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Bombay High Court: मराठा समुदाय को 10 फीसदी आरक्षण के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती, जनहित याचिका दायर

Fri, 01 Mar 2024 11:12 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 01 Mar 2024 11:12 PM IST
सार

Bombay High Court: मराठा समुदाय को नौकरियों और शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण देने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले के खिलाफ बंबई उच्च न्यायालय में शुक्रवार को एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई।

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PIL filed in Bombay HC against grant of 10 pc Maratha quota
बंबई उच्च न्यायालय। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मराठा समुदाय को नौकरियों और शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण देने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले के खिलाफ बंबई उच्च न्यायालय में शुक्रवार को एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई। वकील जयश्री पाटिल और अन्य की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि सरकार और विपक्षी ने गंदी राजनीति के लिए ऐसे फैसला लिया। पीआईएल में इस कदम को संविधान के मूल ढांचे को नष्ट करने जैसा बताया गया है। 

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याचिका में दावा किया गया है कि यह फैसला राज्य सरकार और विपक्ष ने मिलकर उचित प्रक्रिया के नियमों का पालन किए बिना लिया। इसमें कहा गया है कि बिना किसी असाधारण परिस्थिति के पचास फीसदी से ज्यादा आरक्षण लेने के लिए यह राजनीति से प्रेरित कदम है। याचिका में दावा किया गया कि हर कोई आरक्षण का समर्थन कर रहा है। लेकिन किसी को भी इस बात से सहानुभूति नहीं है कि खुली या सामान्य सीट केवल 38 फीसदी ही हैं। 

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राज्य विधानसभा ने 20 फरवरी को सर्वसम्मति से 'सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए महाराष्ट्र राज्य आरक्षण विधेयक, 2024' पारित किया। जिसमें शिक्षा और सरकारी नौकरियों में मराठा समुदाय के लिए दस फीसदी आरक्षण का प्रावधान है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने एक दिवसीय विशेष सत्र के दौरान इसे विधानसभा में पेश किया था। 

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जयश्री पाटिल की याचिका में उच्च न्यायालय से कानून को रद्द करने का आग्रह किया गया है, क्योंकि यह आरक्षण सीमा को 72 फीसदी तक ले जाएगा। उन्होंने कहा, आरक्षण का बहुसंख्यवादी बनना संविधान के मूल ढांचे को नष्ट करने जैसा है। 

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