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सुप्रीम कोर्टः वकील की दलील, SIT रिपोर्ट से पता चला कि 1984 के सिख विरोधी दंगों में हुई दिखावटी जांच
Thu, 03 Nov 2022 09:36 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Thu, 03 Nov 2022 09:36 PM IST
सार
एचएस फुल्का ने रिपोर्ट के अंश पढ़ते हुए कहा, यह पता नहीं है कि केवल पांच हत्याओं के लिए आरोप क्यों तय किए गए, न कि 56 हत्याओं के लिए। ट्रायल कोर्ट ने अपराध की हर घटना के लिए अलग-अलग सुनवाई का आदेश क्यों नहीं दिया।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social Media
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट को गुरुवार को बताया गया कि विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा दायर एक रिपोर्ट के अवलोकन से पता चलता है कि 1984 के सिख विरोधी दंगों में सिर्फ दिखावटी जांच हुई। याचिकाकर्ता एस गुरलाद सिंह कहलों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फुल्का ने 29 नवंबर, 2019 को दायर एसआईटी रिपोर्ट का हवाला दिया और कहा कि जिस तरह से ट्रायल किया गया है, उससे पता चलता है कि पूरी व्यवस्था विफल हो गई है।
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निचली अदालत ने केवल पांच लोगों की हत्या में आरोप तय किए
रिपोर्ट का हवाला देते हुए फुल्का ने कहा कि मामलों के अवलोकन से पता चलता है कि एक प्राथमिकी में पुलिस ने विभिन्न मामलों को जोड़कर 56 लोगों की हत्या के संबंध में चालान भेजा। हालांकि, निचली अदालत ने केवल पांच लोगों की हत्या में आरोप तय किए और बाकियों के संबंध में कोई आरोप तय नहीं किया गया।
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फुल्का ने रिपोर्ट के अंश पढ़ते हुए कहा, यह पता नहीं है कि केवल पांच हत्याओं के लिए आरोप क्यों तय किए गए, न कि 56 हत्याओं के लिए। ट्रायल कोर्ट ने अपराध की हर घटना के लिए अलग-अलग सुनवाई का आदेश क्यों नहीं दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह रिपोर्ट का अध्ययन करेगी और मामले को दो सप्ताह के बाद सुनवाई के लिए टाल दिया। अदालत ने पहले दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य कहलों की याचिका पर सभी पक्षों को नोटिस जारी किया था, जिसमें दंगों में नामित 62 पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच की मांग की गई थी।
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शीर्ष अदालत ने 1986 के दंगों के मामलों में आगे की जांच की निगरानी के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस एन ढींगरा की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया था, जिसमें क्लोजर रिपोर्ट पहले दायर की गई थी। एसआईटी में इसके सदस्य सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी राजदीप सिंह और आईपीएस अधिकारी अभिषेक दुलार भी हैं। हालांकि, वर्तमान में इसमें केवल दो सदस्य हैं क्योंकि सिंह ने व्यक्तिगत आधार पर टीम का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया था।