के हैं, और कई मायनों में नीतीश कुमार प्रधानमंत्री से ज्यादा राजनीतिक अनुभव रखते हैं, इसलिए उनका प्रधानमंत्री का पैर छूना सही नहीं है।

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PM Modi Bihar Rally Nitish Kumar Viral Video Tejashwi Yadav attacks Nawada news and updates
नवादा में रैली के दौरान पीएम मोदी और नीतीश कुमार। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

नीतीश कुमार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पैर छूने के कथित वायरल वीडियो को लेकर तेजस्वी यादव ने बिहार सीएम पर निशाना साधा है। राष्ट्रीय जनता दल ने इसे 'शर्मनाक' बताया है। पार्टी ने कहा है कि नीतीश कुमार जैसे अनुभवी नेता का इस तरह प्रधानमंत्री का पैर छूना सही नहीं है। सोशल मीडिया पर भी राजद समर्थकों ने इस पर नीतीश कुमार को खूब ट्रोल किया है। लेकिन इसी के साथ यह चर्चा भी तेज हो गई है कि नीतीश कुमार का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पैर छूना गलत क्यों है? भाजपा ने कहा है कि तेजस्वी यादव के पास संस्कार नहीं हैं। वे न स्वयं किसी का सम्मान करते हैं, न ही कोई उनका सम्मान करता है। यही कारण है कि उन्हें इस संस्कारवान कार्य में भी आपत्ति दिखाई पड़ रही है।      
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क्या है सनातनी परंपरा? 
सामान्य भारतीय सनातनी परिवारों में अपने से बड़े उम्र के लोगों के पैर छूने की परंपरा है। सभी उम्र के लोग अपने माता-पिता, दादा-दादी सहित रिश्तों में सभी बड़े लोगों का पैर छूते हैं। अपने से बड़े भाई-बहन या परिवार के किसी करीबी संबंधी का पैर छूना भी अच्छे संस्कार का प्रतीक माना जाता है। उम्र अधिक होने पर भी बड़े पदों पर आसीन कम उम्र के लोगों का भी उचित अभिवादन करना संस्कारवान कार्य माना जाता है। 
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सनातनी परंपरा में विशेष अवसरों पर बच्चों या कम उम्र के लोगों का पैर छूना भी संस्कारवान कार्य माना जाता है। नवरात्रि व्रत के बाद व्रती लोग कन्याओं की पूजा करते हैं। कन्यादान के समय पिता अधिक उम्र में होने के बाद भी दामाद के पैर छूता है। यह सनातनी परंपरा में स्वीकार्य है। बाल रूप में विराजमान भगवान कृष्ण, राम और सनत कुमारों को प्रणाम करना सबके लिए सही माना गया है।   
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पीएम मोदी, सीएम नीतीश की उम्र लगभग समान है, माना जा रहा है कि तेजस्वी यादव की आपत्ति संभवत: इसी कारण से आई होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन्मतिथि 17 सितंबर 1950 है, जबकि नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 है। यानी दोनों नेताओं की उम्र में छह महीने से भी कम का अंतर है। दोनों नेताओं की उम्र 73 वर्ष के करीब है। शायद यही कारण है कि तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार के द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पैर छूने पर अपनी आपत्ति जताई।

इसके अलावा, नीतीश कुमार कभी प्रधानमंत्री पद की दौड़ में नरेंद्र मोदी के कड़े प्रतिद्वंद्वी माने जाते थे। इस दौड़ में मोदी आगे निकल गए और वे भारत के प्रधानमंत्री बन गए, जबकि नीतीश कुमार बीच के कुछ समय को छोड़कर लगातार बिहार के मुख्यमंत्री बने हुए हैं। लेकिन राजनीतिक अनुभव दोनों नेताओं का लगभग एक समान है। नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में और मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में लंबा राजनीतिक अनुभव रखते हैं। 

तेजस्वी यादव भी छूते हैं नीतीश कुमार के पैर
नीतीश कुमार की राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा कभी राजद तो कभी एनडीए को साथ लेती रही है। यह बाजी कई बार पलट चुकी है। संभवतया यही कारण है कि बिहार में राजनीतिक हमले भी एक सीमा से आगे नहीं जाते। तेजस्वी यादव नीतीश कुमार पर हमलावर होते हैं, लेकिन इसके बाद भी वे मर्यादा को बनाए रखते हैं। वे नीतीश कुमार को चाचा ही नहीं कहते, बल्कि अनेक अवसरों पर उनके पैर छूकर आशीर्वाद भी लेते हैं। 

नीतीश का पैर छूना सही नहीं
राष्ट्रीय जनता दल प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने अमर उजाला से कहा कि हम सबकी परंपरा में अपने से बड़ों के पैर छूना अच्छा संस्कार माना जाता है, लेकिन जब दोनों नेता लगभग एक समान उम्र के हैं, और कई मायनों में नीतीश कुमार प्रधानमंत्री से ज्यादा राजनीतिक अनुभव रखते हैं, इसलिए उनका प्रधानमंत्री का पैर छूना सही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार का मोदी के पैर छूना शिष्टाचार कम और आत्मसमर्पण ज्यादा है। यही कारण है कि नीतीश कुमार के इस कार्य की आलोचना हो रही है। 

राजद अपराधियों की भाषा समझने वाली पार्टी: भाजपा 
भाजपा प्रवक्ता जयराम विप्लव ने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल एक अपराधियों वाली पार्टी है। उनके यहां न कोई संस्कार हैं, और न ही वे सम्मान की भाषा समझते हैं। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव का कोई सम्मान नहीं करता, इसलिए वे स्वयं सम्मान की भाषा समझने में सक्षम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आज जब नीतीश कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर बिहार की सभी 40 सीटों पर एनडीए को जिताने के लिए कटिबद्ध हो चुके हैं, राजद को अपनी जमीन खिसकती दिखाई पड़ रही है, इसलिए वे इस तरह की बेसिर-पैर की बातों से एनडीए का विरोध कर रहे हैं। 


जयराम विप्लव ने कहा कि बिहार संस्कारों की धरती है। यह भारतीय परंपरा के सर्वोत्तम संस्कार ग्रहण करने वाली धरती है। यहां के लोकोपचार लोगों के बीच एक आदर्श की भांति देखे और स्वीकार किये जाते हैं। बिहार की जनता देख रही है कि किस तरह उसकी मर्यादाओं-परंपराओं और संस्कृति को राजद नेताओं के द्वारा लगातार अपमानित किया किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राजद नेता हिंदुओं के आदर्श ग्रंथ रामचरितमानस, महान संत तुलसीदास और उसकी परंपराओं का अपमान कर रहे हैं। यही कारण है कि अब राजद का सफाया होना तय है। उन्होंने कहा कि अब तेजस्वी यादव को इस बात का ज्ञान हो गया है, इसीलिए वे एनडीए पर अनर्गल आरोप मढ़ रहे हैं।
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