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टैरिफ घटा, कृषि और डेयरी क्षेत्र में समझौता नहीं: पीयूष गोयल ने बताई भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की रूपरेखा

Sat, 07 Feb 2026 06:35 AM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Sat, 07 Feb 2026 06:35 AM IST
सार

भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा जारी कर बड़ी टैरिफ कटौती और बाजार खोलने का रास्ता साफ किया है। पीयूष गोयल के अनुसार इससे भारतीय निर्यातकों को 30 ट्रिलियन डॉलर बाजार मिलेगा। आइए विस्तार से और आसान में समझते हैं कि व्यापार समझौते की रूपरेखा में क्या-क्या है।

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Piyush Goyal statement on framework of India US trade agreement says about  agriculture dairy sectors
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की रूपरेखा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा जारी कर दी गई है। इसे दोनों देशों के बीच व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। केंद्र सरकार के अनुसार इस फ्रेमवर्क से भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ा अमेरिकी बाजार खुलेगा, जबकि संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्रों की पूरी सुरक्षा रखी गई है। समझौते के तहत टैरिफ में बड़ी कटौती और बाजार पहुंच बढ़ाने पर सहमति बनी है।

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कृषि और डेयरी सेक्टर को कैसे मिली सुरक्षा?
पीयूष गोयल ने साफ कहा कि समझौते में भारत ने अपने संवेदनशील कृषि और डेयरी उत्पादों को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, चीज, एथेनॉल, तंबाकू, कुछ सब्जियां और मांस उत्पादों को संरक्षण दिया गया है। सरकार का कहना है कि इससे किसानों और ग्रामीण आजीविका पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। व्यापार खोलने के साथ घरेलू हितों की रक्षा को प्राथमिकता दी गई है।
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क्या है अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा?
संयुक्त बयान के अनुसार भारत और अमेरिका अंतरिम समझौते के लिए तय ढांचे को तुरंत लागू करेंगे और इसे अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे। व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह फ्रेमवर्क दोनों देशों की व्यापक द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के प्रति प्रतिबद्धता दोहराता है। यह पहल अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई व्यापार वार्ताओं का अगला चरण है। समझौते का लक्ष्य संतुलित और पारस्परिक लाभ वाला व्यापार तंत्र बनाना है।
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किसे होगा सबसे ज्यादा फायदा?
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर का बाजार खोलेगा। खास लाभ एमएसएमई, किसानों और मछुआरों को होगा। उन्होंने कहा कि निर्यात बढ़ने से लाखों नई नौकरियां पैदा होंगी, जिनमें महिलाओं और युवाओं को बड़ा अवसर मिलेगा। सरकार का कहना है कि यह समझौता मेक इन इंडिया अभियान और निर्यात प्रतिस्पर्धा को मजबूत करेगा।

किन सेक्टरों में टैरिफ घटेगा और कहां शून्य होगा?

  • अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत ड्यूटी आज से हटाएगा।
  • भारतीय उत्पादों पर पारस्परिक टैरिफ दर घटाकर 18 प्रतिशत की जाएगी।
  • टेक्सटाइल, परिधान, लेदर, फुटवियर, प्लास्टिक, रबर, ऑर्गेनिक केमिकल, होम डेकोर, आर्टिजन उत्पाद और कुछ मशीनरी को बड़ा लाभ मिलेगा।
  • जेनेरिक दवाओं, रत्न-हीरा और एयरक्राफ्ट पार्ट्स पर टैरिफ शून्य करने की बात कही गई है।
  • ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ रेट कोटा मिलेगा।
  • एयरक्राफ्ट पार्ट्स पर छूट दी जाएगी।


भारत ने बदले में क्या प्रतिबद्धताएं दीं?
अमेरिकी कार्यकारी आदेश के अनुसार भारत ने सीधे रूप से रूसी तेल का आयात रोकने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके बाद भारतीय सामान पर लगाई गई अतिरिक्त 25 प्रतिशत ड्यूटी हटाने का फैसला लिया गया। आदेश में कहा गया कि अगर भारत फिर रूसी तेल आयात शुरू करता है तो अमेरिका दोबारा अतिरिक्त ड्यूटी लगाने पर विचार कर सकता है। साथ ही दोनों देशों ने अगले 10 वर्षों के लिए रक्षा सहयोग बढ़ाने के फ्रेमवर्क पर भी सहमति जताई है।



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भारत क्या खरीदेगा अमेरिका से?
संयुक्त बयान में कहा गया कि भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदेगा। इसमें ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातु, टेक्नोलॉजी उत्पाद और कोकिंग कोल शामिल हैं। दोनों देश डेटा सेंटर में उपयोग होने वाले ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट और अन्य टेक उत्पादों के व्यापार को भी बढ़ाएंगे। डिजिटल व्यापार में बाधाएं घटाने और स्पष्ट नियम बनाने पर भी सहमति बनी है।

संयुक्त बयान में इस अंतरिम समझौते को दोनों देशों की साझेदारी का ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया गया है। इसमें अतिरिक्त बाजार पहुंच, मजबूत सप्लाई चेन और संतुलित व्यापार नियमों की दिशा तय की गई है। लक्ष्य है कि अंतरिम समझौते के बाद व्यापक व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया जाए। सरकार का मानना है कि इससे निर्यात, निवेश, तकनीक और रक्षा सहयोग में नई तेजी आएगी।


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