देश में आतंक के लिए हो रहा सेना के सामान का प्रयोग, खुले बाजार में बिक्री पर लगे रोक
देशभर में बढ़ते आतंकवाद के ध्यानार्थ सेना की वर्दी व अन्य सामान की खुले बाजार में बिक्री पर रोक लगाने के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में तर्क रखा गया है कि देश की सुरक्षा को ताक पर रखते हुए निजी कंपनियां सेना की वर्दी व अन्य पोशाक आदि बना रहीं हैं।
याची एनजीओं ने याचिका में कहा कि नियमों को ताक पर रखते हुए बाजारों में सेना की वर्दी, टोपी, जूते, युद्ध का सामान जैसे बैक पैक, स्लीपिंग बैग, आदि बेचा जा रहा है।
यह देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। ऐसे में बिना अनुमति के निजी लोगों द्वारा सेना की पोशाक बनाने व बेचने पर रोक लगाई जाए।
'पठानकोट के हमलावरों ने खुले बाजार से खरीदी थी वर्दी'
याची ने दावा किया कि गत जनवरी में पठानकोट एयरफोर्स बेस में हमला करने वाले आतंकियों ने सेना की वर्दी ऐसे ही किसी बाजार से खरीदी थी। पठानकोट रेलवे मार्केट में सेना की पोशाकें व अन्य सामान खुले आम बिकता है।
याची के अनुसार पंजाब के लुधियाना व अमृतसर में सेना के परिधान बनाने वाली इस तरह की कई फैक्ट्रियां हैं। जहां से पंजाब समेत अन्य राज्यों में इसकी सप्लाई होती है। याचिका में तर्क रखा गया है कि भारतीय सेना द्वारा 8 जनवरी को जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार कोई असैनिक, निजी दुकानदार युद्ध का सामान नहीं बेच सकता।
याची ने अदालत से आग्रह किया की वह रक्षा मंत्रालय को निर्देश दे कि निजी कंपनियों व दुकानदारों पर अवैध रूप से युद्ध का सामान, सेना की वर्दी, जूते आदि सामान बनाने व बेचने वालों पर ठोस कार्रवाई करें।