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पीयूष गोयल: रेलवे के आधारभूत ढांचे का निजीकरण नहीं होगा, संसाधन के लिए परिसंपत्तियों का मौद्रीकरण की योजना 

Sat, 20 Mar 2021 04:36 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Sat, 20 Mar 2021 04:36 AM IST
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Piyush Goyal said: Railway infrastructure will not be privatized, plans to monetize assets to raise resources
रेल मंत्री पीयूष गोयल - फोटो : ANI

रेलमंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को राज्यसभा में बताया कि रेलवे के आधारभूत ढांचे का कभी भी निजीकरण नहीं किया जाएगा। हालांकि उसकी योजना विकास को गति देने के लिए संसाधन जुटाने के लिए परिसंपत्तियों का मौद्रीकरण करने की है। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक निजी साझेदारी (पीपीपी) के जरिए शुरू किए यात्री ट्रेन परिचालन से करीब 30,000 करोड़ रुपये के कुल निवेश का लक्ष्य रखा गया है।

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प्रश्नकाल में पूरक सवालों के जवाब में गोयल ने बताया कि रेलवे ने अपनी परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण की योजना बनाई है जिसमें चालू होने के बाद पूर्वी और पश्चिमी माल ढुलाई गलियारा, पीपीपी के तहत स्टेशनों का पुनर्विकास, रेलवे कॉलोनी, हिल रेलवे और स्टेडियम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण से आधारभूत ढांचा के निर्माण के लिए अधिक संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी।
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उन्होंने साफ किया कि संपत्तियों के मौद्रीकरण का अर्थ उनका निजीकरण नहीं है बल्कि दोनों में अंतर है। उन्होंने बताया कि निजीकरण की स्थिति में संबंधित संपत्ति का स्वामित्व सरकार के पास नहीं रहता लेकिन मौद्रीकरण के बाद भी संपत्ति का स्वामित्व रेलवे के पास ही रहेगा।
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उन्होंने गुलबर्गा में रेलवे जोन स्थापित किए जाने की मांग पर बताया कि अध्ययन में इसे व्यवहार्य नहीं पाया गया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में व्यवहार्यता के अलावा आने वाले खर्च को भी ध्यान में रखा जाता है। इस पर नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि गुलबर्गा डिविजन बनाए जाने की घोषणा अध्ययन के बाद की गई थी और इसके लिए जमीन भी दी गई थी।

निजी निवेश से रोजगार के अवसर नहीं घटेंगे
रेलमंत्री ने निजी निवेश होने पर रोजगार के अवसर घटने संबंधी आशंकाओं को खारिज किया और कहा कि निजी ट्रेनों में भी कर्मचारियों और विभिन्न सेवाएं मुहैया कराने वाले कर्मियों की जरूरत होगी। उन्होंने बताया कि रेलवे अपने नेटवर्क का अधिकतम उपयोग चाहता है। इससे यात्रियों को अच्छी और आधुनिक सुविधाएं मिल सकेंगी वहीं विभाग की आय में भी वृद्धि होगी।

पिछली सरकारों से अधिक आवंटन
उन्होंने बताया कि इस साल के बजट में रेलवे के लिए 2.15 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया जो पिछली सरकारों की तुलना में खासी बड़ी रकम है लेकिन सुविधाएं जुटाने के लिए यह पर्याप्त नहीं है और उसके लिए शायद 50 लाख करोड़ रुपये भी कम पड़ जाएंगे।

यूपी सरकार की प्रतिक्रिया बेहतर
उन्होंने बताया कि यात्री ट्रेनों के लिए सात समर्पित रूट की दिशा में सरकार काम कर रही है ताकि सेमी-हाई स्पीड ट्रेनों का संचालन हो सके। इस संबंध में विभिन्न सरकारों से उनके सहयोग के बारे में चर्चा की जा रही है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार की अच्छी प्रतिक्रिया रही है और वह दिल्ली-वाराणसी मार्ग को लेकर सहयोग कर रही है। प्रस्ताव के तहत इस मार्ग का अधिकतर हिस्सा राजमार्गों पर ‘एलिवेटेड’ होगा।

सीएसटी स्टेशन रेलवे की शान, उसकी बनावट में कोई बदलाव नहीं आएगा
रेलमंत्री ने बताया कि मुंबई का छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसटी) स्टेशन रेलवे की शान है और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत उसके विकास के बाद भी उसकी बनावट, ढांचा या सुंदरता को कोई बदलाव नहीं आएगा। उन्होंने बताया कि यात्रियों के लिए सुविधाएं बढ़ाने के लिए सीएसटी स्टेशन का पुनर्विकास किया जा रहा है लेकिन उसके विरासत वाले हिस्से में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि अभी हाल ही में हबीबगंज स्टेशन को विकसित किया गया है जहां एक निजी कंपनी ने पीपीपी साझेदारी में 100 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इससे यात्रियों के लिए सुविधाएं बढ़ेंगी और निवेशक की राशि 30 वर्षों में लौटेगी।

रेल मंत्रालय पीपीपी के जरिए रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास के लिए प्रयासरत है। उन्होंने गोमती नगर स्टेशन के पुनर्विकास का कार्य प्रक्रियाधीन है। इसके अलावा नागपुर, अमृतसर, साबरमती, ग्वालियर, पुडुचेरी, तिरुपति, देहरादून सहित आठ स्टेशनों के लिए अर्हता संबंधी अनुरोध (आरआफक्यू) को अंतिम रूप दिया गया है।

गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत 14.14 लाख मानवदिवस रोजगार का सृजन
गोयल ने बताया कि लॉकडाउन के बाद आर्थिक गतिविधियों शुरू करने के तहत छह राज्यों में चिह्नित जिलों में केंद्र की गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत रेलवे ने 140 प्रोजेक्टों में 14,14,604 मानवदिवस रोजगार का सृजन किया। ये छह जिले बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड और ओडिशा थे।

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