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PIL: राजनीतिक दलों के विभाजन-विलय की अनुमति वाले संविधान के प्रावधान को चुनौती, हाईकोर्ट में पीआईएल दायर

Mon, 28 Aug 2023 06:19 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, मुंबई।
पीटीआई, मुंबई। Published by: देव कश्यप Updated Mon, 28 Aug 2023 06:19 PM IST
सार

जनहित याचिका में कहा गया है कि संविधान की दसवीं अनुसूची के पैराग्राफ-4 के तहत विभाजन और विलय के रूप में बेरोकटोक समूह दलबदल राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा बन गया है, जिससे मतदाताओं के साथ विश्वासघात की पूरी उपेक्षा की जा रही है।

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PIL filed in Bombay HC against provision in Constitution allowing split, merger of political parties
बॉम्बे हाईकोर्ट। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है, जिसमें मांग की गई है कि संविधान की दसवीं अनुसूची में राजनीतिक दलों के विभाजन और विलय के प्रावधान वाले पैराग्राफ को "अवैध" और "अमान्य" घोषित किया जाए। साथ ही याचिका में कहा गया है कि यह संविधन की संरचना के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता मीनाक्षी मेनन एक मीडिया और मार्केटिंग पेशेवर और एनजीओ वनशक्ति की संस्थापक ट्रस्टी हैं। उन्होंने दावा किया है कि इस प्रावधान का इस्तेमाल राजनेताओं द्वारा समूह दलबदल के लिए किया गया है और इस तरह के निरंतर समूह दलबदल के कारण मतदाताओं को धोखा दिया जा रहा है।

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जनहित याचिका में कहा गया है कि संविधान की दसवीं अनुसूची के पैराग्राफ-4 के तहत विभाजन और विलय के रूप में बेरोकटोक समूह दलबदल राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा बन गया है, जिससे मतदाताओं के साथ विश्वासघात की पूरी उपेक्षा की जा रही है। इसमें कहा गया है कि प्रावधान के तहत विभाजन और विलय के रूप में दलबदल आम जनता को चुनाव की प्रक्रिया से और ज्यादा अलग-थलग कर रहा है, जिसमें करदाताओं का हजारों करोड़ रुपये बिना किसी जवाबदेही के खर्च किया जाता है।
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अधिवक्ता अहमद आब्दी और एकनाथ ढोकले ने सोमवार को मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की खंडपीठ के समक्ष जनहित याचिका का उल्लेख किया। पीठ ने वकीलों को निर्देश दिया कि वे पहले हाईकोर्ट रजिस्ट्री विभाग द्वारा याचिका में उठाई गई आपत्तियों को दूर करें और फिर याचिका का दोबारा उल्लेख करें।
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याचिका में मांग की गई है कि अदालत यह घोषित करे कि मूल राजनीतिक दल से अलग होने वाले विधायक या विधायकों का समूह तब तक सदन की कार्यवाही में भाग लेने या किसी संवैधानिक पद पर रहने के हकदार नहीं हैं, जब तक कि उनकी अयोग्यता से संबंधित मुद्दे पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता। मेनन ने कहा कि याचिका जून 2022 के महाराष्ट्र राजनीतिक संकट की पृष्ठभूमि में दायर की गई है।महाराष्ट्र में राजनीतिक संकट तब शुरू हुआ था, जब वर्तमान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे की शिवसेना के विधायकों ने बड़ी संख्या में दलबदल कर लिया, जिससे महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार का पतन हो गया था।


याचिका में कहा गया है, हाल ही में अपने चाचा और एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के खिलाफ अजित पवार के विद्रोह में काफी समानताएं हैं कि कैसे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली एमवीए सरकार के खिलाफ विद्रोह किया था।

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