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Phone Tapping: फोन टैपिंग की चोट से बच निकले नीतीश! पढ़ें सियासत को हिला देने वाले इस जासूसी यंत्र की कहानी

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 10 Aug 2022 03:55 PM IST
सार

Phone Tapping: देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के समय में भी फोन टैपिंग हुई थी। तत्कालीन संचार मंत्री रफी अहमद किदवई ने ऐसा आरोप लगाया था। सेना प्रमुख जनरल केएस थिमाया ने 1959 में कुछ ऐसा ही खुलासा किया था...

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Phone Tapping: From Nehru to Modi government, many ministers and leaders come under the spying device
Phone Tapping - फोटो : Social Media

विस्तार

बिहार में नए राजनीतिक समीकरणों में नीतीश कुमार ने सीएम और तेजस्वी यादव ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ले ली है। बिहार में 'फोन टैपिंग' की चोट से फिलहाल नीतीश कुमार बच निकले हैं। उन्होंने समय रहते न केवल अपनी पार्टी जदयू के विधायकों को संभाल लिया, बल्कि राजद को भी साधने में कामयाब रहे। सियासत के गलियारों में फोन टैपिंग की कहानी पुरानी है। यूं कहें कि आजाद हिन्दुस्तान की पहली सरकार में ही इस 'जासूसी' यंत्र का प्रभाव दिखना शुरु हो गया था। नेहरू से लेकर मोदी सरकार तक, सियासत की चूलें हिलाने वाले इस 'जासूसी' यंत्र की चपेट में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से लेकर अनेक मंत्री एवं नेता आ चुके हैं।

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महाराष्ट्र और नड्डा की टिप्पणी से आहत थे नीतीश

भले ही मीडिया में ऐसी खबरें देखने को मिल रही हैं कि जदयू में रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी के कथित भ्रष्टाचार का मामला सामने के बाद नीतीश कुमार ने भाजपा से दूरी बनाई है। दरअसल राजनीतिक जानकार, इसके पीछे जाकर कुछ कह रहे हैं। आरसीपी सिंह तो एक मुखौटा थे। अगर नीतीश कुमार ये कदम अब नहीं उठाते तो उन्हें बाद में मौका भी नहीं मिलता। महाराष्ट्र में जो हाल शिवसेना का हुआ है, कुछ वैसा ही बिहार में जदयू का हो सकता था। आरसीपी सिंह ने कहा था, 'नीतीश कुमार कभी प्रधानमंत्री नहीं बन सकते, सात जन्म तक नहीं बन सकते। 'जनता दल यूनाइटेड, एक डूबता जहाज है, आप लोग तैयार रहिए, एकजुट रहिए चला जाएगा। इस बात की जड़ में फोन टैंपिंग ही तो है। इसमें कोई शक नहीं कि नीतीश प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं। पहले भी उनका नाम चल चुका है। संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने भाजपा का साथ छोड़ने के बाद कहा, नीतीश कुमार में प्रधानमंत्री बनने के तमाम गुण हैं। नीतीश कुमार ने बाद में कह दिया कि भाजपा, हमारी पार्टी को कमजोर करने में लगे थे। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बिहार में जाकर कह दिया कि अगर भाजपा अपनी विचारधारा में ऐसे ही आगे बढ़ती रही तो आने वाले समय में सभी क्षेत्रीय दल खत्म हो जाएंगे, बचेगी तो केवल भाजपा। महाराष्ट्र का उदाहरण, जदयू नेतृत्व के सामने था। नीतीश कुमार ने इस बयान को गंभीरता से लिया।

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फोन टैपिंग, नेहरू से मोदी सरकार तक आते रहे ऐसे मामले

  • देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के समय में भी फोन टैपिंग हुई थी। तत्कालीन संचार मंत्री रफी अहमद किदवई ने ऐसा आरोप लगाया था। सेना प्रमुख जनरल केएस थिमाया ने 1959 में कुछ ऐसा ही खुलासा किया था। सेना के दो शीर्ष अफसरों के फोन टैप होने की खबर बाहर आई थी। 1962 में नेहरु के मंत्रिमंडल के सदस्य टीटी कृष्णामाचारी ने भी फोन टैप होने की बात कही।
  • कर्नाटक में 1988 के दौरान, रामकृष्ण हेगड़े पहले गैर-कांग्रेसी सीएम थे। उन्होंने जनता पार्टी के एक धड़े और वीपी सिंह के जन मोर्चा को साथ लेकर जनता दल बनाया था। तब एचडी देवगौड़ा और अजित सिंह, ये दोनों नेता 'जनता पार्टी' में थे। देवगौड़ा और अजित सिंह के फोन टैप हुए तो राजनीति में भूचाल आ गया। ये वही समय था जब हेगड़े का नाम पीएम के लिए आगे बढ़ रहा था। 1988 में कांग्रेस पार्टी और तत्कालीन पीएम राजीव गांधी, बोफोर्स घोटाले के आरोपों से जूझ रहे थे। संसद में हंगामा मचा था। राजीव गांधी ने जांच एजेंसियों से कहा, वे कर्नाटक में फोन टैप मामले की जांच करें। रिपोर्ट में आरोप सच निकले। 50 से अधिक नेता, जिनमें मंत्री भी शामिल थे, का फोन टेप कराया गया। नतीजा, हेगड़े को इस्तीफा देना पड़ा।
  • देश के शीर्ष उद्योगपतियों के साथ जन संपर्क का काम देखने वाली नीरा राडिया के फोन टैप ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी। उस वक्त टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले का केस चल रहा था।
  • साल 2020 में महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने आरोप लगाया कि देवेंद्र फडणवीस सरकार में फोन टैप किए गए। इनमें केवल विपक्षी नेता ही शिकार नहीं बने, बल्कि भाजपा नेता भी इसकी चपेट में आए थे। देशमुख ने कहा था कि विधानसभा चुनाव के दौरान शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस नेताओं के फोन टैप किये जाने की शिकायत मिली। देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि विपक्षी नेताओं के फोन टैप करना, महाराष्ट्र की परंपरा नहीं है। हमारी सरकार ने ऐसा आदेश कभी नहीं दिया।
  • साल 2018 में आरटीआई के जरिए खुलासा हुआ था कि यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान केंद्र सरकार ने 7500 से 9000 फोन कॉल्स पर नजर रखने के आदेश जारी किए थे। इसके अलावा सरकार ने 500 ईमेल्स की भी निगरानी की जाती थी।
  • नवंबर 2013 में पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर फोन टैपिंग का गंभीर आरोप लगाया था। चूंकि नीतीश कुमार, विपक्ष से भयभीत हैं, इसलिए वे भाजपा नेताओं के फोन टैप करा रहे हैं। यूपी के पूर्व सीएम बीर बहादुर सिंह जो 30 मई, 1989 तक केंद्रीय संचार मंत्री रहे, उन्होंने सदन में कहा, लगभग पचास नेताओं के फोन टैप हुए हैं।

2007 में नीतीश का फोन हुआ था टैप

  • कर्नाटक में 2019 में जब एचडी कुमारस्वामी सीएम थे, तो दोबारा से फोन टैपिंग का मामला सामने आया। जनता दल (एस) विधायक एएच विश्वनाथ ने कुमारस्वामी सरकार पर फोन टैप कराने का आरोप लगाया था। कुमारस्वामी ने कहा था, ये झूठ है वे किसी भी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय एजेंसी से मामले की जांच के लिए तैयार हैं।
  • 2007 में जब नीतीश कुमार सीएम थे तो उनका फोन टैप हुआ था। उस वक्त वे दिल्ली में बिहार के रेजिडेंट कमिश्नर के फोन से बातचीत कर रहे थे। साल 2021 में 'पेगासस' जासूसी कांड ने राजनीति को हिलाकर रख दिया। सड़क से लेकर संसद तक हंगामा मचा था। तब सीएम नीतीश कुमार ने कहा, यह सब बेकार की बातें हैं, किसी को डिस्टर्ब करना अच्छी बात नहीं है। ये तो नई तकनीक का दुरुपयोग है। आरोपी पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान हो।
  • जुलाई 2020 में राजस्थान में भी फोन टेपिंग का मामला सामने आया। कांग्रेस का आरोप था कि भाजपा ने चुनी हुई गहलोत सरकार को अस्थिर करने का प्रयास किया है। जन प्रतिनिधियों की निष्ठा खरीदने की नाकाम कोशिश की गई। पार्टी ने दो ऑडियो क्लिप जारी किए। इनमें भाजपा विधायक संजय जैन, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और कांग्रेस विधायक भंवर लाल शर्मा की बातचीत थी। भाजपा ने इस मुद्दे पर अशोक गहलोत सरकार को घेरने का प्रयास किया।
  • साल 2007 के दूसरे माह में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का फोन टैप हुआ था। वे उस वक्त अपनी कार में सवार थे और पंजाब के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता से बात कर रहे थे। जुलाई 2008 में सीपीएम नेता प्रकाश करात के साथ भी ऐसी घटना हुई। उनका फोन यह पता लगाने के लिए टेप हुआ था कि भारत-अमेरिका परमाणु समझौते को लेकर विपक्ष की रणनीति क्या है। संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर क्या सोचा जा रहा है। अप्रैल 2010 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार का फोन टैप किया गया। तब शरद पवार, आईपीएल प्रमुख ललित मोदी से बात कर रहे थे।
  • 2000 के दशक में सपा नेता मुलायम सिंह यादव और अमर सिंह भी फोन टेपिंग का शिकार बने थे। राज्यसभा सांसद अमर सिंह ने दावा किया था कि आईबी ने उनका फोन टैप किया है। इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाया गया। हालांकि 2011 में अमर सिंह ने केंद्र पर लगाए आरोपों को वापस ले लिया। सुप्रीम कोर्ट ने भी अमर सिंह के फोन टेप को मीडिया में दिखाने या छापने पर लगी रोक हटा ली थी।
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तत्कालीन रक्षा मंत्री एंटनी के कमरे से मिली थी मॉनिटरिंग डिवाइस

