Supreme Court: 'आपकी नीयत की परीक्षा लेनी होगी', नेताजी की मौत को लेकर याचिका पर कोर्ट की याचिकाकर्ता को फटकार
Supreme Court: शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिका में याचिकाकर्ता ने (राष्ट्रपिता) महात्मा गांधी को भी नहीं बख्शा है। याचिकाकर्ता की नीयत की जांच करने की जरूरत है।
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सर्वोच्च न्यायालय ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु के संबंध में जनहित याचिका दायर (पीआईएल) करने वाले याचिकाकर्ता को सोमवार को कड़ी फटकार लगाई। शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिका में उन नेताओं के खिलाफ लापरवाह और गैरजिम्मेदाराना तरीके से आरोप लगाए गए हैं, जो अब जीवित नहीं हैं।
अदालत ने कहा कि याचिका में याचिकाकर्ता ने (राष्ट्रपिता) महात्मा गांधी को भी नहीं बख्शा है। याचिकाकर्ता की नीयत की जांच करने की जरूरत है। याचिका पिनाक पाणि मोहंती की ओर से दायर की गई थी थी।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ द्वारा पूछे जाने पर मोहंती ने बताया कि वह कटक में विश्व मानवाधिकार संरक्षण संगठन (भारत) के जिला सचिव हैं। उन्होंने जनहित और लोगों के मानवाधिकारों के लिए काम किया है।
पीठ ने पूछा, आपके पीछे कौन है? आपने जनहित के लिए क्या किया है? आपने लोगों के मानवाधिकारों के लिए क्या किया? हमें आपकी नेकनीयती की परीक्षा लेनी होगी।
शीर्ष अदालत ने मोहंती ने कहा कि वह हलफनामा दाखिल कर बताएं कि उन्होंने अब तक समाज के लिए क्या-क्या काम किए हैं, खासकर मानवाधिकार के क्षेत्र में। अदालत ने मामले को सुनवाई के लिए चार सप्ताह बाद तक के लिए स्थगित कर दिया।