दिल्ली हाईकोर्ट में पॉस्को नियम उल्लंघन के खिलाफ PIL दाखिल

amarujala.com- presented by : मुकेश झा Updated Sun, 04 Jun 2017 03:34 PM IST
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पॉस्को कानून का उल्लंघन करने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में एक पीआईएल दायर की गई है, जिसमें कहा गया है कि जिन परिवार के बच्चे के साथ यौन उत्पीड़न होता है, उसके आरोपी को पॉस्को नियम के तहत जमानत मिलने के बाद भी सूचित नहीं किया जाता है।
इस मामले में चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस सी हरि शंकर की पीठ ने याचिका में लगाए गए आरोपों पर कानून और न्याय मंत्रालय, दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) से रिपोर्ट मांगी गई थी।

पीड़िता की मां ने याचिका में दावा किया कि पास्को अधिनियम और नियमों के संरक्षण के तहत स्पेशल जुवेनाइल पुलिस और स्थानीय पुलिस ने केस के डेवलपमेंट के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। मां ने दावा किया कि उन्होंने पुलिस को पहले ही सूचित किया था, उस समय उसको जान से मारने की धमकी भी मिली थी। उनका कहना है कि अभियुक्त ने जमानत की मांग की थी लेकिन पुलिस ने इसकी जानकारी ट्रायल कोर्ट में नहीं रखी गई।

मां ने आरोप लगाया कि उनके बच्चों से संबंधित मामलों में पॉस्को अधिनियम और नियमों के प्रावधानों का अधिकार नहीं था। उन्होंने कहा कि आरोपी जमानत पर भी चले गए लेकिन उनको पता भी नहीं चला। उन्होंने कहा कि "न्यायिक प्रक्रिया के सभी चरणों में अपने कानूनी प्रतिनिधियों के माध्यम से बाल पीड़ितों के कुशल और प्रभावी भागीदारी को सुरक्षित" करने का भी अनुरोध किया है। इसके अलावा याचिकाकर्ता ने पॉस्को अधिनियम और नियमों के तहत यौन शोषण के शिकार लोगों की सुरक्षा और उनके हितों की सुरक्षा के लिए अधिकारियों द्वारा दिशा-निर्देश तैयार करने की भी मांग की।

पीआईएल में अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने के लिए अधिकारियों को निर्देश देने के लिए भी कहा गया था और कहा गया था पीड़ित या उसके परिवार या संरक्षक को सभी घटनाओं के बारे में सूचित किया जाए। अपील में कहा गया है कि पास्को नियम के तहत कानूनी प्रतिनिधि, माता-पिता या अभिभावक को आरोपी के जमानत से  पहले सुना जाएगा। हालांकि कोर्ट ने इस मामले में 25 जुलाई को सुनवाई की तारीख तय की है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी बच्चों के साथ यौन अपराधों पर सख्त रवैया अपनाते हुए पास्को मामले में देश के उच्च न्यायालयों को इस मुद्दे पर गंभीर कदम उठाने को कहा था। 

POSKO क्या हैः-
बता दें कि POSKO प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट 2012) यानी लैंगिक उत्पीड़न से बच्चों के संरक्षण का अधिनियम 2012। इस एक्ट के तहत नाबालिग बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराध और छेड़छाड़ के मामलों में कार्रवाई की जाती है। यह एक्ट बच्चों को सेक्सुअल हैरेसमेंट, सेक्सुअल असॉल्ट और पोर्नोग्राफी जैसे गंभीर अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है। 

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