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सुप्रीम कोर्ट: सीबीआई-ईडी के निदेशकों का कार्यकाल बढ़ाने वाले अध्यादेश के खिलाफ याचिका दायर
Tue, 16 Nov 2021 10:41 PM IST
सुभाष कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुभाष कुमार
Updated Tue, 16 Nov 2021 10:41 PM IST
सार
वकील एमएल शर्मा ने दायर जनहित याचिका में दावा किया है कि केंद्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत दिए गए अपने अधिकार का दुरुपयोग किया है।
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याचिका में दोनों अध्यादेशों को रद्द करने का अनुरोध किया गया है।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशकों का कार्यकाल और तीन साल तक बढ़ाने से जुड़े दो अध्यादेशों के खिलाफ मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई। केंद्र ने दोनों अध्यादेश 14 नवंबर को जारी किए थे। पीआईएल में आरोप लगाया गया है कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (संशोधन) अध्यादेश और दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान (संशोधन) अध्यादेश संविधान के खिलाफ हैं। याचिका में दोनों अध्यादेशों को रद्द करने का अनुरोध किया गया है।
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वकील एमएल शर्मा ने दायर जनहित याचिका में दावा किया है कि केंद्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत दिए गए अपने अधिकार का दुरुपयोग किया है। यह अनुच्छेद संसद के सत्र में नहीं होने के दौरान अध्यादेश जारी करने की राष्ट्रपति के अधिकार से संबंधित है।
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याचिका में आरोप लगाया गया है कि अध्यादेशों का मकसद उस जनहित याचिका पर फैसले में सर्वोच्च अदालत के निर्देश को दरकिनार करना है, जिसमें 2018 में संजय कुमार मिश्रा की ईडी निदेशक के रूप में नियुक्ति के आदेश में बदलाव को चुनौती दी गयी थी।
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याचिका में दावा किया गया है, ‘‘सरकार को दो एजेंसियों के प्रमुखों के कार्यकाल को दो साल से बढ़ाकर अधिकतम पांच साल तक करने का अधिकार देने वाले इन दो अध्यादेशों में इन एजेंसियों की स्वतंत्रता को और कम करने की आशंका है।’’
सर्वोच्च न्यायालय ने संजय कुमार मिश्रा को प्रवर्तन निदेशालय का निदेशक नियुक्त करने के 2018 के आदेश में पूर्व प्रभावी बदलाव को चुनौती देने वाली एक गैर सरकारी संगठन की याचिका आठ सितंबर को खारिज कर दी थी। न्यायालय ने कहा था कि जिन मामलों की जांच चल रही है, उन्हें पूरा करने के लिए उचित सेवा विस्तार दिया जा सकता है।
पीठ ने हालांकि अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि सेवानिवृत्ति की आयु तक पहुंच चुके अधिकारियों के कार्यकाल में विस्तार दुर्लभ और अपवाद वाले मामलों में किया जाना चाहिए। न्यायालय ने यह भी कहा था कि मिश्रा के कार्यकाल को और नहीं बढ़ाया जा सकता