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राजस्थान में खूब चल रहा है : 15 लाख रुपये खाते में दे दो

Mon, 30 Jul 2018 11:17 AM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Updated Mon, 30 Jul 2018 11:17 AM IST
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People of Rajasthan asked when will 15 lakh rupees be deposited in account

रशीद बीकानेर में टैक्सी ड्राइवर है। उसने भामाशाह कार्ड बनवाया और आईसीआईसीआई बैंक में खाता भी खुलवाया। रशीद को उम्मीद थी कि उसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा चुनाव के दौरान किए गए वादे के अनुरुप 15 लाख रुपये दिए जाने हैं, अधिकारियों मे भी उसे यही लालच दिया था, लेकिन अब रशीद को लग रहा है कि उसके साथ धोखा हो गया। पैसे नहीं आए और बैंक वाले अब उससे खाते में पैसा डालने को कह रहे हैं। करे तो क्या करे? यह स्थिति बीकानेर में चलते फिरते सड़क पर सुनी जा सकती है।

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नोटबंदी के दौरान नहीं लिया लाभ

दूसरा तर्क सुनिए। खाता खुलने के बाद कई परिचितों ने रशीद से अपने खाते में पैसा डालने को कहा। लालच भी दिया कि पैसा अपने खाते में डाल दे और बाद में उसका एक हिस्सा रखकर बाकी वापस कर दे। रशीद ने बताया कि उसने 15 लाख रुपये के लालच में अपने अकाऊंट को जीरो बैलेंस ही रखा। वह कहता है कि यह स्थिति उसके जिले में बहुत से लोगों की है।
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आज सब पछतावा कर रहे हैं। रशीद के मुताबिक पछतावा यही है कि न तो नोटबंदी का फायदा उठा पाए और न ही 15 लाख रुपये में से एक कौड़ी भी आई। जब रशीद की इस जुबानी पर अधिकारियों से चर्चा की गई तो वे ठहाके लगाकर एक किनारे खड़े हो गए। बीकानेर में आयोजित डिजिफेस्ट में आने वाले स्थानीय लोगों में से कई को भी 15 लाख रुपये खाते में आना अब एक जुमला लगने लगा है।

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वसुंधरा विरोधी लहर

People of Rajasthan asked when will 15 lakh rupees be deposited in account

वसुंधरा राजे सरकार विरोधी लहर को सुनना हो तो जयपुर से लेकर बीकानेर कहीं भी खड़े हो जाइए। राज्य सरकार के अधिकारी से लेकर स्थानीय तक 10 में छह सरकार के साथ नाराजगी बताते मिलेंगे। तीन लोगों को इस तरह का कुछ नहीं लग रहा है और एक व्यक्ति कुछ न कह पाने की स्थिति वाला मिलेगा। बीकानेर के पंचायती राजस्व विभाग के अफसरों का भी कहना है कि राज्य सरकार के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है। एक नारा भी खूब चल रहा है। एट पीएम नो सीएम। यानी आठ बजे रात के बाद मुख्यमंत्री नहीं मिलती।

वहीं वसुंधरा सरकार के कुछ अफसर इसे राज्य सरकार के लिए 2013 वाली स्थिति बताते हैं। उनका कहना है कि जैसे शीला दीक्षित ने दिल्ली में खूब काम किया और उनकी सरकार केन्द्र की मनमोहन सरकार के घोटालों, नाकामियों के कारण हार गई, वही स्थिति राजस्थान में भी है। यहां जनता इसके चलते वसुंधरा राजे से नाराज है।

मोदी तुझसे बैर नहीं

यह भी एक दृश्य है। झुनझुनू में लगा नारा बीकानेर तक जगह बनाए है। नारा है वसुंधरा तेरी खैर नहीं, मोदी तुझसे बैर नहीं। यानी लोग वसुंधरा राजे सरकार से तो नाराज हैं, लेकिन मोदी सरकार से कोई नाराजगी नहीं है। प्रधानमंत्री की लोकप्रियता में गिरावट बहुत कम हुई है। यह पूछने पर कि क्या प्रधानमंत्री की अपील पर लोग वसुंधरा राजे (भाजपा) को वोट देंगे तो अधिकांश लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री के जनता के बीच में आने पर इसकी गुंजाइश बन सकती है। राजस्थान परंपराओं वाला राज्य है। राजशाही और मेहमान की कद्र करता है। लेकिन यह सवाल कि क्या मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सत्ता में लौटकर आ रही हैं तो फिर लोगों की सरकार से नाराजगी दिख जाती है।

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