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किसी भी कानून का मसौदा प्रकाशित करने और प्रतिक्रिया लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका

Sun, 03 Jan 2021 04:52 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 03 Jan 2021 04:52 AM IST
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PIL filed in the Supreme Court amid the ongoing agitation against the new agricultural laws
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई

नए कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन के बीच सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई। इसमें केंद्र व राज्य सरकारों को संसद या विधानसभा में बिल पेश करने से कम से कम 60 दिन पहले सरकारी वेबसाइटों और सार्वजनिक डोमेन पर कानून का मसौदा प्रकाशित करने और लोगों की प्रतिक्रिया लेने का निर्देश देने की अपील की गई है।

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भाजपा नेता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में 10 जनवरी 2014 को सचिवों की समिति की बैठक में पूर्व-विधान परामर्श नीति पर निर्णय लिए गए थे ताकि आम जनता से प्रस्तावित कानून को लेकर राय व प्रतिक्रिया ली जा सके और उस पर बहस हो सके।
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याचिका में कहा गया है कि दो महीने तक कानून पर एक कठोर सार्वजनिक बहस से कार्यपालिका को हर पहलू का विश्लेषण करने का अवसर मिलेगा और जब संसद में कानून पर बहस होगी तो सांसद बेहतर सुझाव दे सकेंगे।
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इसके बाद नया मसौदा सभी क्षेत्रीय भाषाओं में अखबारों में प्रकाशित कराया जाए, जिससे सभी वर्गों से प्राप्त सुझावों पर विचार किया जा सके। ऐसा करने से कानून त्रुटिमुक्त और लोकतांत्रिक रूप से स्वीकार होगा।

याचिकाकर्ता का कहना है कि इस तरह की कवायद करने से कानून की चुनौती वाली याचिकाएं दाखिल नहीं होंगी क्योंकि अदालत याचिकाकर्ता से पूछ सकती है कि उसने सरकार को अपना सुझाव क्यों नहीं दिया था।


उनका कहना है कि ऐसा करने से कानून बनाने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और पारदर्शी होगी। इससे लोकतंत्र और मजबूत होगा तथा जनहित याचिकाओं में कमी आएगी।

उन्होंने कुछ महीने पहले पारित हुए तीन कृषि कानूनों का हवाला देते हुए कहा है कि इन कानूनों को लेकर किसानों में गलतफहमी और भ्रम की स्थिति है। उनका दावा है कि चूंकि कानून के मसौदे पर व्यापक परामर्श नहीं लिया गया और इसे प्रकाशित नहीं किया गया, इसलिए किसानों के बीच गलतफहमी है। इसी वजह से किसान विरोध कर रहे हैं।

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