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बॉम्बे हाई कोर्ट: दुष्कर्म मामले में तरुण तेजपाल को बरी किए जाने को चुनौती, पासपोर्ट नवीनीकरण की याचिका भी स्वीकार
Sat, 23 Apr 2022 08:41 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Amit Mandal
Updated Sat, 23 Apr 2022 08:41 PM IST
सार
सत्र अदालत ने दुष्कर्म मामले में तरुण तेजपाल को बरी करते हुए शिकायतकर्ता महिला के आचरण पर सवाल उठाए थे।
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tarun tejpal
- फोटो : social media
विस्तार
बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा खंडपीठ ने 2013 के दुष्कर्म मामले में पत्रकार तरुण तेजपाल को बरी किए जाने को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका शनिवार को स्वीकार कर ली। सत्र न्यायालय ने पिछले साल तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था, जिसे राज्य सरकार ने हाई कार्ट में चुनौती दी है।
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जस्टिस आरएन लढ्ढा और एमएस सोनक की खंडपीठ ने कहा कि अभियोजन की ओर से अदालत को साक्ष्य के रूप में इस मामले से जुड़ी विस्तृत जानकारी नहीं चाहिए। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की याचिका उसके अधिकार क्षेत्र में है। इसे चुनौती नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि मौजूदा केस में ऐसा नहीं कहा जा सकता कि बरी करने के खिलाफ अपील का फैसला विवेक के इस्तेमाल के बगैर किया गया। यह भी नहीं कहा जा सकता है कि राज्य सरकार ने ऐसा दबाव के तहत किया है।
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इस बीच कोर्ट ने तेजपाल के पासपोर्ट के नवीनीकरण की मांग वाली याचिका को स्वीकार कर लिया है। अदालत ने कहा कि एक बार प्रतिवादी 15 दिनों के भीतर निचली अदालत में पेश हो जाए तो उसका पासपोर्ट जारी करने का आदेश दिया जा सकता है।
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सत्र अदालत ने दुष्कर्म मामले में तरुण तेजपाल को बरी करते हुए शिकायतकर्ता महिला के आचरण पर सवाल उठाए थे। सत्र अदालत ने कहा था कि उसके बर्ताव में ऐसा कुछ नहीं दिखा जिससे लगे कि वह यौन शोषण पीडि़ता है। सत्र न्यायालय ने 21 मई को 527 पृष्ठ के अपने फैसले में कहा था कि पेश किए गए सबूतों से महिला की सच्चाई पर संदेह पैदा होता है और प्रमाणित सबूतों के अभाव में आरोपी को संदेह का लाभ दिया जाता है।