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Hindi News ›   India News ›   Penalty on Google : After strictness, Google included the option of Indian UPI

Google पर जुर्माना : सख्ती के बाद भारतीय यूपीआई को गूगल ने किया विकल्प में शामिल

Wed, 26 Oct 2022 04:23 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Wed, 26 Oct 2022 04:23 AM IST
सार

गूगल ने प्रतिस्पर्धा के लिए बने कानून का उल्लंघन किया जब एप डवलपर्स को प्ले स्टोर का इस्तेमाल करने देने के लिए जीपीबीएस को अनिवार्य बनाया। खास बात यह रही कि गूगल जीपीबीएस का इस्तेमाल अपने ही एप यूट्यूब के लिए नहीं करता, यानी उसने भेदभाव किया था।

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Penalty on Google : After strictness, Google included the option of Indian UPI
गूगल - फोटो : Social Media

विस्तार

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के अनुसार, आरोप थे कि गूगल प्ले स्टोर पर भारत के यूपीआई एप को भुगतान के विकल्प के रूप में शामिल नहीं किया गया था। आयोग ने जांच में पाया कि गूगल पे के लिए जानबूझकर “इंटेंट फ्लो प्रक्रिया” बनाई गई दूसरी ओर यूपीआई एप का इस्तेमाल “कलेक्ट फ्लोर प्रक्रिया” से ही हो सकता था। 

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इंटेंट फ्लो टेक्नोलॉजी कलेक्ट फ्लो के मुकाबले कहीं बेहतर और यूजर फ्रेंडली है। इंटेंट फ्लो में यूजर्स और कारोबारी दोनों को फायदा होता है, लेटेंसी यानी इंटरनेट की धीमी गति से आया धीमा पर कम रहता है, ट्रांजैक्शन की सफलता दर भी कहीं ज्यादा है। इस पर हुए सवालों पर गूगल ने आयोग को बताया कि उसने हाल में अपनी नीति बदली है और यूपीआई के एप को भी इंटेंट फ्लो प्रक्रिया से जोड़ा है।
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डाटा साझा करने की बनानी होगी नीति
आयोग ने आदेश दिया है कि डेवलपर्स द्वारा दी जाने वाली सेवाओं और फीचर्स का इस्तेमाल करने से गूगल किसी भी आम यूजर्स को किसी भी प्रकार से नहीं रोकेगा। साथ ही, अपने प्लेटफार्म पर डाटा को किस प्रकार स्टोर करता है, इसका इस्तेमाल, दूसरे एप या एप डवलपर से इन्हें साझा करना, साझा करने की संभावना व वास्तविक शेयरिंग, आदि की साफ और पारदर्शी नीति जारी करेगा।
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आयोग ने ये निष्कर्ष दिए

  1. गूगल ने प्रतिस्पर्धा के लिए बने कानून का उल्लंघन किया जब एप डवलपर्स को प्ले स्टोर का इस्तेमाल करने देने के लिए जीपीबीएस को अनिवार्य बनाया।
  2. खास बात यह रही कि गूगल जीपीबीएस का इस्तेमाल अपने ही एप यूट्यूब के लिए नहीं करता, यानी उसने भेदभाव किया था। यूट्यूब उसे अपनी सेवाओं के लिए कोई शुल्क का भुगतान नहीं कर रहा, जबकि दूसरे एप डवलपर्स पर यह शर्त लाद दी गई है।
  3. जीपीबीएस की अनिवार्यता से इनोवेशन को बढ़ावा देने में बाधा आई। भुगतान प्रोसेस करने वाले और एप डवलपर्स दोनों की कमाई पर असर पड़ा। इससे तकनीकी विकास और इनोवेशन पर ध्यान नहीं दिया जा सका। यानी खुले बाजार में इन-एप भुगतान प्रणाली से जुड़ी सेवाओं के तकनीकी विकास को सीमित कर दिया गया। यह भी खुली प्रतिस्पर्धा के लिए बने कानून का उल्लंघन है।
  4. जीपीबीएस इस्तेमाल नहीं करने वाले एप डवलपर्स और भुगतान प्रणाली सेवा देने वाली एजेंसियों को मार्केट में आने से ही रोक दिया गया।
  5. अपनी नीतियों से गूगल ने मार्केट में लाइसेंसशुदा मोबाइल ओएस और एंड्रॉयड ओएस के एप स्टोर पर एकाधिकार बनाने और इसे कायम रखने में मदद मिली।
  6. गूगल ने प्ले स्टोर पर खुद के यूपीआई एप व प्रतिद्वंदी यूपीआई एप के इस्तेमाल के लिए अलग प्रक्रिया बनाई।
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