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अयोध्या मामले में लाइव स्ट्रीमिंग: सुप्रीम कोर्ट बोला- इसके लिए विचार विमर्श और निर्णय की जरूरत
Mon, 05 Aug 2019 11:14 AM IST
शिल्पा ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिल्पा ठाकुर
Updated Mon, 05 Aug 2019 11:14 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
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सुप्रीम कोर्ट से अयोध्या मामले की कार्यवाही के दौरान लाइव स्ट्रीमिंग की मांग करने वाली याचिका पर जस्टिस बोबड़े का कहना है कि इसके लिए विचार विमर्श और संस्थागत निर्णय की जरूरत होगी।
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Plea in Supreme Court seeking live streaming of the proceedings in Ayodhya case: Justice Bobde says, "live streaming or recording will require deliberation and institutional decision making." pic.twitter.com/NRSdXG4j72
— ANI (@ANI) August 5, 2019विज्ञापन
बता दें पूर्व आरएसएस विचारक केएन गोविंदाचार्य ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर छह अगस्त से शुरू होने वाले अयोध्या मामले की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग करने की गुहार लगाई थी। गोविंदाचार्य का कहना है कि यह करोड़ों लोगों के हितों से जुड़ा मामला है, जो इस मामले में जल्द से जल्द न्याय मिलने की आस लगाए हुए हैं।
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मालूम हो कि अयोध्या विवाद में मध्यस्थता प्रक्रिया बेनतीजा रहने पर शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने छह अगस्त से इस मामले की नियमित सुनवाई करने का निर्णय लिया है।
गोविंदाचार्य ने अपनी याचिका में कहा है कि भारत डिटिजल दुनिया में सुपर पावर बन चुका है, लिहाजा अयोध्या मामले की लाइव स्ट्रीमिंग करने की व्यवस्था की जानी चाहिए। अयोध्या मामला राष्ट्रीय महत्व का है। साथ ही जानने के हक को मौलिक अधिकार के दायरे में रखा गया है और न्याय तक पहुंच भी नागरिकों का अधिकार है। ऐसे में अयोध्या मामले की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग की जानी चाहिए।
गोविंदाचार्य ने सितंबर, 2018 के सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का हवाला दिया है जिसमें लाइव स्ट्रीमिंग की शुरुआत करने की बात कही गई थी। लाइव स्ट्रीमिंग होने से जो लोग अदालत के निर्णय से प्रभावित होते हैं वे यह समझ सकेंगे कि न्यायिक आदेश किस तरह से दिए जाते हैं।
76 वर्षीय गोविंदाचार्य ने अपनी याचिका में कहा है कि भगवान राम के भक्तों को यह जानने में दिलचस्पी है कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कोई व्यक्ति भगवान राम का प्रतिनिधित्व कैसे करेगा। गोविंदाचार्य ने कहा कि उनकी तरह करोड़ों लोग इस सुनवाई के गवाह बनना चाहते हैं लेकिन मौजूदा व्यवस्था के तहत ऐसा संभव नहीं है। ऐसे में सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग जरूरी है।