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Report: भारत के लोगों का विज्ञान पर भरोसा अधिक, मिस्र के बाद दूसरे नंबर पर; संकट वाले दावे का कोई सबूत नहीं
Tue, 21 Jan 2025 05:03 AM IST
शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: शुभम कुमार
Updated Tue, 21 Jan 2025 05:03 AM IST
सार
विज्ञान पर भरोसा को लेकर हुए सर्वे में खुलासा हुआ है कि भारत के लोगों का विज्ञान पर अधिक भरोसा है। इस मामले में मिस्र जहां पहले नंबर पर है भारत दूसरे स्थान पर है। साथ ही सर्वे में ये भी बताया गया कि विज्ञान और वैज्ञानिकों में विश्वास के संकट वाले दावे का कोई सबूत नहीं मिला है।
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विज्ञान (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Freepik
विस्तार
भारत के लोग विज्ञान पर बहुत ज्यादा विश्वास करते हैं। एक वैश्विक रिपोर्ट में कहा गया कि विज्ञान के प्रति जनता का भरोसा भारत में मिस्र के बाद दूसरे स्थान पर है। अगर बात पूरी दुनिया की जाए तो यह मध्यम स्तर पर है।
वैश्विक दक्षिण के कम शोध वाले देशों समेत 68 मुल्कों के लोगों को विज्ञान पर इस सर्वे में शामिल किया गया, जिन्होंने अपनी राय दी।
शोधकर्ता ने दी जानकारी
स्विट्जरलैंड की प्रमुख शोधकर्ता विक्टोरिया कोलोग्ना ने बताया कि कोरोना महामारी के बाद पहली बार हुए इस सर्वे में करीब 72 हजार लोग शामिल हुए। नेचर ह्यूमन बिहेवियर नाम से जर्नल में प्रकाशित में रिपोर्ट के मुताबिक, विज्ञान और वैज्ञानिकों के प्रति जनता के भरोसे के मामले ऑस्ट्रेलिया पांचवें स्थान पर है, जबकि न्यूजीलैंड नौवें और अमेरिका 12वें पायदान पर है।
वैज्ञानिकों पर भरोसा कायम
सर्वे के मुताबिक, विज्ञान और वैज्ञानिकों में विश्वास के संकट वाले दावे का कोई सबूत नहीं मिला है। विक्टोरिया ने कहा, सर्वे के नतीजों से पता चलता है कि ज्यादातर देशों में अधिकांश लोगों का वैज्ञानिकों पर अपेक्षाकृत उच्च स्तर का भरोसा है। लोग चाहते हैं कि वैज्ञानिक समाज और राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएं। इतना ही नहीं, सर्वे में हिस्सा लेने वाले अधिकांश लोगों ने वैज्ञानिकों को योग्य (78%), ईमानदार (57%) और जनता की भलाई के प्रति चिंतित (56%) माना है।
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दक्षिणपंथी लोगों का भरोसा कम
सर्वे में एक महत्वपूर्ण बात पता चली है। खासतौर से पश्चिमी देशों में दक्षिणपंथी राजनीतिक विचार वाले लोगों का विज्ञान पर उतना भरोसा नहीं है, जितना वाम विचार वाले लोग इस पर विश्वास करते हैं। सर्वे में शामिल हुए 83 प्रतिशत लोग मानते हैं कि वैज्ञानिकों को विज्ञान के बारे में आम लोगों से संवाद करना चाहिए। जबकि 52 फीसदी लोगों का मानना है कि वैज्ञानिकों को नीति निर्धारण प्रक्रिया में शामिल होना चाहिए।
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वैश्विक दक्षिण के कम शोध वाले देशों समेत 68 मुल्कों के लोगों को विज्ञान पर इस सर्वे में शामिल किया गया, जिन्होंने अपनी राय दी।
शोधकर्ता ने दी जानकारी
स्विट्जरलैंड की प्रमुख शोधकर्ता विक्टोरिया कोलोग्ना ने बताया कि कोरोना महामारी के बाद पहली बार हुए इस सर्वे में करीब 72 हजार लोग शामिल हुए। नेचर ह्यूमन बिहेवियर नाम से जर्नल में प्रकाशित में रिपोर्ट के मुताबिक, विज्ञान और वैज्ञानिकों के प्रति जनता के भरोसे के मामले ऑस्ट्रेलिया पांचवें स्थान पर है, जबकि न्यूजीलैंड नौवें और अमेरिका 12वें पायदान पर है।
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वैज्ञानिकों पर भरोसा कायम
सर्वे के मुताबिक, विज्ञान और वैज्ञानिकों में विश्वास के संकट वाले दावे का कोई सबूत नहीं मिला है। विक्टोरिया ने कहा, सर्वे के नतीजों से पता चलता है कि ज्यादातर देशों में अधिकांश लोगों का वैज्ञानिकों पर अपेक्षाकृत उच्च स्तर का भरोसा है। लोग चाहते हैं कि वैज्ञानिक समाज और राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएं। इतना ही नहीं, सर्वे में हिस्सा लेने वाले अधिकांश लोगों ने वैज्ञानिकों को योग्य (78%), ईमानदार (57%) और जनता की भलाई के प्रति चिंतित (56%) माना है।
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दक्षिणपंथी लोगों का भरोसा कम
सर्वे में एक महत्वपूर्ण बात पता चली है। खासतौर से पश्चिमी देशों में दक्षिणपंथी राजनीतिक विचार वाले लोगों का विज्ञान पर उतना भरोसा नहीं है, जितना वाम विचार वाले लोग इस पर विश्वास करते हैं। सर्वे में शामिल हुए 83 प्रतिशत लोग मानते हैं कि वैज्ञानिकों को विज्ञान के बारे में आम लोगों से संवाद करना चाहिए। जबकि 52 फीसदी लोगों का मानना है कि वैज्ञानिकों को नीति निर्धारण प्रक्रिया में शामिल होना चाहिए।