{"_id":"6171ee11d0c60764782636d8","slug":"phone-tapping-case-high-court-asked-mumbai-police-whether-ips-rashmi-shukla-has-to-be-made-an-accused-please-clarify","type":"story","status":"publish","title_hn":"फोन टैपिंग मामला: हाईकोर्ट ने पुलिस से कहा, क्या आईपीएस रश्मि को आरोपी बनाया जाना है, स्पष्ट करें","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
फोन टैपिंग मामला: हाईकोर्ट ने पुलिस से कहा, क्या आईपीएस रश्मि को आरोपी बनाया जाना है, स्पष्ट करें
Fri, 22 Oct 2021 04:17 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, मुंबई
एजेंसी, मुंबई
Published by: देव कश्यप
Updated Fri, 22 Oct 2021 04:17 AM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि अगर आईपीएस रश्मि शुक्ला का नाम आरोपी के रूप में नहीं लिया गया है और अगर पुलिस का उनका नाम लेने का इरादा नहीं है, तो अदालत को याचिका पर सुनवाई करने में अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहिए।
विज्ञापन
बॉम्बे हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि क्या उसका इरादा फोन टैपिंग मामले में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला को आरोपी के रूप में नामित करने का है। जस्टिस नितिन जामदार और सारंग कोतवाल की खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को पुलिस से कहा कि वह 25 अक्तूबर तक कोर्ट को जांच में हुई प्रगति के बारे में भी बताए।
विज्ञापन
इस मामले में एफआईआर मार्च में दर्ज की गई थी। हाईकोर्ट शुक्ला की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें एफआईआर को रद्द करने और मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की गई थी, जो पहले से ही महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ जांच कर रही है।
विज्ञापन
शुक्ला के वकील महेश जेठमलानी ने अदालत को पुलिस की ओर से दायर उस हलफनामे की ओर इशारा किया, जिसमें उसने कहा है कि शुक्ला को एफआईआर में आरोपी के रूप में नामित नहीं किया गया है। वरिष्ठ वकील डेरियस खंबाटा ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता को अभी तक आरोपी के रूप में नामित नहीं किया गया है, लेकिन यह पता लगाने के लिए जांच की जा रही है कि संवेदनशील सरकारी दस्तावेजों को लीक करने का कौन जिम्मेदार है।
विज्ञापन
अदालत का समय बर्बाद न करे पुलिस
दोनों पक्षों को सुनकर पीठ ने कहा कि अगर शुक्ला का नाम आरोपी के रूप में नहीं लिया गया है और अगर पुलिस का उनका नाम लेने का इरादा नहीं है, तो अदालत को याचिका पर सुनवाई करने में अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। पीठ ने कहा कि पुलिस यह स्पष्ट करे कि उसे आरोपी बनाया जाएगा या नहीं। और जब उसे आरोपी के रूप में नामित किया जाए, तो उसे फिर से अदालत लाया जा सकता है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 25 अक्तूबर तय की है।