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Hindi News ›   India News ›   Pilibhit case: Only compensation can give justice to kins of victims

'दोषियों को सजा और पीड़ितों को सही मुआवजा देने से ही होगा न्याय'

Sun, 03 Apr 2016 02:12 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 03 Apr 2016 02:12 AM IST
सार

  • 25 वर्षों से न्याय की आस लगाए पीड़ित परिवारों को सही मायने में न्याय तब मिलेगा जब उन्हें मुआवजा भी मिले
  • सीबीआई का आभारी रहेगा सिख समुदाय

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Pilibhit case: Only compensation can give justice to kins of victims
फर्जी मुठभेड़ में मारे गए सिख युवक - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

दस निर्दोष लोगों की हत्या करने वाले पुलिसकर्मियों को सजा देना ही पर्याप्त नहीं है। पुलिसकर्मियों को तो अपने किए की सजा मिलनी ही चाहिए थी लेकिन पिछले 25 वर्षों से न्याय की आस लगाए पीड़ित परिवारों को सही मायने में न्याय तब मिलेगा जब उन्हें मुआवजा भी मिले।

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यह राज्य की जिम्मेदारी है कि वह पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दे। इस घटना में किसी ने अपने बेटे को तो किसी ने अपने पिता को और किसी ने अपने पति को खोया था। उनकी तो पूरी दुनिया ही उजड़ गई। यह जरूर है पीड़ित परिवारों पर जो विपत्ति आईं है, उसकी भरपाई तो किसी चीज से नहीं की जा सकती है। मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि कहीं न कहीं मेरा प्रयास सफल रहा है। मैंने 25 वर्ष पहले सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मामले की सीबीआई जांच कराने की गुहार की थी।
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कहीं न कहीं मुझे लगता था कि चूंकि एनकाउंटर में आरोपी पुलिसकर्मी थे, ऐसे में राज्य पुलिस से निष्पक्ष जांच की उम्मीद बेमानी थी। पहले मामले की जांच सीबीआई को सौंपने से पहले राज्य सरकार से अनुमति लेनी पड़ती थी। लेकिन मेरी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 1991 में नई पहल की और कहा कि सीबीआई जांच का आदेश हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी दे सकता है।
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यानी इस फैसले के बाद किसी मामले की जांच को सीबीआई को सौंपने के लिए राज्य सरकार की अनुमति लेना जरूरी नहीं रह गया। इस मामले में सीबीआई की भूमिका की तारीफ होनी चाहिए क्योंकि वह पुलिस अधिकारियों पर लगे आरोपों को साबित करने में कामयाब रही। 

सीबीआई का आभारी रहेगा सिख समुदाय

Pilibhit case: Only compensation can give justice to kins of victims
सीबीअाई

सीबीआई की भूमिका को लेकर सिख समुदाय आभारी रहेगा। गुरदासपुर से गवाहों को पीलीभीत की अदालत में पेश करना और अदालत के समक्ष उनके बयान दर्ज कराना, सीबीआई के लिए एक बड़ी चुनौती थी लेकिन जांच एजेंसी ने इस काम को बखूबी अंजाम दिया।

मेरा मानना है कि 70 से 80 फीसदी एनकाउंटर फर्जी होते हैं। अधिकतर फर्जी एनकाउंटर मामलों को साबित करना कठिन हो जाता है क्योंकि गवाह नहीं मिलते। बेहद कम मामले में ही दोष साबित हो पाता है। कई मामले तक उजागर तक नहीं होते। वहीं के वहीं उन्हें दबा दिया जाता है। पीड़ित परिवार और गवाहों पर दबाव बनाकर मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है।

इस मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पुलिस अपनी शक्ति का किस कदर दुरुपयोग करती है। यह बेहद दुख की बात है कि सरकारी तंत्र की ज्यादती से कई हंसते-खेलते परिवार बिखर जाते हैं। ऐसे में अदालत को अपने फैसले के जरिये कड़ा संदेश देना चाहिए जिससे कि भविष्य में फर्जी एनकाउंटर न हो और कोई भी हंसता-खेलता परिवार न बिखरे।

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