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Hindi News ›   India News ›   Petition filed in Delhi High Court for equal age of marriage of women and men

महिलाओं और पुरुषों की शादी की एक समान उम्र करने लिए याचिका दायर

Wed, 14 Aug 2019 02:22 PM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Trainee Trainee Updated Wed, 14 Aug 2019 02:22 PM IST
सार

  • दिल्ली उच्च न्यायालय में शादी के कानून में उम्र बराबर करने को लेकर याचिका दायर की गई है
  • वर्तमान में महिलाओं के लिए 18 वर्ष वहीं पुरुषों के लिए 21 वर्ष निर्धारित है
  • याचिकाकर्ता का कहना है कि यह भेदभाव को दर्शाता है

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Petition filed in Delhi High Court for equal age of marriage of women and men
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

दिल्ली उच्च न्यायालय में बुधवार को एक याचिका दायर की गई, जिसमें महिलाओं और पुरुषों की शादी की कानूनी उम्र बराबर करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि किसी महिला की शादी के लिए न्यूनम उम्र 18 साल रखना ‘स्पष्ट भेदभाव’ है।

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भारत में पुरुषों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 21 साल है और महिलाओं की शादी की उम्र 18 साल हैं।

भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर जनहित याचिका में दावा किया गया है कि पुरुषों और महिलाओं की शादी के लिए निर्धारित न्यूनतम उम्र पितृसत्तात्मक पूर्वाग्रह पर आधारित है और इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
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याचिका में कहा गया है कि भारत में जहां पुरुषों को न्यूनतम 21 साल की उम्र में विवाह करने की इजाजत है, वहीं महिलाओं को 18 साल की न्यूनतम उम्र में विवाह की इजाजत मिलती है। यह अंतर पितृसत्तात्मक पूर्वाग्रह की वजह से है। 
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इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। यह कानूनी रूप से और स्वत: महिलाओं के खिलाफ असमानता है। यह वैश्विक परिपाटी के विपरीत है। इसमें यह भी कहा गया है कि विवाह की उम्र में अंतर लैंगिक समानता के सिद्धांत, लैगिंक न्याय और महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है।

1875 के भारतीय बहुमत अधिनियम के अनुसार, पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए विवाह के लिए कानूनी न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। परामर्श पत्र में कहा गया है कि पति और पत्नी के लिए उम्र में अंतर का कानून में कोई आधार नहीं है क्योंकि पति या पत्नी शादी में शामिल होने के लिए हर तरह से समान हैं और उनकी साझेदारी भी बराबरी के बीच होनी चाहिए।


शादी में उम्र के अंतर पर टिप्पणी करते हुए, कानून पैनल ने उल्लेख किया कि पुरुषों के लिए 21 वर्ष की आयु और महिलाओं के लिए 18 वर्ष की आयु उस सोच का परिणाम है जिसमें माना जाता है कि पत्नियों को उनके पति से छोटी होनी चाहिए। 

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