{"_id":"63e666f402f745f356014842","slug":"plea-in-kerala-hc-seeking-to-declare-circumcision-on-children-as-non-bailable-offence-2023-02-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kerala HC: बच्चों के खतने को गैर-जमानती बनाने की मांग को लेकर याचिका दायर, केंद्र को निर्देश देने का आग्रह","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Kerala HC: बच्चों के खतने को गैर-जमानती बनाने की मांग को लेकर याचिका दायर, केंद्र को निर्देश देने का आग्रह
Fri, 10 Feb 2023 09:17 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 10 Feb 2023 09:17 PM IST
सार
याचिका नॉन रिलिजियस नामक एक संगठन की ओर से दायर की गई है। इसमें लड़कों के खतना प्रथा पर रोक लगाने के लिए कानून बनाने पर विचार करने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है।
विज्ञापन
high court of kerala
विस्तार
बच्चों के खतने की प्रथा को अवैध और गैर-जमानती अपराध घोषित करने की मांग को लेकर केरल हाईकोर्ट में शुक्रवार को एक याचिका दायर की गई।
विज्ञापन
यह याचिका नॉन रिलिजियस नामक एक संगठन की ओर से दायर की गई है। इसमें लड़कों के खतना प्रथा पर रोक लगाने के लिए कानून बनाने पर विचार करने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है। इसमें आरोप लगाया है कि खतना की प्रथा बच्चों के मानवाधिकारों का उल्लंघन है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि खतने से आघात सहित कई स्वास्थ्य समस्याएं होने का खतरा होता है। साथ ही अन्य जोखिम भी होते हैं।
विज्ञापन
याचिका में कहा गया है कि बाल अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र संधि, 1989 और संयुक्त राष्ट्र की महासभा द्वारा अपनाया गया नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय अनुबंध, जिसका भारत एक सदस्य और हस्ताक्षरकर्ता है, इसके प्रावधानों के आधार पर इस बात पर जोर देता है कि सभी बच्चों को एक प्यार भरे वातावरण, किसी भी प्रकार के नुकसान, हमलों, दुर्व्यवहार और भेदभाव से मुक्त सुरक्षित स्थान पर रहने का अधिकार है।
विज्ञापन
याचिका में कहा गया है कि बच्चों पर खतना की प्रथा एक मजबूरी है, न कि उनकी पसंद है। उन्हें केवल उनके माता-पिता द्वारा लिए गए एकतरफा निर्णय के कारण पालन करने के लिए मजबूर किया जाता है, जिसमें बच्चे के पास कोई विकल्प नहीं होते हैं। याचिका में कहा गया है कि यह अंतरराष्ट्रीय संधियों के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि खतना की प्रथा के कारण शिशुओं की मौत की कई घटनाएं हुई हैं। इस प्रथा का अभ्यास क्रूर, अमानवीय और बर्बर है और यह भारत के संविधान के अनुच्छे 21 के तहत बच्चों के मूल्यवान मौलिक अधिकार, जीवन के अधिकार उल्लंघन करता है।