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जंतर-मंतर बवाल में चली थी पैलेट गन: दस्तावेज में बड़ा खुलासा, डीसीपी के आदेश पर दागे गए 70 से ज्यादा शेल

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 29 Jul 2026 04:49 AM IST
सार

दिल्ली पुलिस के एक दस्तावेज में खुलासा हुआ है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए 'संसद चलो' मार्च के दौरान डीसीपी राजा बांठिया के आदेश पर आरएएफ ने पैलेट गन के 70 से अधिक शेल दागे थे। इस मामले में पैलेट गन के इस्तेमाल, कथित अनावश्यक बल प्रयोग और इसकी वैधता को लेकर विवाद गहरा गया है। इस बीच पैलेट गन पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका पर भी सुनवाई होगी।

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Pellet guns fired during Jantar Mantar chaos Major revelation in documents over 70 shells fired on DCP orders
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान उग्र हुई भीड़ को काबू में करने के लिए दिल्ली पुलिस के डीसीपी राजा बांठिया के आदेश पर पैलेट गन चलाई गई थी। सीआरपीएफ की विशेष इकाई रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) ने उनके आदेश के बाद पैलेट गन के 70 से अधिक शेल दागे। इसके अलावा पांच टीयर स्मोक ग्रेनेड, दंगारोधी गन (2 बीसी) और प्लास्टिक पैलेट का भी इस्तेमाल किया गया। यह खुलासा दिल्ली पुलिस के एक दस्तावेज़ में हुआ है। हालांकि, दिल्ली पुलिस अब तक पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार करती रही है।

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सवालों के घेरे में क्यों है आरएएफ की कार्रवाई?
जतर-मंतर पर हुई हिंसक झड़प में आरएएफ की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। पिछले सप्ताह उन्होंने मीडिया के सामने एक प्रदर्शनकारी को पेश किया था, जिसे पैलेट गन के छर्रे लगे थे। पैलेट गन का इस्तेमाल सीआरपीएफ की दंगारोधी इकाई आरएएफ द्वारा किया गया था। अंतरराष्ट्रीय समझौतों में इस हथियार के इस्तेमाल पर प्रतिबंध का उल्लेख किया जाता है। गौरतलब है कि पैलेट गन के एक शेल में 30 से 40 छर्रे होते हैं।
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दंगारोधी कार्रवाई की मंजूरी किसने दी थी?
दिल्ली पुलिस के एक दस्तावेज में दर्ज है कि 20 जुलाई की घटना के समय आरएएफ के डिप्टी कमांडेंट सतीश सांगवान ड्यूटी पर थे। वे बी-208 यूनिट की कमान संभाल रहे थे। उन्होंने डीओ रूम में बताया कि वे जोन-1 में नॉर्थ डीसीपी राजा बांठिया के साथ ड्यूटी पर तैनात थे। उनके आदेश पर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए दंगारोधी उपायों का इस्तेमाल किया गया। अन्य उपकरणों के साथ एंटी-रायट गन (एआरजी) का भी प्रयोग किया गया। यह गन कम जानलेवा हथियारों की श्रेणी में आती है और सावधानीपूर्वक इस्तेमाल किए जाने पर इसे जानलेवा नहीं माना जाता।
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पैलेट गन पर पाबंदी की मांग क्यों उठी?
पैलेट गन पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद, प्रशांत कुमार और शेख इरशाद मंसूरी की याचिका पर सुनवाई करने का फैसला किया गया है। याचिका में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा पैलेट गन तथा ऐसे अन्य हथियारों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिका के अनुसार, 20 जुलाई को 'संसद चलो' मार्च के दौरान कलाकार प्रशांत कुमार और शेख इरशाद मंसूरी पैलेट लगने से घायल हो गए थे।

घायलों ने पुलिस पर क्या आरोप लगाए?
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने न तो कोई हिंसा की और न ही किसी प्रकार की उकसावे वाली कार्रवाई की, इसके बावजूद आरएएफ की फायरिंग में वे घायल हो गए। उनका यह भी कहना है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस और आरएएफ ने आंसू गैस के गोले छोड़े, लाठीचार्ज किया और प्रदर्शनकारियों को कनॉट प्लेस के इनर सर्कल की ओर धकेला। उल्लेखनीय है कि 20 जुलाई को दिल्ली में हुए 'संसद चलो' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़प हुई थी।


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आरएएफ की कार्रवाई पर क्या माना गया?
20 जुलाई को जब भीड़ काबू में नहीं आ रही थी, तब आरएएफ ने दंगारोधी उपकरणों का इस्तेमाल किया था। उसी दौरान पैलेट गन भी चलाई गई। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इससे अपना पल्ला झाड़ लिया था और पैलेट गन चलाने के मामले में जांच बैठा दी गई। आरएएफ की आईजी सीमा ढूंढियाल ने अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान माना कि छात्रों पर अनावश्यक बल प्रयोग हुआ था।

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