{"_id":"5c722dffbdec227395218614","slug":"pm-modi-address-nation-through-mann-ki-baat-and-gave-tribute-to-pulwama-terror-attack-personnels","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"चुनाव से पहले आखिरी 'मन की बात' में पीएम मोदी ने किया 2019 जीतने का दावा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
चुनाव से पहले आखिरी 'मन की बात' में पीएम मोदी ने किया 2019 जीतने का दावा
Sun, 24 Feb 2019 11:09 AM IST
Prabudhh Jain
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Prabudhh Jain
Updated Sun, 24 Feb 2019 11:09 AM IST
विज्ञापन
मन की बात में पीएम मोदी
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 53वीं बार मन की बात की। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए पीएम मोदी ने पुलवामा में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि आज मेरा मन भरा हुआ है लेकिन कार्यक्रम के आखिरी में पीएम ने 2019 लोकसभा चुनाव जीतने का दावा करते हुए कहा कि आप लोगों से सालों साल ऐसे ही बात करता रहूंगा।
पीएम ने कहा, मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार। मन की बात शुरू करते हुए आज मन भरा हुआ है। 10 दिन पूर्व, भारत-माता ने अपने वीर सपूतों को खो दिया। पुलवामा के आतंकी हमले में, वीर जवानों की शहादत के बाद देश-भर में लोगों को और लोगों के मन में, आघात और आक्रोश है भारत-माता की रक्षा में, अपने प्राण न्योछावर करने वाले, देश के सभी वीर सपूतों को, मैं नमन करता हूं। यह शहादत, आतंक को समूल नष्ट करने के लिए हमें निरन्तर प्रेरित करेगी, हमारे संकल्प को और मजबूत करेगी। हमारे सशस्त्र बल हमेशा ही अद्वितीय साहस और पराक्रम का परिचय देते आये हैं। शांति की स्थापना के लिए जहां उन्होंने अद्भुत क्षमता दिखायी है वहीँ हमलावरों को भी उन्हीं की भाषा में जबाव देने का काम किया है।'
वीर सैनिकों की शहादत के बाद, मीडिया के माध्यम से उनके परिजनों की जो प्रेरणादायी बातें सामने आयी हैं उसने पूरे देश के हौंसले को और बल दिया है। शहीदों के हर परिवार की कहानी, प्रेरणा से भरी हुई हैं । मैं युवा-पीढ़ी से अनुरोध करूंगा कि वो, इन परिवारों ने जो जज्बा दिखाया है, जो भावना दिखायी है उसको जानें, समझने का प्रयास करें। आजादी के इतने लंबे समय तक, हम सबको, जिस वार मेमोरियल का इंतजार था। मैंने निश्चय किया कि देश में, एक ऐसा स्मारक अवश्य होना चाहिए।
विज्ञापन
वार मेमोरियल को लेकर पीएम ने कहा कि मुझे विश्वास है ये देशवासियों के लिए राष्ट्रीय सैनिक स्मारक जाना किसी तीर्थ स्थल जाने के समान होगा। राष्ट्रीय सैनिक स्मारक स्वतंत्रता के बाद सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता का प्रतीक है। राष्ट्रीय सैनिक स्मारक का डिजाईन, हमारे अमर सैनिकों के अदम्य साहस को प्रदर्शित करता है। राष्ट्रीय सैनिक स्मारक का कांसेप्ट, फोर कंसेंट्रिक सर्कल्स यानी चार चक्रों पर केंद्रित है- अमर चक्र, वीरता चक्र, त्याग चक्र, रक्षक चक्र।
मन की बात के लिए आपके हजारों पत्र और कमेंट, मुझे पढ़ने को मिलते हैं। इस बार आतिश मुखोपाध्याय ने लिखा, वर्ष 1900 में 3 मार्च को, अंग्रेजों ने बिरसा मुंडा को गिरफ्तार किया था ये संयोग ही है कि 3 मार्च को ही जमशेदजी टाटा की जयंती भी है। मन की बात में ‘बिरसा मुंडा’ और ‘जमशेदजी टाटा’ को श्रद्धांजलि देने का एक प्रकार से झारखंड के गौरवशाली इतिहास और विरासत को नमन करने जैसा है।
भगवान ‘बिरसा मुंडा’ ने अंग्रेजों से ना केवल राजनीतिक आज़ादी के लिए संघर्ष किया बल्कि आदिवासियों के सामाजिक और आर्थिक अधिकारों के लिए भी लड़ाई लड़ी। जमशेदजी टाटा ने देश को बड़े-बड़े संस्थान दिए हैं। वे जानते थे कि भारत को विज्ञान, तकनीक, उद्यम का हब बनाना भविष्य के लिए आवश्यक है। ये उनका ही विजन था जिससे टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस की स्थापना हुई टाटा स्टील जैसे कई विश्वस्तरीय संस्थान, उद्योगों की स्थापना हुआ। हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री #मोरारजीदेसाई का जन्म 29 फरवरी को हुआ था। सहज, शांतिपूर्ण व्यक्तित्व के धनी, मोरारजी भाई देश के सबसे अनुशासित नेताओं में से थे।
