सेना में महिलाओं को स्थाई कमीशन पर सरकार को घेर खुद फंसे राहुल गांधी
सेना में महिलाओं को स्थाई कमीशन देने के फैसले पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार को घेरने की कोशिश की, लेकिन वह खुद ही इस मुद्दे पर फंस गए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सेना में महिलाओं को स्थाई कमीशन देने का फैसला दिया है, जिसपर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की, लेकिन वह इस मुद्दे पर खुद ही फंस गए। दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2010 में ही भारतीय सेना की महिलाओं को स्थाई कमीशन देने के निर्देश दिया था, लेकिन तत्कालीन यूपीए सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई थी।
राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह दलील देकर हर महिला का अपमान किया है कि महिला सैन्य अधिकारी कमान मुख्यालय में नियुक्ति पाने या स्थायी सेवा की हकदार नहीं हैं क्योंकि वे पुरुषों के मुकाबले कमतर होती हैं। उन्होंने कहा कि मैं भाजपा सरकार को गलत साबित करने और खड़े होने के लिए भारत की महिलाओं को बधाई देता हूं।
The Govt disrespected every Indian woman, by arguing in the SC that women Army officers didn’t deserve command posts or permanent service because they were inferior to men.
विज्ञापन विज्ञापन
I congratulate India’s women for standing up & proving the BJP Govt wrong. https://t.co/B67u5VNkrK— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) February 17, 2020
उनके इस बयान के बाद महिला सैन्य अधिकारियों का केस लड़ने वाली वकील और भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी और हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील नवदीप सिंह ने राहुल गांधी को याद दिलाया कि कोर्ट के फैसले के खिलाफ तत्कालीन यूपीए सरकार कोर्ट में गई थी, ना कि भाजपा।
नवदीप सिंह ने कहा, 'हालांकि, महिला अधिकारियों को यह लाभ देने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील 2010 में दायर किया गया था, जब वर्तमान सरकार सत्ता में नहीं थी। इसलिए, मेरा मानना है कि इस तरह के मुद्दों और न्यायिक फैसलों का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।'
However the appeal against the Delhi HC decision that had granted this benefit to women officers was filed in 2010, when the current govt was not in power. That said, it's my sincere belief that such issues and judicial verdicts must not be politicised.https://t.co/r6S2cox3gB
— Navdeep Singh (@SinghNavdeep) February 17, 2020
वहीं, भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी ने राहुल पर तंज कसते हुए कहा कि कृपया, राहुल गांधी अपने मेमोरी बटन को रिफ्रेश करें। यह कांग्रेस सरकार थी जिसने दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष 2010 में सेना में महिलाओं के स्थाई कमीशन के खिलाफ विरोध किया था।
Mr Rahul Gandhi please click the refresh memory button. It was Congress govt that argued vociferously against permanent commissioning of women in the army back in2010 before the Delhi HC. Decision challenged before the SC which ruled in favour of women? Mr. G,it was YOUR OWN govt https://t.co/yiPDyX4L0c
— Meenakashi Lekhi (@M_Lekhi) February 17, 2020
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने भी कहा कि हाईकोर्ट के फैसले को तब सरकार ने बिना किसी देरी के 2010 में लागू किया होता तो आज 14 से 20 साल सेवा में रह चुकीं महिला अधिकारी स्थाई कमीशन की हकदार होंती। यह सरासर सरकार की विफलता है कि उसने फैसले को लागू नहीं किया।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वह सेना की उन सभी महिला अधिकारियों को तीन महीने के भीतर स्थाई कमीशन प्रदान करे जिन्होंने इसके लिए आवेदन किया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि महिलाओं को कमान मुख्यालय पर नियुक्ति दिए जाने पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।
न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें शारीरिक सीमाओं और सामाजिक चलन का हवाला देते हुए सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन नहीं देने की बात कही गई थी।