Terror of PFI: दहशत फैलाने को हाथ काटने जैसी हरकतें करता है पीएफआई, एनआईए ने अब तक 355 सदस्यों को दिलाई है सजा
पिछली रामनवमी पर गोवा, गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल में फैली हिंसा में भी पीएफआई के शामिल होने का आरोप लगा था। कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अनुसार, पीएफआई के पूरे देश में 50 हजार से अधिक सदस्य हैं और इससे सहानुभूति रखने वाले अधिकांश लोग केरल में हैं।
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पीएफआई के खिलाफ पिछले कुछ सालों के दौरान देश के कई राज्यों में बड़े पैमाने पर आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में संगठन के नेताओं, सदस्यों को कई हिंसक गतिविधियों में शामिल होने का आरोपी बनाया गया। राष्ट्रीय जांच एजेंसी के एक अधिकारी ने गुरुवार को बताया कि इन हिंसक गतिविधियों में केरल में एक कॉलेज प्रोफेसर का हाथ काटना, दूसरे धर्मावलंबियों की निर्मम हत्या, नामी जगहों और शख्सियतों को निशाना बनाने के लिए विस्फोटक जुटाने, इस्लामिक स्टेट का समर्थन और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाना शामिल हैं। क्रूर हरकतों के जरिये संगठन का प्रयास लोगों के मन में दहशत पैदा करना होता है। अधिकारी ने बताया, एनआईए ने अब तक पीएफआई से जुड़े 355 लोगों को 45 मामलों में दोषी करार दिलाने में सफलता हासिल की है।
पिछले साल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि केंद्र सरकार पीएफआई को प्रतिबंधित करने की प्रक्रिया है। इस संगठन को झारखंड सरकार पहले ही गैरकानूनी करार देते हुए प्रतिबंधित कर चुकी है। मेहता ने बताया था कि पीएफआई के कई पदाधिकारी प्रतिबंधित संगठन सिमी से जुड़े पाए गए हैं। जनवरी, 2018 में उस समय के गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने भी कहा था कि केंद्र सरकार गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून के तहत पीएफआई को प्रतिबंधित करने पर विचार कर रही है। दिसंबर 2019 में सीएए विरोधी हिंसक प्रदर्शनों में पीएफआई की संलिप्तता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने भी केंद्र सरकार को इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी।
रामनवमी पर भड़की हिंसा में भी हाथ
पिछली रामनवमी पर गोवा, गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल में फैली हिंसा में भी पीएफआई के शामिल होने का आरोप लगा था। कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अनुसार, पीएफआई के पूरे देश में 50 हजार से अधिक सदस्य हैं और इससे सहानुभूति रखने वाले अधिकांश लोग केरल में हैं।
ईडी ने दो आरोपपत्र दायर किए
ईडी ने पीएफआई और इसके पदाधिकारियों के खिलाफ लखनऊ में विशेष पीएमएलए कोर्ट में दो आरोप पत्र दायर किए हैं। पिछले साल फरवरी में ईडी ने पीएफआई और इसके छात्र संगठन कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया के खिलाफ पहला आरोप पत्र दायर किया था।
पीएफआई सदस्यों पर हत्या व हिंसा के आरोप गंभीर : मुस्लिम संगठन
देश के कुछ मुस्लिम संगठनों ने पीएफआई के ठिकानों पर छापे के दौरान वहां से हथियार मिलने और गिरफ्तार लोगों के खिलाफ हत्या, हिंसा के मामलों को गंभीर बताते हुए मुस्लिम युवाओं से संयम बरतने की अपील की है।
तंजीम उलेमा ए इस्लाम, कुल हिंद मरकजी इमाम काउंसिल और मुस्लिम स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन (एमएसओ) ने कहा कि यदि इस संगठन के खिलाफ कानून के पालन और आतंक रोकने के लिए कार्रवाई की गई है तो हर किसी को धैर्य बनाए रखना चाहिए। इन संगठनों ने कहा कि पीएफआई के खिलाफ लगाए गए आरोपों को कोर्ट में साबित किया जाना चाहिए। एमएसओ ने कहा, पिछले कई दिनों से पीएफआई की कथित राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के बारे में लगातार खबरें आ रही हैं। एमएसओ ने कहा कि भारत के मुसलमानों को देश में स्थिरता और शांति के लिए काम करना चाहिए।
सभी तरह की सांप्रदायिकता के प्रति जीरो टॉलरेंस : राहुल गांधी
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने देश भर में पीएफआई के कार्यालयों व पदाधिकारियों पर हुई छापेमारी पर कहा कि किसी भी तरह के सांप्रदायिकता के प्रति जीरो टॉलरेंस होना चाहिए। उन्होंने कहा कि चाहे सांप्रदायिकता और हिंसा, कहीं से भी आए, किसी भी रूप में आए, इसके खिलाफ लड़ने की जरूरत है। कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सांप्रदायिकता का सख्त मुकाबला करना होगा, इसके सभी रूप खतरनाक हैं।