पद्म पुरस्कार को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि हर साल की तरह इस बार भी पद्म पुरस्कार को लेकर लोगों में बड़ी उत्सुकता थी आज हम एक नए इंडिया की ओर अग्रसर हैं। इसमें हम उन लोगों का सम्मान करना चाहते हैं जो जमीनी स्तर पर अपना काम निष्काम भाव से कर रहे हैं।
विज्ञापन
पीएम ने कहा, मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार। मन की बात शुरू करते हुए आज मन भरा हुआ है। 10 दिन पूर्व, भारत-माता ने अपने वीर सपूतों को खो दिया। पुलवामा के आतंकी हमले में, वीर जवानों की शहादत के बाद देश-भर में लोगों को और लोगों के मन में, आघात और आक्रोश है भारत-माता की रक्षा में, अपने प्राण न्योछावर करने वाले, देश के सभी वीर सपूतों को, मैं नमन करता हूं। यह शहादत, आतंक को समूल नष्ट करने के लिए हमें निरन्तर प्रेरित करेगी, हमारे संकल्प को और मजबूत करेगी। हमारे सशस्त्र बल हमेशा ही अद्वितीय साहस और पराक्रम का परिचय देते आये हैं। शांति की स्थापना के लिए जहां उन्होंने अद्भुत क्षमता दिखायी है वहीँ हमलावरों को भी उन्हीं की भाषा में जबाव देने का काम किया है।'
विज्ञापन
वीर सैनिकों की शहादत के बाद, मीडिया के माध्यम से उनके परिजनों की जो प्रेरणादायी बातें सामने आयी हैं उसने पूरे देश के हौंसले को और बल दिया है। शहीदों के हर परिवार की कहानी, प्रेरणा से भरी हुई हैं । मैं युवा-पीढ़ी से अनुरोध करूंगा कि वो, इन परिवारों ने जो जज्बा दिखाया है, जो भावना दिखायी है उसको जानें, समझने का प्रयास करें। आजादी के इतने लंबे समय तक, हम सबको, जिस वार मेमोरियल का इंतजार था। मैंने निश्चय किया कि देश में, एक ऐसा स्मारक अवश्य होना चाहिए।
विज्ञापन
वार मेमोरियल को लेकर पीएम ने कहा कि मुझे विश्वास है ये देशवासियों के लिए राष्ट्रीय सैनिक स्मारक जाना किसी तीर्थ स्थल जाने के समान होगा। राष्ट्रीय सैनिक स्मारक स्वतंत्रता के बाद सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता का प्रतीक है। राष्ट्रीय सैनिक स्मारक का डिजाईन, हमारे अमर सैनिकों के अदम्य साहस को प्रदर्शित करता है। राष्ट्रीय सैनिक स्मारक का कांसेप्ट, फोर कंसेंट्रिक सर्कल्स यानी चार चक्रों पर केंद्रित है- अमर चक्र, वीरता चक्र, त्याग चक्र, रक्षक चक्र।
मन की बात के लिए आपके हजारों पत्र और कमेंट, मुझे पढ़ने को मिलते हैं। इस बार आतिश मुखोपाध्याय ने लिखा, वर्ष 1900 में 3 मार्च को, अंग्रेजों ने बिरसा मुंडा को गिरफ्तार किया था ये संयोग ही है कि 3 मार्च को ही जमशेदजी टाटा की जयंती भी है। मन की बात में ‘बिरसा मुंडा’ और ‘जमशेदजी टाटा’ को श्रद्धांजलि देने का एक प्रकार से झारखंड के गौरवशाली इतिहास और विरासत को नमन करने जैसा है।
भगवान ‘बिरसा मुंडा’ ने अंग्रेजों से ना केवल राजनीतिक आज़ादी के लिए संघर्ष किया बल्कि आदिवासियों के सामाजिक और आर्थिक अधिकारों के लिए भी लड़ाई लड़ी। जमशेदजी टाटा ने देश को बड़े-बड़े संस्थान दिए हैं। वे जानते थे कि भारत को विज्ञान, तकनीक, उद्यम का हब बनाना भविष्य के लिए आवश्यक है। ये उनका ही विजन था जिससे टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस की स्थापना हुई टाटा स्टील जैसे कई विश्वस्तरीय संस्थान, उद्योगों की स्थापना हुआ। हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री #मोरारजीदेसाई का जन्म 29 फरवरी को हुआ था। सहज, शांतिपूर्ण व्यक्तित्व के धनी, मोरारजी भाई देश के सबसे अनुशासित नेताओं में से थे।
पद्म पुरस्कार को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि हर साल की तरह इस बार भी पद्म पुरस्कार को लेकर लोगों में बड़ी उत्सुकता थी आज हम एक नए इंडिया की ओर अग्रसर हैं। इसमें हम उन लोगों का सम्मान करना चाहते हैं जो जमीनी स्तर पर अपना काम निष्काम भाव से कर रहे हैं।
