नीति आयोग की बैठक: देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए साझा दृष्टिकोण पर PM मोदी का जोर; राज्यों को दी ये सलाह
राजधानी दिल्ली के प्रगति मैदान में हुई नीति आयोग की संचालन परिषद (जीसीएम) की आठवीं बैठक की अध्यक्षता पीएम मोदी ने की। बैठक के बाद नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने बताया कि पीएम ने राज्यों और जिलों से देश की आजादी के 100 साल पूरे होने पर वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए दीर्घकालिक साझा दृष्टिकोण तैयार करने की अपील की।
विस्तार
राजधानी दिल्ली में आज नीति आयोग की 8वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक संपन्न हुई। इसमें देश को 2047 तक विकसित देश बनाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य, कौशल विकास, महिला सशक्तीकरण और बुनियादी ढांचा विकास समेत कई मुद्दों पर चर्चा की हुई। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि जब राज्य बढ़ते हैं, प्रगति करते हैं तो भारत आगे बढ़ता है। साथ ही उन्होंने राज्य सरकारों से वित्तीय मामलों में विवेकपूर्ण निर्णय लेने को कहा ताकि वे वित्तीय रूप से सशक्त बनें और नागरिकों के सपनों को पूरा करने वाले कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से चला सकें। माना जा रहा है कि पीएम का यह बयान कई राज्यों के पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने और मुफ्त योजनाओं के एलान के संदर्भ में है। गौरतलब है कि बैठक के बाद नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने भी इससे संबंधित अहम जानकारी दी।
बैठक में क्या बोले पीएम मोदी
राजधानी दिल्ली के प्रगति मैदान में हुई नीति आयोग की संचालन परिषद (जीसीएम) की आठवीं बैठक की अध्यक्षता पीएम मोदी ने की। बैठक के बाद नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने बताया कि पीएम ने राज्यों और जिलों से देश की आजादी के 100 साल पूरे होने पर वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए दीर्घकालिक साझा दृष्टिकोण तैयार करने की अपील की। पीएम ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्यों और जिलों के दृष्टिकोण को राष्ट्रीय दृष्टि से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने राज्यों और जिलों से इस दिशा में समुचित कदम उठाने को कहा। यह प्रगति मैदान में नवनिर्मित कन्वेंशन सेंटर में पहली औपचारिक बैठक भी थी। भारत यहीं पर इस साल जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। इस बार बैठक की थीम ‘विकासशील भारत’ थी।
इन मुद्दों पर हुई चर्चा
बैठक में 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के उद्देश्य से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, स्वास्थ्य, एमएसएमई, कौशल विकास, महिला सशक्तीकरण, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और पीएम गतिशक्ति समेत कई अहम मसलों पर चर्चा की गई।
चीजें सही करेंगे तो तेजी से विकास संभव
सुब्रह्मण्यम ने कहा कि इस समय भारत के टेक ऑफ मोमेंट में है। हम जनसंख्या के मामले में विश्व के सबसे बड़े देश हैं। कुछ साल में दुनिया के कामकाजी आयुवर्ग के 20 फीसदी लोग भारत में होंगे। अगर अभी (अगले 25 साल तक) चीजें सही की गई तो भारत निरंतरता के साथ लंबी अवधि तक तेज गति से विकास कर सकता है।
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम
उन्होंने कहा कि डिजिटाइजेशन देश में उच्चस्तर पर है। हमारे पास विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है। हम सड़क, बिजली, पानी जैसे आधारभूत जरूरतों को पूरा करने के बाद विकास की ओर अग्रसर हैं।
नीति निर्माण में मुख्यमंत्रियों की मांगों का रखा जाएगा ध्यान
सुब्रह्मण्यम ने कहा कि बैठक में 11 राज्यों के मुख्यमंत्री नहीं आए। पहले भी ऐसा देखा गया है लेकिन कई मुख्यमंत्रियों के लिखित बयान हमारे पास हैं। इन सबको संज्ञान में लेकर ही नीति तैयार की जाएगी।
तीन विपक्षी सीएम हुए शामिल
इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत कई अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने शिरकत की। विपक्ष शासित राज्यों की ओर से छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल, झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू बैठक में शामिल हुए।
इन्होंने बैठक से बनाई दूरी
बैठक में शामिल नहीं होने वाले मुख्यमंत्रियों में दिल्ली के अरविंद केजरीवाल, पंजाब के भगवंत मान, बिहार के नीतीश कुमार, पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी, राजस्थान के अशोक गहलोत, तेलंगाना के चंद्रशेखर राव, ओडिशा के नवीन पटनायक, तमिलनाडु के एमके स्टालिन, केरल के पी. विजयन और कर्नाटक के सिद्धरमैया शामिल हैं।
मोदी विरोध में किस हद तक जाएंगे : भाजपा
भाजपा ने नीति आयोग की बैठक का बहिष्कार करने वाले मुख्यमंत्रियों के फैसले को जनविरोधी और गैर जिम्मेदाराना करार दिया। भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि क्या लोगों को फायदा नहीं मिलना चाहिए। पीएम नरेंद्र मोदी के विरोध में विपक्ष किस हद तक जाएगा। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी का विरोध करने के लिए और कई मौके मिलेंगे लेकिन आप अपने राज्य के लोगों का नुकसान क्यों कर रहे हैं।