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स्थाई रोजगार सबसे बड़ी समस्या, शहरों में 11 फीसदी तो गांवों में 29 फीसदी कामगार हैं अस्थाई

Wed, 16 Sep 2020 05:36 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 16 Sep 2020 05:36 PM IST
सार

  • एक अप्रैल 2020 को तय की गई राशि के अनुसार- अकुशल श्रमिकों के लिए ए वर्ग के शहरों में कृषि क्षेत्र में कामकाज के लिए 333 रुपये प्रतिदिन पारिश्रमिक निर्धारित
  • न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 के अंतर्गत इस वर्ग के लिए होता है पारिश्रमिक का निर्धारण

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Permanent employment is the biggest problem, 11 percent in cities and 29 percent in villages are temporary workers
Lockdown Labours unemployment - फोटो : PTI (File Photo)

विस्तार

रोजगार की अनिश्चतता लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता का कारण होती है, लेकिन केंद्र सरकार ने माना है कि देश के शहरी इलाकों में 10.7 फीसदी और ग्रामीण इलाकों में 29.3 फीसदी लोगों के पास स्थाई रोजगार नहीं है। ये लोग अस्थाई प्रकृति के कामकाज से जुड़े हुए हैं या बड़े संस्थानों में भी इन्हें अस्थाई तौर पर रखकर कामकाज लिया जाता है। इस वर्ग की आर्थिक सुरक्षा के लिए समय-समय पर न्यूनतम पारिश्रमिक राशि तय की जाती है। हर छह महीने पर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर इसका पुनर्मूल्यांकन भी किया जाता है।
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केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने बुधवार को संसद में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 के अंतर्गत अस्थाई प्रकृति के कामकाज/रोजगार में लगे लोगों के लिए न्यूनतम पारिश्रमिक राशि निर्धारित की जाती है। एक अप्रैल 2020 को तय की गई राशि के अनुसार अकुशल श्रमिकों के लिए ए वर्ग के शहरों में कृषि क्षेत्र में कामकाज के लिए 333 रुपये प्रतिदिन, बी वर्ग के शहरों मेें 303 रुपये और सी वर्ग के शहरों मेें 300 रुपये प्रतिदिन का पारिश्रमिक निर्धारित है।
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निर्माण क्षेत्र में कामकाज कर रहे अकुशल श्रमिकों के लिए ए वर्ग के शहरों में 523 रुपये, बी वर्ग के शहरों में 437 रुपये और सी वर्ग के इलाकों में 350 रुपये निर्धारित किया गया है। वहीं, उच्च दक्ष कामगरों के लिए कृषि क्षेत्र में 438 रुपये, 407 रुपये और 364 रुपये निर्धारित है।
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देश के उच्च शहरी इलाकों जैसे दिल्ली, मुंबई, नागपुर, पुणे इत्यादि को ए वर्ग में, मध्यम स्तरीय शहरीकरण वालों जैसे प्रयागराज, अलीगढ़, बरेली, राजकोट को बी वर्ग में और देश के शेष इलाकों को सी वर्ग में रखा जाता है।
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