  • 2013 में भाजपा नेता अरूण जेटली का फोन टैप होने का मामले सामने आया। इसमें दिल्ली पुलिस के सिपाही अरविंद डबास और तीन अन्य व्यक्तियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। डबास ने अरुण जेटली की कॉल डिटेल हासिल करने के लिए मोबाइल सेवा प्रदाता को अनुरोध भेजा था। इसके लिए उन्होंने एसीपी की आधिकारिक ईमेल आईडी का इस्तेमाल किया था। 2010 में तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम पर फोन टैपिंग का आरोप लगा था। उस वक्त कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह, सीएम नीतीश कुमार, शरद पवार और माकपा नेता प्रकाश करात आदि नेताओं के फोन टैप होने की बात कही गई।
  • 2013 में हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल पर कांग्रेस नेता वीरभद्र सिंह ने फोन टैपिंग का आरोप लगाया। जिन लोगों के फोन टैप हुए, उनमें राजनेताओं के अलावा वरिष्ठ नौकरशाह भी शामिल थे। साल 2019 में ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर फोन टैपिंग का आरोप लगाया। उन्होंने इस बाबत सबूत होने की बात कही थी।
  • 2021 में अमेरिकी अखबार 'द वॉशिंगटन पोस्ट' की एक खबर ने भारत में सियासी भूचाल ला दिया था। प्राइवेट इस्राइली सॉफ्टवेयर 'पेगासस' का इस्तेमाल कर भारत में करीब 300 लोगों की जासूसी की गई। इनमें मंत्री, राजनेता, जज और पत्रकार भी शामिल थे।
  • 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को फोन टैपिंग एवं जासूसी प्रकरण के चलते सत्ता से बाहर होना पड़ा। उन्हें कांग्रेस का समर्थन हासिल था। चंद्रशेखर ने राजीव गांधी के आरोपों को नकारा। कांग्रेस इससे पहले समर्थन वापसी का एलान करती, चन्द्रशेखर ने खुद ही प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। 6 मार्च 1991 को सरकार गिर गई।
  • फरवरी 2012 में सेनाध्यक्ष वीके सिंह विवाद में तत्कालीन रक्षा मंत्री एंटनी की जासूसी करने की खबरें आई थीं। मिलिट्री इंटेलिजेंस को रक्षा मंत्री एके एंटनी के दफ्तर में मॉनिटरिंग डिवाइस मिला था। जून 2011 प्रणब मुखर्जी के वित्त मंत्रालय में भी जासूसी का संदेह जाहिर किया गया। तब प्रणब मुखर्जी और पी चिंदबरम के बीच कथित तौर पर विवाद सामने आया था। मुखर्जी ने पीएम मनमोहन सिंह को पत्र भी लिखा कि उन्हें संदेह है कि उनके ऑफिस की जासूसी हो रही है।
  • साल 1984 से 1987 के बीच राष्ट्रपति ज्ञानी जैलसिंह और प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बीच कई मुद्दों पर सहमति का अभाव था। राष्ट्रपति भवन के कुछ कमरों में जासूसी कराने की बात सामने आई।
  • सितंबर 2012 में यशवंत सिन्हा ने एयरसेल-मैक्सिस घोटाले में कांग्रेस नेताओं के शामिल होने का आरोप लगाया। इसे लेकर कथित तौर पर उनके फोन टैप हुए थे।
  • जुलाई 2011 के दौरान कर्नाटक में कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री येदियुप्पा लोकायुक्त एन संतोष हेगड़े के फोन टैप करा रहे हैं। उस वक्त हेगड़े, जमीन घोटाले की जांच कर रहे थे।
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