पद्म पुरस्कार पाने वाले ये हैं- दैतारी नायक, अब्दुल गफूर खत्री, मदुरै चिन्ना पिल्लई, ताओ पोर्चन-लिंच, जमुना टुडू (‘लेडी टार्जन’), मुक्ताबेन पंकज कुमार दगली, चक्षु महिला सेवाकुन्ज, राजकुमारी देवी (किसान चाची)। इस वर्ष जो पद्म पुरस्कार दिए गए उसमें 12 किसानों को पद्म पुरस्कार मिले हैं। आमतौर पर कृषि जगत से जुड़े हुए कम लोग और प्रत्यक्ष किसानी करने वाले बहुत ही कम लोग पद्मश्री की सूची में आये हैं। ये अपने आप में, ये बदलते हुए हिंदुस्तान की जीती-जागती तस्वीर है।
मैं आज आप सब के साथ एक ऐसे दिल को छूने वाले अनुभव के बारे में बात करना चाहता हूं। आजकल देश में जहां भी जा रहा हूं, मेरा प्रयास रहता है कि ‘आयुष्मान भारत’ की योजना के कुछ लाभार्थियों से मिलूं। पिछले 5 महीनों में लगभग 12 लाख गरीब परिवार इस योजना का लाभ उठा चुके हैं। आप यदि किसी भी ऐसे ग़रीब व्यक्ति को जानते है जो पैसों के अभाव में इलाज नहीं करा पा रहा हो, तो उसे आयुष्मान भारत योजना के बारे में अवश्य बताइये। यह योजना हर ऐसे ग़रीब व्यक्ति के लिए ही है।
मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से आप सब से जुड़ना मेरे लिए एक अनोखा अनुभव रहा है। रेडियो के माध्यम से मैं एक तरह से करोड़ों परिवारों से हर महीने रूबरू होता हूं। कई बार तो आप सब से बात करते, आपकी चिठ्ठियां पढ़ते या आपके फोन पर भेजे गए विचार सुनते मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि आपने मुझे अपने परिवार का ही हिस्सा मान लिया है। यह मेरे लिए एक बहुत ही सुखद अनुभूति रही है।
दोस्तों, चुनाव लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव होता है। अगले दो महीने, हम सभी चुनाव की गहमा-गहमी में व्यस्त होगें। मैं स्वयं भी इस चुनाव में एक प्रत्याशी रहूंगा। स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा का सम्मान करते हुए अगली मन की बात मई महीने के आखरी रविवार को होगी। मैं लोकसभा चुनाव 2019 के बाद एक नए विश्वास के साथ आपके आशीर्वाद की ताकत के साथ फिर एक बार मन की बात के माध्यम से हमारी बातचीत के सिलसिले का आरम्भ करूंगा और सालों तक आपसे मन की बात करता रहूंगा। फिर एक बार आप सबका हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं।
मैं आज आप सब के साथ एक ऐसे दिल को छूने वाले अनुभव के बारे में बात करना चाहता हूं। आजकल देश में जहां भी जा रहा हूं, मेरा प्रयास रहता है कि ‘आयुष्मान भारत’ की योजना के कुछ लाभार्थियों से मिलूं। पिछले 5 महीनों में लगभग 12 लाख गरीब परिवार इस योजना का लाभ उठा चुके हैं। आप यदि किसी भी ऐसे ग़रीब व्यक्ति को जानते है जो पैसों के अभाव में इलाज नहीं करा पा रहा हो, तो उसे आयुष्मान भारत योजना के बारे में अवश्य बताइये। यह योजना हर ऐसे ग़रीब व्यक्ति के लिए ही है।
मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से आप सब से जुड़ना मेरे लिए एक अनोखा अनुभव रहा है। रेडियो के माध्यम से मैं एक तरह से करोड़ों परिवारों से हर महीने रूबरू होता हूं। कई बार तो आप सब से बात करते, आपकी चिठ्ठियां पढ़ते या आपके फोन पर भेजे गए विचार सुनते मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि आपने मुझे अपने परिवार का ही हिस्सा मान लिया है। यह मेरे लिए एक बहुत ही सुखद अनुभूति रही है।
दोस्तों, चुनाव लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव होता है। अगले दो महीने, हम सभी चुनाव की गहमा-गहमी में व्यस्त होगें। मैं स्वयं भी इस चुनाव में एक प्रत्याशी रहूंगा। स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा का सम्मान करते हुए अगली मन की बात मई महीने के आखरी रविवार को होगी। मैं लोकसभा चुनाव 2019 के बाद एक नए विश्वास के साथ आपके आशीर्वाद की ताकत के साथ फिर एक बार मन की बात के माध्यम से हमारी बातचीत के सिलसिले का आरम्भ करूंगा और सालों तक आपसे मन की बात करता रहूंगा। फिर एक बार आप सबका हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं।